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क्र‍िकेट मैच व‍िवाद: IAS अफसरों के विरोध में उतरा अब PPS एसोसिएशन, CM को लेटर लिखकर की ये मांग

लखनऊ. आईएएस और पीसीएस अधिकारियों के बीच क्रिकेट मैच के दौरान शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Dec 19, 2017, 08:42 PM IST

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    सीएम योगी आद‍ित्यनाथ। फाइल

    लखनऊ.आईएएस और पीसीएस अधिकारियों के बीच क्रिकेट मैच के दौरान शुरू हुआ विवाद अभी पूरी तरह से थमा भी नहीं था कि पीपीएस एसोसिएशन, आईएएस अधिकारियों को मिलने वाले अधिकारों के विरोध में खड़ा हो गया है। पीपीएस एसोसिएशन ने सीएम योगी आदित्यनाथ को एक लेटर लिखकर डीएम द्वारा थानाध्यक्षों की समीक्षा पुलिस लाइन में करने के निर्देश पर एतराज जताया है। साथ ही पुलिस रेग्युलेशन एक्ट 1861 में संशोधन करने की अपील किया है।

    पीपीएस एसोसिएशन की तरफ से लेटर में लिखी है ये बातें

    -पीपीएस एसोसिएशन ने सीएम योगी आदित्यनाथ को लेटर लिखकर 7 दिसंबर 2017 को जारी एक शासनादेश पर एतराज जताया है।

    -पीपीएस एसोसिएशन ने सीएम योगी से कहा है कि जिलाधिकारी द्वारा थानाध्यक्षों की समीक्षा पुलिस लाइन में करने का निर्देश जारी किया गया है। ये आदेश पुलिस एक्ट 1861 और पुलिस रेग्युलेशन एक्ट के अनुरूप नहीं है। इसे बदलने की जरूरत है।

    -यदि ऐसा नहीं किया गया तो इससे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों के जांच संबंधी कार्य क्षेत्र में अनावश्यक हस्तक्षेप होगा। डिस्ट्रिक्ट पुलिस एकीकृत कमांड में बेहतर काम कर रही है, इसमें बदलाव करना उचित नहीं होगा।

    -पुलिस महानिदेशक कार्यालय द्वारा भी इसके विषय में एक महीने पहले लेटर जारी कर अनुरोध किया गया है, इसलिए इस पर विचार करने की जरूरत है।

    क्या है आईएएस और आईपीएस विवाद

    - आईएएस वीक के तीसरे दिन आईपीएस और आईएएस एसोसिएशन के बीच इकाना स्टेडियम में क्रिकेट मैच खेला गया। इसमें आईएएस-11 को 9 विकेट से हार का सामना करना पड़ा।
    - इसके बाद सेंट्रल आईपीएस एसोसिएशन ट्विटर हैंडल पर ट्वीट हुआ- 'हमने फिर ऐसा किया। तय है कि हमारा डीएनए बेहतर है।' उससे पहले ट्वीट हुआ था- ‘जीत हमारे डीएनए में है।’
    - आईएएस एसोसिएशन पर इसकी प्रतिक्रिया हुई, लेकिन उसने जिम्मेदाराना ढंग से इसका जवाब दिया- ‘बधाई, आप डिजर्व करते थे। डीएनए गुड, लेकिन दोस्ताना मैच को डीएनए टेस्ट में न तब्दील करें।’
    - वहीं, आईपीएस एसोसिएशन के सचिव आईजी असीम अरुण ने कहा, ‘खेल, खेल होता है और हम इसे उसी भावना से खेलते हैं। आईएएस और आईपीएस में किसी तरह का विवाद नहीं है। हमने सेंट्रल आईपीएस एसोसिएशन से अनुरोध किया है कि वो अपनी हालिया पोस्ट को या तो संशोधित कर लें या हटा लें।''

    -बता दें, आईएएस और आईपीएस के बीच का विवाद सितंबर में लिखी मुख्य सचिव राजीव कुमार की एक चिट्ठी से हुआ था।
    -इसमें मुख्य सचिव ने कहा था कि कानून व्यवस्था की बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी करेंगे।
    -डीजीपी ने इस पर एतराज जाहिर करते हुए एक पत्र लिख दिया था, जिसके बाद से विवाद बढ़ता चला गया।


    ऐसे शुरू हुआ विवाद
    # 11 दिसंबर : आईपीएस असोसिएशन ने बैठक बुलाई, जिसे प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार की सफाई के बाद टाल दिया गया।
    # 13 दिसंबर : आईपीएस असोसिएशन ने डीएम की अध्यक्षता में बैठक का विरोध किया। एसपी के साथ सह-अध्यक्षता में बैठक की मांग।
    # 14 दिसंबर : आईपीएस असोसिएशन ने आईएएस असोसिएशन को चिट्ठी लिख 'सामंतशाही प्रोटोकॉल' और वीआईपी संस्कृति खत्म करने में सहयोग मांगा।
    # 7 सितंबर : कार्यक्रम क्रियान्वन विभाग ने मुख्य सचिव की ओर से निर्देश जारी किया कि जिलों में क्राइम मीटिंग की अध्यक्षता डीएम करेंगे।
    # 7 नवंबर : डीजीपी सुलखान सिंह ने शासन को पत्र लिखकर इस आदेश को पुलिस कप्तानों के अधिकार में हस्तक्षेप बताते हुए समीक्षा का अनुरोध किया।
    # 10 दिसंबर : मुख्य सचिव का निर्देश वायरल हुआ और मामला तूल पकड़ने लगा।

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    पीपीएस एसोस‍िएशन द्वारा ल‍िखा गया लेटर।
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