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जमीन पर सोती है ये अफसर, जब मनचलों ने छेड़ा तो लाइफ में आया यू-टर्न

सड़क से संसद तक मशहूर पीपीएस अधिकारी श्रेष्ठा ठाकुर को किसी ने लेडी सिंघम कहा तो किसी ने आयरन लेडी।

Danik Bhaskar

Dec 27, 2017, 11:00 PM IST

बहराइच. सड़क से संसद तक मशहूर पीपीएस अधिकारी श्रेष्ठा ठाकुर को किसी ने लेडी सिंघम कहा तो किसी ने आयरन लेडी। खुद लड़की होने के नाते पढ़ाई के दौरान मनचलों का शिकार हो चुकी श्रेष्ठा ठाकुर अब जहां भी रहती हैं वो किसी लड़की को सड़क पर चलते असुरक्षित महसूस करना पसंद नहीं करतीं। उनकी एक खास बात ये भी है कि वो खुद खाना बनवाकर कुत्तों को खिलाती हैं। बता दें, इस समय वो यूपी के बहराइच में सीओ पद पर तैनात पर हैं। जमीन पर सोना पसंद करती हैं श्रेष्ठा...

- बुलंदशहर में भाजपा विधायक से तू-तू मैं-मैं के बाद बहराइच भेजी गईं और कानपुर की रहने वाली श्रेष्ठा ठाकुर बताती हैं- ''मैं जमीन पर सोना पसंद करती हूं। सो कर उठने के बाद मैं अपना बिस्तर इस तरह लपेटकर रख देती हूं कि आज ही मेरा ट्रांसफर हो जाए तो जाने में कोई दिक्कत न हो।''
- ''मैं महिलाओं के मामले में हमेशा सचेत रहती हूं। ध्यान रखती हूं कि लड़कियों को कानूनी तौर पर मजबूत कर स‍कूं। शारीरिक तौर पर भी मजबूत करने के लिए मैं उन्हें ताइक्वांडो की ट्रेनिंग भी देती हैं।''

Life में ऐसा आया यूटर्न, बनीं पुलिस ऑफ‍िसर
- ''जैसे चर्चित आइपीएस नवनीत सिकेरा को जिस तरह न्याय न मिलने के कारण उन्होंने अपनी आईटी की नौकरी छोड़कर सिर्फ न्याय पाने के लिए आईपीएस की पढ़ाई की। फिर आईपीएस क्वालीफाई कर एक न्यायप्रिय अधिकारी के रूप में फेमस हुए।''
- ''उसी तरह मैं जब कानपुर में शिक्षा ग्रहण कर रही थी, तो मेरे साथ दो बार मनचलों ने छेड़छाड़ की। उस समय मुझे लगा कि इस प्रकरण में पुलिस को जिस तरह से अपनी कार्रवाई करनी चाहिए थी, नहीं की।''
- ''तभी मेरे मन में भी एक पुलिस अफसर बनने की चाहत ने जन्म लिया और 2012 में अपनी चाहत को हकीकत बनाकर मैंने पीपीएस क्वालीफाई किया।''

भाई का है सबसे बड़ा योगदान
- ''मेरे पिता एस बी सिंह भदौरिया और माता मिथलेश भदौरिया की मैं सबसे छोटी संतान हूं। मेरे सपनों को उड़ान देने में मेरे बड़े भाई मनीष प्रताप का बड़ा योगदान है।''
- ''पीपीएस जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी में जब मेरा मन ऊबने लगता था, तो भाई मेरा मनोबल बढ़ाते थे। मनोज प्रताप-मनीष प्रताप ये दोनों भाई मुझे बहुत प्यार करते हैं। पापा बिजनेसमैन हैं।''

लोग मारते थे ऐसे ताने
- ''मेरी पढ़ाई शुरू से लेकर ग्रैजुशन तक कानपुर में ही हुई। जब मैं ग्रैजुएशन में थी, तो आसपास के लोग बात करते थे कि बेटी बड़ी हो गई है इसे अब अकेले घर के बाहर नहीं जाना चाहिए। मेरे भाई ने सभी तानों को अनसुना कर मुझे पढ़ाई में मन लगाने को बोला।''
- ''एक दिन मैं कॉलेज जा रही थी कि तभी सड़क के किनारे एक बहुत 9-10 साल को लड़का भीख मांग रहा था। मैंने उस समय टिफिन का सारा खाना उस बच्चे को दे दिया। इसलिए अब मैं ऐसे बच्चों की हल्प जरूर करती हूं, जो लाचार-जरूररतमंद होते हैं।''

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