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नेशनल मेड‍िकल ब‍िल का व‍िरोध: IMA ने एक घंटे पहले ही स्थग‍ित की हड़ताल, ये रही वजह

सरकार के इस फैसले के खिलाफ प्राइवेट अस्पतालों की ओपीडी सुबह 6 से शाम 6 बज तक यानी कुल 12 घंटे बंद रहेगी।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jan 02, 2018, 06:53 PM IST

  • नेशनल मेड‍िकल ब‍िल का व‍िरोध: IMA ने एक घंटे पहले ही स्थग‍ित की हड़ताल, ये रही वजह
    डायग्नोस्ट‍िक सेंटर भी रहे बंद।

    लखनऊ. इंड‍ियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने मंगलवार को निर्धारित समय से एक घंटे पहले 5 बजे ही अपनी हड़ताल वापस ले लिया। साथ ही चिकित्सकीय सेवाएं शुरू कर दिया। ये फैसला आईएमए ने केंद्र सरकार की तरफ से नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) बिल को रिव्यू के लिए स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजे जाने के बाद लिया है। बता दें, आईएमए की हडताल मंगलवार को सुबह 6 से शाम 6 बजे तक कुल 12 घंटे के लिए प्रस्तावित थी, लेकिन आईएमए को 11 घंटे में ही अपनी हड़ताल बीच में स्थगित करनी पड़ गई। इस हड़ताल में 18 हजार डॉक्टर शामिल रहे। आगे पढ़‍िए पूरा मामला...

    -केंद्र सरकार की तरफ से लोकसभा में 29 दिसंबर को पेश नेशनल मेडिकल कमीशन बिल में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) को खत्म कर उसकी जगह नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) नाम से एक नया बिल लाने का प्रस्ताव रखा गया था।

    -इसके अलावा इसमें ब्रिज कोर्सेज के जरिए होम्योपैथी और आयुर्वेद जैसे क्षेत्रों के डॉक्टरों को एलोपैथी की दवाएं लिखने का अधिकार देने का भी प्रावधान है।

    -आईएमए ने एनएमसी बिल के विरोध में मंगलवार को देश भर में हड़ताल का आह्वाहन किया था। इसी कड़ी में देश में करीब 3 लाख और यूपी में लगभग 18 हजार डाक्टर सुबह 6 बजे से हड़ताल पर चले गए थे।

    -उधर लोकसभा में मंगलावर को एनएमसी बिल पर चर्चा होनी थी लेकिन आईएमए के विरोध के चलते इस नये मेडिकल बिल पर चर्चा किये बगैर उसे रिव्यू के लिए स्टैंडिंग कमेटी के मेम्बर्स के पास भेज दिया गया।

    -आईएमए भी अपनी इस मांग पर अड़ा था। आईएमए की शुरू से ही मांग थी कि इस बिल का रिव्यू किया जाये। उसके बाद ही इसे चर्चा के लिए सदन में रखा जाये।

    क्या कहते हैं डॉक्टर्स

    -आईएमए के सेक्रेटरी जेडी रावत के मुताबिक़ एनएमसी बिल प्राइवेट डॉक्टरों के विरोध में है। यह देश में नीम-हकीमों को बढ़ावा देने वाला कदम है। यदि ये बिल पास हो जाता है तो इससे इलाज और महंगा हो जाएगा।

    -साथ ही प्राइवेट डॉक्टरों का काम करना मुश्किल हो जाएगा। केंद्र सरकार एमसीआई को खत्म कर नेशनल मेडिकल कमीशन(एनएमसी) बिल लाना चाहती है। एनएमसी में कुल 25 मेम्बर हैं। इनमें से 20 सरकारी और 5 प्राइवेट डॉक्टर हैं।

    -उनका आरोप है कि इस बिल को तैयार करने में प्राइवेट डॉक्टरों की राय नहीं ली गई है। ये एक लोकतांत्रिक संस्था (एमसीआई) की जगह सरकार द्वारा नामित सदस्यों के बहुमत वाली संस्था (नेशनल मेडिकल कमीशन) को लाना पीछे ले जाने वाला कदम है।

    -इस बिल को आईएमए के डॉक्टर कभी भी मानने को तैयार नहीं है। इसलिए इस बिल का ठीक से रिव्यू किया जाना चाहिए।

    आईएमए ने कहा

    -आईएमए के प्रेसिडेंट डॉ. पीके गुप्ता के मुताबिक, प्राइवेट डॉक्टरों की हड़ताल आगे केंद्र सरकार को झुकना पड़ा है। हमारी शसरकार से मांग थी कि एनएमसी बिल को रिव्यू किया जाए। उसके बाद ही उस पर लोकसभा में चर्चा की जाए।

    -सरकार ने हमारी मांगे मान ली है और बिल पर चर्चा किए बगैर उसे रिव्यू के लिए स्टैंडिंग कमेटी के पास भेज दिया गया है। केंद्र सरकार के इस फैसले से आईएमए के डाक्टरों में खुशी का माहौल है।

    आईएमए की हड़ताल के कारण 12 सौ मरीजों के ऑपरेशन टले

    -डॉ. पीके गुप्ता के ने बताया, आईएमए के आह्वाहन पर मंगलवार को प्रदेश भर में करीब 18 हजार डॉक्टर्स हड़ताल पर थे।

    -केवल लखनऊ में लगभग 350 नर्सिंग होम, 500 मेडिकल क्लिनिक, 300 के करीब डायग्नोस्टिक सेंटर हड़ताल में शामिल रहे है।

    -आईएमए से जुड़े डॉक्टरों की हड़ताल के चलते लगभग 1200 मरीजों के ऑपरेशन टालने पड़े हैं।

    प्रदेशभर में हड़ताल से परेशान हुए मरीज, क्लीनिक से लौटे निराश
    -आईएमए के आहृवान पर मेरठ शाखा ने भी मंगलवार को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक अपनी हड़ताल रखी। इस दौरान सभी प्राइवेट डॉक्टरों के क्लीनिक बंद रहे।

    -डॉक्टरों ने दिन में कोई मरीज नहीं देखा, केवल इमरजेंसी के मरीज देखे गए। डॉक्टरों की हड़ताल से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    -प्राइवेट डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से मरीजों को सरकारी अस्पतालों की ओर रूख करना पड़ा।

    -इसी तरह गोरखुपर, कानपुर सह‍ित कई शहरों में डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज परेशान रहे।

    क्या है मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया?
    - इंडियन मेडिकल एसोसिएशन देशभर के मेडिकल प्रोफेशनल्स की रिप्रेंजेटेटिव बॉडी है। देश का कोई भी रजिस्टर्ड डॉक्टर इसका चुनाव लड़ सकता है और अपना लीडर चुनने के लिए वोट कर सकता है।

    क्या नेशनल मेडिकल कमीशन में भी इलेक्शन का ऑप्शन है?
    - नहीं। इसमें गवर्नमेंट द्वारा चुने गए चेयरमैन और मेंबर्स रखे जाएंगे। इसके अलावा बोर्ड मेंबर्स को कैबिनेट सेक्रेटरी के अंडर में काम करने वाली सर्च कमेटी चुनेगी।

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Web Title: Private Doctors Strike Against National Medical Commission Bill In Uttar Pradesh
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