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सरकारी कैश में 57 रु. ज्यादा मिले तो रेलवे ने रोकी 3 साल तक वेतन वृद्धि, कोर्ट से भी म‍िली न‍िराशा

तपन कुमार चक्रवर्ती लखनऊ जंक्शन के बुकिंग ऑफिस में तैनात था। जांच में उसके पास सरकारी कैश में 57 रुपए अतिरिक्त मिले।

Danik Bhaskar | Jan 23, 2018, 08:58 PM IST
लखनऊ हाईकोर्ट बेंच। लखनऊ हाईकोर्ट बेंच।

लखनऊ. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 12 साल पहले सरकारी कैश में 57 रुपए अतिरिक्त पाये जाने और बिना कैंसिल टिकट रखने के दोषी पाए गए रेलवे कर्मचारी के वेतन से कटौती करने और 3 साल तक उसकी वेतन वृद्धि रोकने के रेलवे के आदेश में कोई दखल देने से इनकार करते हुए कर्मचारी को राहत देने से साफ मना कर दिया है। जस्टिस डीके अरोड़ा और जस्टिस वीरेंद्र कुमार द्वितीय की बेंच ने कर्मचारी की याचिका खारिज कर द‍िया। उन्होंने अपने फैसले में कहा कि सार्वजनिक धन और वित्तीय संस्थाओं में काम करने वाले कर्मचारियों को संदेह से परे होना चाहिए। आगे पढ़‍िए पूरा मामला...



-दरअसल, तपन कुमार चक्रवर्ती लखनऊ जंक्शन के बुकिंग ऑफिस में तैनात था। 21 अगस्त 2006 को विजिलेंस टीम की जांच में उसके पास सरकारी कैश में 57 रुपए अतिरिक्त मिले। उसके व्यक्तिगत कैश में 185 रुपए भी अतिरिक्त पाए गए। याची के पास कुछ टिकट भी मिले, जो कैंसिल नहीं किए गए थे।

-इसके बाद याची पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उसके वेतन में कटौती की गई और आगामी 3 साल के लिए वेतनवृद्धि रोक दी गई।

-याची रेलवे के इस आदेश से संतुष्ट नहीं हुआ। पैसों की अधिकता के संबंध में उसने सफाई थी कि लेन-देन में कुछ पैसे कम या अधिक हो सकते हैं, इस त्रुटि का समायोजन किया जा सकता है। लिहाजा, रेलवे के आदेश को उसने कैट में चुनौती दी, जहां से उसे राहत नहीं मिली। जिसके बाद उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।

-वहीं याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि याची व्यक्तिगत और सरकारी कैश में पाए गए अतिरिक्त पैसों का सही जवाब नहीं दे सका है।
-कोर्ट ने पाया कि टिकटों के संबंध में भी याची संतोषजनक जवाब नहीं दे सका था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।