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28 साल बाद राम मंदिर के लिए अयोध्या से निकाली गई रथ यात्रा, BJP को हो सकता चुनावी फायदा

यह रथ 6 राज्यों से 41 दिन में करीब 6 हजार किमी का रास्ता तय करेगा।

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2018, 07:57 AM IST
राम राज्य रथ यात्रा को कारसेवक पुरम से विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री चंपत राय ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। राम राज्य रथ यात्रा को कारसेवक पुरम से विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री चंपत राय ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

अयोध्या (यूपी). 28 साल बाद फिर अयोध्या से राम मंदिर के नाम पर श्रीराम राज्य रथ यात्रा निकाली गई। यात्रा को कारसेवक पुरम से विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री चंपत राय ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान बड़ी संख्या में साधु-संत मौजूद रहे। यह रथ 6 राज्यों से 41 दिन में करीब 6 हजार किलो मीटर का रास्ता तय करेगा। यात्रा का समापन केरल के तिरुवनंतपुरम होगा। इसका जिम्मा विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और महाराष्ट्र की संस्था श्री रामदास मिशन यूनिवर्सल सोसाइटी संभाल रही है। बता दें कि 1990 में बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से अयाेध्या के लिए रथ यात्रा निकाली थी।

25 मार्च को राम नवमी पर केरल में होगा समापन

- वीएचपी अवध जोन के को-ऑर्डिनेटर शरद शर्मा का कहना है कि संगठन यात्रा का समर्थन कर रहा है, पर उसका हिस्सा नहीं है। इस रथ यात्रा का मकसद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की मांग करना है। यात्रा का समापन राम नवमी के दिन 25 मार्च को होगा।

- श्री रामदास मिशन यूनिवर्सल सोसाइटी के राष्ट्रीय महासचिव श्री शक्ति शांतानंद महर्षि का कहना है, लोग चाहते हैं कि देश में रामराज्य हो। भगवान राम 14 साल बाद अयोध्या वापस आए थे, उसी तरह सरकार को 2019 तक 14 महीने के अंदर अयोध्या में राम मंदिर बनवा देना चाहिए।

1) मकसद

5 मांगों के लिए 10 लाख लोगों के कराए जाएंगे हस्ताक्षर

- रथ यात्रा खत्म होने के बाद तिरुवनंतपुरम के पद्मनाभ मंदिर के सामने राम राज्य सम्मेलन होगा। इनमें रामराज्य की स्थापना, राम जन्मभूमि पर भव्य राममंदिर का निर्माण, रामायण को स्कूलों के कोर्स में शामिल करने, रविवार की जगह गुरुवार को साप्ताहिक छुट्टी की मांग की जाएगी। इसके सपोर्ट में 10 लाख से ज्यादा लोगों के हस्ताक्षर भी कराया जाएंगे।

2) राजनीति

यात्रा से बीजेपी को 2019, 4 राज्यों के चुनाव में फायदे की उम्मीद
- इस रथ यात्रा के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। पॉलिटिकल एक्सपर्ट इसे 2019 के लोकसभा चुनाव और उससे पहले होने वाले कर्नाटक, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान विधानसभा चुनाव की तैयारियों से भी जोड़कर देख रहे हैं।
- कर्नाटक में कांग्रेस सरकार है, जबकि अन्य राज्यों में भाजपा की सरकार है। ये राज्य हिंदू बहुल हैं। इसलिए यात्रा से हिंदू वोटर प्रभावित हो सकते हैं और इसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है।

3) खर्च

25 लाख रुपए से 45 दिन में तैयार हुआ रथ
- राम राज्य रथ यात्रा के लिए खास रथ तैयार किया गया है। इसे बनाने में 25 लाख रुपए का खर्च आया है। इसका काम 45 दिन से चल रहा था। रथ 28 फीट लंबा है। इसमें राम-जानकी और हनुमान जी की मूर्तियां हैं। रथ पर दक्षिण भारतीय मसालों का प्लास्टर लगाया गया है। इसमें 28 घुमावदार पिलर्स बनाए गए हैं।

14 महीने बाद 2019 में अयोध्या लौटेगा रथ

- राम राज्य रथ यात्रा यूपी में अयोध्या, लखनऊ, बनारस, इलाहाबाद, चित्रकूट, मध्यप्रदेश में भोपाल, इंदौर, छतरपुर, सागर, ओंकारेश्वर, उज्जैन महाराष्ट्र में नासिक, कर्नाटक में बेंगलुरू, मैसुरू, बेल्लारी, तमिलनाडु में रामेश्वरम, केरल में तिरुवनंतपुरम जैसे प्रमुख शहरों से गुजरेगी।
- यात्रा पूरी होने के बाद इस रथ को रामदास मिशन यूनिवर्सल संगठन के तिरुवनंतपुरम स्थित हेडक्वार्टर में सुरक्षित रखा जाएगा। यहां से 2019 में रथ वापस अयोध्या भेजा जाएगा।

रथ यात्रा का मकसद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की मांग करना है। रथ यात्रा का मकसद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की मांग करना है।
41 दिन में 6 राज्यों से गुजरेगी रथ यात्रा। 41 दिन में 6 राज्यों से गुजरेगी रथ यात्रा।
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राम राज्य रथ यात्रा को कारसेवक पुरम से विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री चंपत राय ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।राम राज्य रथ यात्रा को कारसेवक पुरम से विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री चंपत राय ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
रथ यात्रा का मकसद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की मांग करना है।रथ यात्रा का मकसद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की मांग करना है।
41 दिन में 6 राज्यों से गुजरेगी रथ यात्रा।41 दिन में 6 राज्यों से गुजरेगी रथ यात्रा।
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