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मां के लिए बेटे ने चलाई 1400 Km. बाइक, नहीं मिली तो लिखा मोदी को लेटर

दिल्ली पहुंचने से पहले आंवला स्टेशन पर मां ट्रेन के अंदर से ही गायब हो गई।

Dainik Bhaskar

Dec 08, 2017, 03:30 PM IST
72 साल की बूढ़ी मां सद्भावना एक्सप्रेस में बेटे के साथ सफर करते हुए गायब हो गई। 72 साल की बूढ़ी मां सद्भावना एक्सप्रेस में बेटे के साथ सफर करते हुए गायब हो गई।

लखनऊ. 29 सितंबर 2017 को दुलिया दूबे (72) अपने बेटे के साथ सद्भावना एक्सप्रेस में बलिया से दिल्ली के लिए जा रही थी। पहुंचने से पहले आंवला स्टेशन पर उसकी मां ट्रेन के अंदर से ही गायब हो गई। बेटे ने पहले ट्रेन के अंदर मां को ढूंढा, लेकिन वो नहीं मिली। जब मां का पता नहीं चला, तो उसके बेटे ने पीएम मोदी, राजनाथ सिंह और सीएम योगी को चिट्ठी लिखी। ट्रेन की बोगी में मां को ढूंढा

- बलिया के ककारघाट खास के रहने वाले हरिन्द्र ने बताया, "29 सितंबर को अपनी मां को गांव से दिल्ली लेकर जा रहा था। रात के वक्त ट्रेन में जब उसकी मां सो गई, तो वो भी अपनी सीट पर सोने चला गया।"

- "30 सितंबर की सुबह जब उसकी नींद आंवला स्टेशन पर सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर खुली, तो उसकी मां अपनी सीट पर नहीं दिखाई दी। मैंने बोगी में मौजूद लोगों से पूछा, लोगों ने जानकारी नहीं होने की बात कही।"

- "हरिन्द्र ने टीटी की मदद से ट्रेन के अंदर एक-एक बोगी में उसने अपने मां की तलाश की। जब मां का पता नहीं चला, तो उसने घरवालों को मां के गायब होने की सूचना दी। घर के कुछ लोग आंवला स्टेशन पर पहुंच गए। उनके साथ हरिन्द्र ने रेलवे स्टेशन के बाहर तलाश करनी शुरु कर दी।

1400 Km बाइक पर बेटे ने किया सफर

- आंवला स्टेशन पर सर्च के बाद उसी दिन (30 सितंबर) को हरिन्द्र मुरादाबाद रेलवे स्टेशन पर चला गया। वहां भी उसने तलाश की। उस वक्त सिर्फ उसके पास एक फोटो थी। रेलवे स्टेशन के आस-पास और शहर के अंदर उसने मां की फोटो दिखाकर लोगों से पूछा, कोई भी शख्स उसकी मां के बारे में जानकारी नहीं दे पाया।

- मुरादाबाद के बाद वो फिर आंवला स्टेशन पर आ गया। उसने इस बार आंवला कस्बे में ढूंढने का फैसला किया। इस बीच घर वाले उसके पास एक बाइक लेकर आ गए। मां की फोटो के साथ हरिन्द्र ने आंवला से बलिया के बीच पड़ने वाले सभी रेलवे स्टेशन और शहर के अंदर उसने अपनी मां को ढूंढा।

रेल अफसरों ने दूसरी ट्रेन में बैठा दिया

-हरिन्द्र ने बताया, "मेरा भाई रविन्द्र दिल्ली से मां को ढूंढते हुए आंवला स्टेशन पर पहुंचा। हम दोनों ने 30 सितंबर की शाम जीआरपी और स्टेशन मास्टर दोनों से अपनी मां के बारे में पूछा। उन लोगों ने बताया कि आंवला स्टेशन पर सुबह 7.18 बजे मिलने के बाद रेल अफसरों ने उसे दूसरी ट्रेन में बैठा दिया। आगे के स्टेशन के बार में कोई सूचना उन लोगों ने नहीं दी।

-दोनों भाईयों ने रेलवे स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा, "उन्होंने अपनी ड्यूटी सही तरीके से नहीं निभाई। अगर ड्यूटी सही तरीके से निभाई होती तो अपनी मां को तलाशने की जरुरत नहीं पड़ती ।"

सीएम से लेकर पीएम को लिखा लेटर

- जब बूढ़ी मां का पता दोनों को नहीं चला। उन्होंने एक अक्टूबर को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, 14 अक्टूबर को पीएम नरेंद्र मोदी, 17 अक्टूबर को होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह और 26 अक्टूबर को रेलवे मिनिस्टर को लेटर लिखा। लेटर में उसने रेलवे के अधिकारियों की लापरवाही के बारे में भी कम्प्लेन की है। दुखी मन से हरिन्द्र ने बताया, "मां को तलाशने में उसके पास जमा पैसे भी खर्च हो गए। अगर सरकार मदद करेगी, तो उसकी मां मिल सकती है।"


सुबह के वक्त जब बेटे की आंख आंवला स्टेशन के पास खुली, तो उसे मां सीट पर नहीं मिली। सुबह के वक्त जब बेटे की आंख आंवला स्टेशन के पास खुली, तो उसे मां सीट पर नहीं मिली।
मां को ढूंढने के लिए हरिन्द्र ने भाई की भी मदद ली। मां को ढूंढने के लिए हरिन्द्र ने भाई की भी मदद ली।
बेटे ने ट्रेन के हर बोगी में अपनी बूढ़ी मां को ढूंढा। बेटे ने ट्रेन के हर बोगी में अपनी बूढ़ी मां को ढूंढा।
जब मां नहीं मिली, 1400 Km. तक बाइक चलाई। आंवला से बलिया के बीच पड़ने वाले सभी स्टेशनों पर उसने अपनी मां को ढूंढा। जब मां नहीं मिली, 1400 Km. तक बाइक चलाई। आंवला से बलिया के बीच पड़ने वाले सभी स्टेशनों पर उसने अपनी मां को ढूंढा।
अब उसने पीएम मोदी, सीएम योगी और राजनाथ सिंह को लेटर लिखा। अब उसने पीएम मोदी, सीएम योगी और राजनाथ सिंह को लेटर लिखा।
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72 साल की बूढ़ी मां सद्भावना एक्सप्रेस में बेटे के साथ सफर करते हुए गायब हो गई।72 साल की बूढ़ी मां सद्भावना एक्सप्रेस में बेटे के साथ सफर करते हुए गायब हो गई।
सुबह के वक्त जब बेटे की आंख आंवला स्टेशन के पास खुली, तो उसे मां सीट पर नहीं मिली।सुबह के वक्त जब बेटे की आंख आंवला स्टेशन के पास खुली, तो उसे मां सीट पर नहीं मिली।
मां को ढूंढने के लिए हरिन्द्र ने भाई की भी मदद ली।मां को ढूंढने के लिए हरिन्द्र ने भाई की भी मदद ली।
बेटे ने ट्रेन के हर बोगी में अपनी बूढ़ी मां को ढूंढा।बेटे ने ट्रेन के हर बोगी में अपनी बूढ़ी मां को ढूंढा।
जब मां नहीं मिली, 1400 Km. तक बाइक चलाई। आंवला से बलिया के बीच पड़ने वाले सभी स्टेशनों पर उसने अपनी मां को ढूंढा।जब मां नहीं मिली, 1400 Km. तक बाइक चलाई। आंवला से बलिया के बीच पड़ने वाले सभी स्टेशनों पर उसने अपनी मां को ढूंढा।
अब उसने पीएम मोदी, सीएम योगी और राजनाथ सिंह को लेटर लिखा।अब उसने पीएम मोदी, सीएम योगी और राजनाथ सिंह को लेटर लिखा।
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