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US की 50 लाख की JOB छोड़ ये लड़का बना IPS, सुनाया इंटरेस्ट‍िंग किस्सा

करीब तीन साल तक मैंने न्यूयॉर्क में 50 लाख के सालाना पैकेज पर काम किया, लेकिन वहां मेरा मन नहीं लग रहा था।

Danik Bhaskar | Jan 15, 2018, 06:23 PM IST

लखनऊ. बिहार के रहने वाले 2012 बैच के आईपीएस संतोष मिश्रा की दूसरी पोस्टिंग यूपी के अंबेडकर नगर जिले के एसपी के तौर पर हुई है। संतोष ने 2011 में US में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़ समाज के लिए कुछ करने की ठानी। उन्होंने 50 लाख का पैकेज छोड़कर सिविल सर्विस की तैयारी की और फर्स्ट अटेंप्ट में ही देश के सबसे बड़े एग्जाम को पास आउट कर लिया। उनकी पहली पोस्टिंग अमरोहा जिले में थी। छोड़ दी 50 लाख के पैकेज की जॉब...

- संतोष बताते हैं- ''मैं बिहार के पटना जिले का रहने वाला हूं। पिता लक्ष्मण मिश्रा आर्मी से रिटायर्ड हैं। मां हाउस वाइफ हैं। तीन बहनें हैं।''
- ''मैंने 10th और 12th बिहार के स्कूल से पास किया। फिर पुणे यूनिवर्सिटी से मकैनिकल इंजीनियरिंग 2004 में कंप्लीट की।''
- ''इसके बाद मेरा सिलेक्शन यूरोप की एक कंपनी में हो गया। 4 साल यूरोप में जॉब करने के बाद मैंने यूएस में जॉब शुरू की। फिर करीब सात साल तक मैंने न्यूयॉर्क, यूरोप और इंडिया में 50 लाख के सालाना पैकेज पर काम किया, लेकिन वहां मेरा मन नहीं लग रहा था।''
- ''मैंने बचपन से ही पिता को आर्मी में देखता था, तब से देश सेवा की ठानी थी। इसलिए 2011 में न्यूयॉर्क की जॉब छोड़कर वापस इंडिया आ गया और सिविल सर्विसेज की सेल्फ प्रिपरेशन की।''

- ''मैंने 1 साल की तैयारी के बाद सिविल सर्विस का एग्जाम दिया और 2012 में देश के सबसे बड़े एग्जाम को पास कर लिया।''

पहली पोस्ट‍िंग के दौरान घटी थी ये इंटरेस्ट‍िंग घटना
- संतोष बताते हैं- ''अमरोहा जिले में एसपी के पद पर तैनात रहने के दौरान एक 5वीं क्लास के बच्चे ने आकर मुझसे शिकायत की कि उसका एक दोस्त 15 दिनों से स्कूल नहीं आता।''
- ''मुझे उसकी इतनी अच्छी भी लगी और चिंता भी हुई। मैंने उसपर तुरंत कार्रवाई की। मैंने उस बच्चे का पता किया। उसके घर गया तो वहां पता चला कि वो अपनी मिठाई की दुकान पर काम करने गया है। इसके बाद मैं दुकान पर गया और वहां उसके फादर से बात की। उस बच्चे को दोबारा पढ़ने के लिए स्कूल भेजा।''

खाली समय में पढ़ाता हूं बच्चों को
- ''अक्टूबर 2017 को जब से मेरी पोस्टिंग अंबेडकर नगर जिले में हुई, तब से वो समय निकालकर सरकारी स्कूल के बच्चों के बीच जाता हूं।''
- ''कुछ दिन पहले जब मैं एक प्राइमरी स्कूल में पहुंचा, तो वहां के 4th के क्लास के बच्चों ने जलेबी खाने की इच्छा जताई। तब हमने जलेबी स्कूल में मंगवाई।''
- ''तब तक मैंने उनकी क्लास में मैथ के प्रश्न सॉल्व करवाए, सामान्य ज्ञान के प्रश्न पूछे, फिर साथ जलेबी खाई। कुछ बच्चों को बैग भी दिया। मैं अक्सर स्कूल में पढ़ाने जाता हूं।''
- ''क्राइम और लॉ एन ऑर्डर को संभालना तो मेरा कर्तव्य है, लेकिन इसके बीच रहकर समाज के कुछ करना वो अलग है।''