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10 महीने पहले जंगल में मिली थी ये 'मोगली गर्ल', अब जी रही ऐसी Life

लखनऊ के निर्वाण संस्था में मोगली गर्ल का इलाज चल रहा है।

आदित्य कुमार मिश्र | Last Modified - Feb 06, 2018, 05:07 PM IST

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    लखनऊ. यूपी के बहराइच के जंगल में मिली मोगली गर्ल उर्फ़ ‘एहसास’ का लखनऊ की निर्वाण संस्था में 10 महीने से इलाज चल रहा है। इलाज के बाद एहसास की हालात में लगातार सुधार हो रहा है। यहां पर उसे बॉडी लैंग्वेज समझने से लेकर कम्युनिकेशन स्किल्स की ट्रेनिंग दी जा रही है। ‘एहसास’ का निशुल्क इलाज करने वाली निर्वाण संस्था के डॉ. एसएस धपोला ने DainikBhaskar.com से बात की और ‘एहसास’ के बारे में जानकारी दी।

    कौन है मोगली गर्ल

    - बता दें कि बहराइच जिले के कतरनिया घाट के जंगल में कुछ ग्रामीणों ने 4 अप्रैल 2017 को मोगली गर्ल को बंदरों के झुंड के साथ देखा था। लोग बच्ची को बचाने के लिए उसके पास पहुंचे तो बंदरों ने हमला कर दिया था।

    - उस वक्त बच्ची के हाव-भाव, हरकतें और बोली बंदरों जैसी थी। लोग काफी मशक्कत के बाद उसे बंदरों के झुंड से निकालकर बहराइच सिविल हॉस्पिटल लेकर गए थे।

    - इस मामले की जानकारी होने पर सीएमओ ने मोगली गर्ल को बेहतर इलाज के लिए एम्बुलेंस से लखनऊ के लोहिया हॉस्पिटल भेजने के निर्देश दिए थे।

    - उस समय मोगली गर्ल की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। लोहिया हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने बच्ची के बेहतर इलाज के लिए उसे इंदिरा नगर के निर्वाण हास्पिटल रेफर कर दिया था। 8 अप्रैल 2017 से मोगली गर्ल का यहां इलाज चल रहा है।

    आगे की स्लाइड्स में जानें एक कपल ने किया था 'एहसास' के माता-पिता होने का दावा...

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    मां-बाप का दावा निकला था झूठा

    - मोगली गर्ल की जानकारी मीडिया में आने के बाद 10 अप्रैल 2017 को जौनपुर के एक कपल निर्वाण हॉस्पिटल पहुंचे थे। उनका दावा था कि मोगली गर्ल का असली नाम अलीजा है।

    - कपल ने बताया था कि "अलीजा 29 अप्रैल 2016 को 8 साल की उम्र में करतनिया घाट के जंगलों में उनसे बिछड़ गई थी। घरवालों ने उसे तलाशने की काफी कोशिश की थी, लेकिन उसका कुछ भी पता नहीं चल पाया। उसके गायब होने की रिपोर्ट भी लिखाई गई थी।"

    - उन्होंने निर्वाण हॉस्पिटल के डाक्टरों को एक तस्वीर दिखाते हुए उसे अपनी बेटी बताया था और उसे अपने साथ ले जाने की जिद की थी, लेकिन निर्वाण हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने बच्ची को बिना डीएनए रिपोर्ट के उन्हें सौपने से इनकार कर दिया था।

    - बाद में बच्ची के असली मां-बाप का दावा करने वाले कपल का डीएनए टेस्ट कराया गया था, जिसमें उनका दावा गलत निकला। इसके बाद से मोगली गर्ल निर्वाण संस्था में रह रही है। उसका इलाज जारी है।

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    दस महीने बाद अब ऐसी है मोगली गर्ल

    - निर्वाण सस्था के संचालक डॉ. एसएस धपोला के मुताबिक- "8 अप्रैल 2017 को एहसास को निर्वाण हॉस्पिटल में लाया गया था। उस टाइम उसकी याददाश्त जा चुकी थी। उसकी हरकतें बंदरों जैसी थी। वह ठीक से कम्युनिकेट भी नहीं कर पा रही थी।"

    - उन्होंने बताया- "अब उसकी कंडीशन में तेजी से सुधार देखने को मिल रहा है। कम्युनिकेशन के साथ बॉडी लैंग्वेज और हैबिट की ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि उसकी हरकतों में सुधार आ सके और वो अपनी फीलिंग्स को एक्सप्रेस कर सके।"

    - डॉ. एसएस धपोला ने बताया- "बच्ची को सोशल एक्टिविटीज के जरिए बातें समझा रहे हैं, उसे जंगल के एनवायरनमेंट से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं। इसके साथ ही स्पीच थेरेपी, फिजिकल थेरेपी और कई अन्य तरीकों से उसे पूरी तरह से समझने और सिखाने की कोशिश की जा रही है।"

    - "एहसास अब धीरे-धीरे अपनी फीलिंग्स को एक्सप्रेस करने लगी है, पहले उसे भूख प्यास का पता नहीं चल पाता था, लेकिन अब वो भूख लगने पर खाना और पानी मांगती है।"

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    मोगली गर्ल को ये है बीमारी

    - डॉ. धपोला के मुताबिक- "मोगली गर्ल उर्फ़ ‘एहसास’ की यादाश्त जा चुकी है। उसे मेंटल डिसआर्डर है। इस तरह के केस में याददाश्त वापस आने के चांसेज काफी कम होते हैं।"

    - "वह अपना पास्ट भूल चुकी है। डॉक्टरों की कोशिश है की उसके प्रेजेंट को ठीक करने के लिए उसे पास्ट में न जाने दें इसलिए उसका बिहेवियर थरेपी के जरिये इलाज चल रहा है।"

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