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खूंखार जानवरों से है इस शख्स की दोस्ती, 5 बार मौत के मुंह से वापस लौटा

लखनऊ चिड़िया घर के केयर टेकर इसरार अहमद उर्फ बब्बू जानवरों की देखभाल का काम करते हैं।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Feb 14, 2018, 12:33 PM IST

    • लखनऊ. राजधानी के हजरतगंज स्थित चिड़िया घर के केयर टेकर इसरार अहमद उर्फ बब्बू जानवरों की देखभाल का काम करते हैं। उन्होंने हाल ही में लखनऊ के सेंट फ्रांसिस स्कूल से एक तेंदुए को रेस्क्यू किया था। वन विभाग की टीम शहर में जब भी कोई खूंखार जानवर रेस्क्यू करने जाती है तो बब्बू को साथ लेना जाना नहीं भूलती। जू में जानवरों की देखभाल करते हुए अब उनकी बब्बू से ऐसी बॉन्डिंग हो गई है कि अगर बब्बू एक दिन के लिए छुट्टी पर चले जाते हैं तो जानवर उनकी याद में खाना पीना तक छोड़ देते हैं। बब्बू ने DainikBhaskar.com से अपने एक्सपीरियंस शेयर करते हुए बताया कि कैसे जानवरों को रेस्क्यू करने के चक्कर में उनकी जान जैसे-तैसे बची और 5 बार मौत के मुंह से सही सलामत लौट आए।

      ऐसे शुरू हुई जानवरों से दोस्ती

      - 31 साल के बब्बू बताते हैं- मेरे पिता लखनऊ चिड़िया घर में सुरक्षा अधिकारी के पद से रिटायर्ड हैं। मैं जब 5 साल का था तब मेरे घर में एक जर्मन शेफर्ड पाला गया था। मैं बचपन में उसके साथ खेला करता था। बाद में मेरी उससे काफी अच्छी बॉन्डिंग हो गई।

      - जर्मन शेफर्ड मेरे बगैर खाना नहीं खाता था। हम दोनों एक दूसरे के साथ खूब मस्ती करते थे। बब्बू बताते है, मैं जब 14 साल का था तब मैंने एक पागल कुत्ते से एक आदमी को बचाया था। उसके बाद से मेरी हिम्मत और बढ़ गई। फिर मैंने गली-मोहल्लों में भी जानवरों को रेस्क्यू करना शुरू कर दिया।

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      5 बार मौत के मुंह से वापस आया

      - उन्होंने बताया- मेरे काम को देखते हुए मुझे 11 नवंबर 2007 को लखनऊ के जू में केयर टेकर की जॉब मिल गई। मैंने पहली बार जू की टीम के साथ मिलकर 10 साल के एक लेपर्ड को घर के अंदर से रेस्क्यू किया था। इसके बाद जू में लाकर कई दिनों तक मैंने उसकी देखभाल की। इस तरह मेरी लेपर्ड से दोस्ती हो गई।

      - बब्बू बताते हैं- मैंने हाल ही में लखनऊ के ठाकुरगंज में एक लेपर्ड को स्कूल के अंदर से रेस्क्यू किया था। अब तक लखनऊ भर से 50 से ज्यादा जानवरों को रेस्क्यू कर चुका हूं, उसमें कई खूंखार जानवर भी शामिल हैं।

      - बब्बू ने बताया- जानवरों को रेस्क्यू करने के दौरान दर्जनों बार मेरे ऊपर हमला हो चुका है। मैं कई बार घायल भी हो चुका है। पांच से ज्यादा बार मैं मौत के मुंह से सही सलामत लौटकर आया हूं। लेकिन, मैंने अपना काम नहीं छोड़ा।

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      मेरे पास दौड़े चले आते हैं जानवर

      - बब्बू बताते हैं कि- जू में रहने वाले लेपर्ड, शेर, लंगूर सभी से मेरी काफी अच्छी दोस्ती हो गई है। मेरे बुलाने पर जानवर अपना काम छोड़कर पास दौड़े चले आते हैं।

      - "कई जानवरों के साथ तो मेरी ऐसी बॉन्डिंग है कि मैं अगर एक दिन के लिए भी छुट्टी पर चला जाता हूं तो वो खाना-पीना छोड़ देते हैं। वो दूसरे केयर टेकर के बुलाने या खाना देने पर उसे हाथ भी नहीं लगाते।"

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      अब यही मेरा परिवार है

      - उन्होंने बताया- "जब काम पर वापस लौटता हूं तब मुझे देखकर सभी जानवर ऐसे दौड़ते हैं, जैसे कितने दिनों से मुझे देखा ही नहीं है। लेपर्ड तो मेरे पास आने के लिए बाड़े के अंदर से ही कूदने लगता है।"

      - "जानवरों के बीच काम करते हुए मुझें 10 साल से ज्यादा का टाइम हो गया। अब तो ऐसा लगता है जैसे यही मेरा परिवार है। मेरे काम को देखते हुए जू प्रशासन ने मुझे रहने के लिए कैम्पस के अंदर ही कमरा भी दे रखा है।"

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