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लड़की की जान बचाते ट्रेन से कट गया था ये लड़का, अब एक पैर से कर रहा कमाल

रियाज अहमद को उनके अदम्य साहस के लिए 2003 में राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 27, 2018, 11:10 AM IST

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    लखनऊ. हर साल की तरह इस बार भी गणतंत्र दिवस के मौक पर देश भर के उन बच्चों को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए समाज में अपनी एक छाप छोड़ी हो। वहीं, इस खास मौके पर dainikbhaskar.com आपको बताने जा रहा है लखनऊ के रियाज अहमद के बारे में, जिन्होंने 8 साल की उम्र में अपनी जान की बाजी लगाकर दूसरों की जान बचाई थी। इस दौरान उन्होंने अपने दोनों हाथ और एक पैर गंवा दिए थे। इसके बाद उन्हें 2003 में राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। पिता लगाते हैं ठेला...

    - खास बातचीत में रियाज ने बताया कि "मेरा जन्म 10 अक्टूबर 1996 को लखनऊ के तेलीबाग में हुआ था।"
    - "पिता मोहम्मद अहमद अंडे का ठेला लगाते हैं और मां हाउस वाइफ हैं।"
    - "घर में हम 6 भाई और बहन है। मैं उनमें सेकेण्ड नम्बर का हूं।"

    पैर से दिया एग्जाम

    - रियाज बताते हैं कि पिता की कोई फिक्स जॉब नहीं है इसलिए बचपन में पढ़ाई के दौरान काफी मुश्किलें आई थी।
    - "इंटर का एग्जाम मैंने पैर से लिखकर फर्स्ट डीविजन से पास किया था। अभी केकेसी से ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा हूं।"

    आगे की स्लाइड्स में जानें कैसे रियाज ने जान पर खेलकर 3 लोगों की जान बचाई थी...

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    रेलवे ट्रैक पर थी बच्ची

    - रियाज अहमद बताते हैं, "2003 में मैंने डालीगंज क्रॉसिंग पर एक लड़की को रेलवे ट्रैक क्रास करते देखा।"


    - "मैंने उस लड़की के पिता को टोकते हुए अपनी बेटी को रेलवे ट्रैक से हटाने की बात कही थी, लेकिन उसके पिता ने मेरी बातों को इग्नोर कर दिया। तभी कुछ ही देर बाद रेलवे ट्रैक पर ट्रेन आ गई।"

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    लड़की की बचाने के लिए दौड़ा

    - "ट्रेन आती देख लड़की का पिता अपनी बेटी को बचाने के लिए उसकी तरफ दौड़ा। एक और लड़का भी लड़की की मदद को आगे बढ़ा। ये देख मैं भी उस लड़की को बचाने के लिए दौड़ पड़ा।


    - "जब तक हम लोग लड़की के पास पहुंचे, उतनी देर में तेज रफ्तार ट्रेन भी हमारे पास पहुंच गई।"

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    'मैं ट्रैक में फंस गया'

    - "मैंने लड़की को गोद में उठाया और उसे ट्रैक से दूर फेंक दिया। साथ ही बाकी के दोनों लोगों को धक्का देकर ट्रैक से बाहर ढकेल दिया। लेकिन, मेरा पैर ट्रैक में फंस गया।"


    - "मैं जब तक कुछ सोच पाता तब तक ट्रेन मेरे उपर से गुजर चुकी थी। मेरे दोनों हाथ और एक पैर कटकर अलग हो चुके थे। इस तरह मैंने एक साथ तीन जिंदगियां बचा ली थी।"

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    'इन अवॉर्ड्स से हुआ सम्मानित'

    - रियाज बताते है, "2010 में मुझे मॉरीशस के राष्ट्रपति ने ग्रेट हीरोज ग्लोबल ब्रेवरी अवार्ड से सम्मानित किया था।"


    - "26 जनवरी 2003 को मुझे तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम के हाथो संजय चोपड़ा राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार मिला था।
    - "24 जनवरी 2003 को तत्कालीन पीएम अटल बिहारी बाजपेयी ने मुझें दिल्ली में रास्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया।"

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    'परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं'

    - रियाज बताते है, "मैं अभी केकेसी से ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा हूं। पिता अंडे का ठेला लगाते हैं। इससे बड़ी मुश्किल से घर का गुजारा चल पाता है।"

    - वहीं, सीएमएस स्कूल के फाउंडर जगदीश गांधी ने रियाज की आर्थिक स्थिति को देखते हुए अपने यहां क्लास 1 से 12वीं तक मुफ्त शिक्षा और स्टेशनरी उपलब्ध कराई थी।


    - "2014 में मैं लखनऊ के प्राइवेट स्कूल से ग्रेजुएशन की पढ़ाई करना चाहता था, लेकिन वहां तीन साल की बीए की फीस 1 लाख रुपये से ज्यादा थी। मेरे घर वालों के पास इतने अधिक पैसे नहीं थे। इस वजह से मेरा एडमिशन उस कॉलेज में नहीं हो पाया।"

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    'फर्स्ट डिविजन से पास किया एग्जाम'

    - "मैंने किसी तरह पैसों का अरेंजमेंट करके केकेसी में एडमिशन लिया। मेरे घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। मुझे कहीं भी आने-जाने में काफी प्रॉबलम फेस करनी पड़ती है।"


    - "मैंने एक पैर से लिखकर हाईस्कूल और इंटर का एग्जाम फर्स्ट डिविजन से पास किया था। मेरे दोनों हाथ और एक दाहिना पैर आर्टिफिसियल हैं। मैं अभी एक पैर से लिखकर पढ़ाई कर रहा हूं।"

    - "मैं और आगे पढना चाहता हूं। लेकिन, न तो मेरे पास पैसे हैं और ना ही आने-जाने के लिए कोई साधन। मैं चाहता हूं की सरकार मेरी हेल्प करे।"

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Web Title: Special Story On National Bravery Award Winner Riyaz Ahmad
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