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ये थे यूपी के 7वें सीएम, बहू से मिलती थी टिप्स-इस बात से हो जाते थे नाराज

DainikBhaskar.com ऐसे में आपको एक ऐसी शख्सियत के बारे बता रहा है, जो प्रदेश के 7वें सीएम रह चुके हैं।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 20, 2018, 09:26 PM IST

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    1977 में जब इंदिरा गांधी सत्ता में नहीं थी, तब कमलापति रोजाना सुबह उनके पूजा के फूल ले जाते थे।(फाइल)

    लखनऊ. 24 जनवरी को यूपी दिवस के रूप में मनाया जाएगा। योगी यूपी के 32वें सीएम बने थे। DainikBhaskar.comऐसे में आपको एक ऐसी शख्सियत के बारे बता रहा है, जो प्रदेश के 7वें सीएम रह चुके हैं। 3 सितंबर 1905 को जन्में कमलापति त्रिपाठी 4 अप्रैल 1971 से लेकर 13 जून 1973 तक प्रदेश के सीएम रहे। बनारस के हिंदू सेंट्रल स्कूल में इनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई। 1921 में असहयोग आंदोलन की शुरुआत हुई। जहां पर गांधी आश्रम के अनुयायियों की गिरफ्तारी हुई। उसके बाद इन्हें 6 बार जेल भी जाना पड़ा। पैर छुआने के थे शौकीन...

    - कमलापति त्रिपाठी रोजाना शाम को लोग मिलने जाते थे और उनके पैर छूकर अपनी बात कहते थे।
    - इन्हें लोग पंडित जी और बाबू कहते थे। त्रिपाठी उन लोगों को पसंद नहीं करते थे, जो उनके पैर नही छूते थे।
    - वो अपने पैरो को आगे रखते थे। इनका एक इंटरव्यू भी हुआ था, जिसका नाम ही चरण छुअन यूपी सीएम रखा गया था।


    इंदिरा गांधी के घर ले जाते थे पूजा के फूल
    - 1977 में जब इंदिरा गांधी सत्ता में नहीं थी, तब कमलापति रोजाना सुबह उनके घर जाते थे। साथ में पूजा के फूल ले जाते थे, जो इंदिरा जी को देते थे।

    - इतना ही नहीं वो यज्ञ करते थे, जिसमें इंदिरा गांधी भी बैठती थी और प्रार्थना करती थी।
    - 1980 में इंदिरा गांधी की सत्ता में वापसी होते ही पंडित जी ने इसे बंद कर दिया।

    यूपी के इस CM की बहू सरकार के फैसले बदल देती थी
    - यूपी में औरतों की पॉलिटिक्‍स की शुरुआत कमलापति त्रिपाठी के घर से हुई। कहा जाता है कि परिवार में उनकी बहू चंद्रा त्रिपाठी की काफी चलती थी।
    - वो कभी खुलकर पॉलिटिक्‍स में एक्टिव नहीं रहीं, लेकिन कमलापति और उनके बेटे लोकपति को समय-समय पर टिप्स दिया करती थीं।
    - उस वक्त कहा जाता था कि पर्दे के पीछे से कमलापति त्रिपाठी की बहू मुख्यमंत्री के फैसले बदलवा देती थीं। उनको पार्टी के लोग बहूजी कहते थे।

    आगे की स्लाइड में पढ़िए, 6 बार इस वजह से जाना पड़ा जेल...

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    कमलापति त्रिपाठी 4 अप्रैल 1971 से लेकर 13 जून 1973 तक प्रदेश के सीएम रहे।(फाइल)

    बाह्मण के हाथ का ही खाते थे भोजन
    - कमलापति त्रिपाठी पूजा-पाठ में बहुत विश्वास करते थे। वो बाह्मणों के हाथ का पकाया खाना ही खाते थे।
    - खास बात ये थी कि वो रोज सुबह किशमिश पिस्ता काजू का मिला हुआ एक गिलास शरबत पीते थे।


    हारने के 20 दिन बाद बन गए थे विधायक
    - कमलापति त्रिपाठी 15 साल की उम्र से ही राजनीति में सक्रिय हो गए थे। 6 बार आंदोलन करने की वजह से यह जेल गए।
    - 1967 में ये चंदौली विधानसभा चुनाव लड़े और हर गए, लेकिन तभी 20 दिन बाद जौनपुर जिले में हुए उपचुनाव में जीत गए और विधायक बन गए।

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    कहा जाता है कि कमलापति और उनके बेटे लोकपति को समय-समय पर टिप्स दिया करती थीं।(फाइल)
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    1967 में ये चंदौली विधानसभा चुनाव लड़े और हर गए, लेकिन तभी 20 दिन बाद जौनपुर जिले में हुए उपचुनाव में जीत गए और विधायक बन गए।(फाइल)
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Web Title: Special Story On Uttar Pardesh Day
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