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मोदी के म‍िशन को ह‍िट करने के ल‍िए काम रही ये जोड़ी, न‍िकाला ये Idea

लखनऊ. नदी में फेंके जा रहे फूलों को देखकर दो दोस्तों को ऐसा आइड‍िया आया क‍ि उन्होंने एक म‍िसाल कायम कर दी।

Dainik Bhaskar

Jan 26, 2018, 01:42 PM IST
72 हजार रुपए से दोनों दोस्तों ने शुरू की थी कंपनी। 72 हजार रुपए से दोनों दोस्तों ने शुरू की थी कंपनी।

लखनऊ. नदी में फेंके जा रहे फूलों को देखकर दो दोस्तों को ऐसा आइड‍िया आया क‍ि उन्होंने एक म‍िसाल कायम कर दी। कचरे में फेंके जा रहे फूलों की बदौलत एक कंपनी खड़ी कर दी, ज‍िसका सालाना टर्नओवर वर्तमान में 2 करोड़ रुपए से अध‍िक है। dainikbhaskar.com से बातचीत में 'हेल्प अस ग्रीन' कंपनी के फाउंडर अंक‍ित अग्रवाल ने बताया, कानपुर मुख्यालय से 25 किमी दूर भौंती गांव में उनकी कंपनी का ऑफिस है। मोदी के स्वच्छता म‍िशन के तहत शहर के 29 मंदिरों से रोजाना लगभग 800 किलो बेकार फूल इकट्ठा करती है और अगरबत्तियों और जैविक वर्मिकंपोस्ट में बदलती है। इसकी वजह से नदी-नालों में गंदगी भी नहीं फैलती और ब‍िजनेस हो गया। ऐसे आया था हेल्प अस ग्रीन का आइडिया...

-अंकित (28) ने बताया, ''मैं अपने दोस्त के साथ 2014 में बिठूर (कानपुर) में मकर संक्रांति के दिन गंगा के किनारे बने मंदिरों के दर्शन करने साथ निकले थे। गंगा तट पर सड़ते हुए फूलों और गंदा पानी पीते हुए लोगों को देखा था।''

-''ये बात सिर्फ नदी में सड़ रहे फूलों की ही नहीं, बल्कि उन पर इस्तेमाल किए गए कीटनाशकों की भी थी। जो जल जीवन पर अपना असर डाल सकते हैं।''

-''मेरे दोस्त ने मुझे गंगा की तरफ दिखाते हुए बोला- तुम लोग इसके लिए कुछ करते क्यों नहीं हो। तभी मन में ऐसा आइडिया आया कि क्यों न कुछ ऐसा काम शुरू किया जाए, ताकि नदियों को प्रदूषित होने और लोगों को गंदे पानी पीने से होने वाली बीमारियों से बचाया जा सके। इसके बाद हमने गंगा किनारे ही शपथ ली कि हम गंगा में बेकार फूल नहीं गिरने देंगे। इससे पीएम मोदी का स्वच्छता अभ‍ियान भी पूरा हो रहा है।''

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लोगों ने पागल कहकर उड़ाया था मजाक। लोगों ने पागल कहकर उड़ाया था मजाक।

लोगों ने पागल कहकर उड़ाया था मजाक

-''मैंने अपने 11वीं में साथ ट्यूशन पढ़ने वाले दोस्त करण रस्तोगी (29) से बात की। उस समय करण फॉरेन से पढ़ाई करके इंडिया वापस आया था।''

-''हम दोनों ने गंगा में फेके जा रहे फूलों पर बात की। हमने तय कर लिया था कि हमें नदियों को हर हाल में प्रदूषण से बचाने के लिए कुछ अलग करना होगा।''

-''जब लोगों से इस बारे में बात किया कि हम नदियों को फूलों से होने वाले प्रदूषण से बचाने के लिए कुछ अलग काम करना चाहते हैं। तब लोगों ने हमें पागल कहकर हमारा मजाक उड़ाया था। लेकिन हमने किसी की परवाह नहीं की।''

 

 

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नदी में फेंके जा रहे फूलों को देखकर आया आइड‍िया। नदी में फेंके जा रहे फूलों को देखकर आया आइड‍िया।

72 हजार रुपए से शुरू की थी कंपनी

-अंकित ने कहा, ''2014 तक मैं पुणे की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में ऑटोमेशन साइंटिस्ट के रूप में काम कर रहा था। जबक‍ि करण मास्टर्स की पढ़ाई करने के बाद इंडिया आकर अपना खुद का काम कर रहा था।''

-''मैंने और करण ने अपना पुराना काम छोड़कर 2015 में 72 हजार रुपए की लागत से हेल्प अस ग्रीन कंपनी लॉन्च की। इस दौरान जानने वाले लोग हमें पागल कहने लगे। 2 महीने बाद अपना पहला उत्पाद वर्मिकंपोस्ट लेकर आए जिसे 'मिट्टी' कहना शुरू किया।''

-''इस वर्मिकंपोस्ट में 17 कुदरती चीजों का मेल है, जिनमें एक कॉफी चेन की स्थानीय दुकानों की फेंकी हुई कॉफी की तलछट भी है। बाद में आईआईटी कानपुर भी कुछ रकम के साथ इससे जुड़ गया।''

-''कुछ समय बाद हमारी कंपनी कानपुर के सरसौल गांव में पर्यावरण अनुकूल अगरबत्तियां भी बनाने लगी। अगरबत्ती के डिब्बों पर भगवान की तस्वीरें होने की वजह से उन्हें कूड़ेदानों में फेंकने में श्रद्धालुओं को दिक्कत होती थी, लिहाजा हेल्प अस ग्रीन ने अगरबत्तियों को तुलसी के बीज युक्त कागजों में बेचना शुरू किया।''

 

 

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2 करोड़ से ज्यादा का है टर्नओवर। 2 करोड़ से ज्यादा का है टर्नओवर।

आज 2 करोड़ से ज्यादा का है टर्नओवर

-अंकित अग्रवाल ने बताया, हेल्प अस ग्रीन कंपनी 22000 एकड़ में फैली हुई है। हमारी कंपनी में 70 से ज्यादा महिलाएं काम करती हैं। उन्हें कम से कम रोजाना 200 रुपए की मजदूरी मिलती है।

-कंपनी का सलाना टर्नओवर वर्तमान में सवा 2 करोड़ से ज्यादा है। कानपुर, कन्नौज, उन्नाव के अलावा दूसरे शहरों में भी ब‍िजनेस फैल रहा है।  

-29 मंदिरों से रोज लगभग 800 किलो बेकार फूल इकट्ठा क‍िया जाता है। फ‍िर उसे अगरबत्तियों और जैविक वर्मिकंपोस्ट में बदल द‍िया जाता है।

-पहले हमारी टीम में दो लोग थे। आज 9 लोग हो चुके हैं। हमारी कंपनी को आईआईटी से 4 करोड़ से ज्यादा का ऑर्डर मिला है।

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72 हजार रुपए से दोनों दोस्तों ने शुरू की थी कंपनी।72 हजार रुपए से दोनों दोस्तों ने शुरू की थी कंपनी।
लोगों ने पागल कहकर उड़ाया था मजाक।लोगों ने पागल कहकर उड़ाया था मजाक।
नदी में फेंके जा रहे फूलों को देखकर आया आइड‍िया।नदी में फेंके जा रहे फूलों को देखकर आया आइड‍िया।
2 करोड़ से ज्यादा का है टर्नओवर।2 करोड़ से ज्यादा का है टर्नओवर।
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