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सुहागरात को पति ने किया था कुछ ऐसा, Life में आया यू-टर्न

करीब डेढ़ साल से लखनऊ की सड़कों पर ई रिक्शा दौड़ा रही है और अपना और अपनी बेटियों की तकदीर खुद अपने हाथों से लिख रही है।

Danik Bhaskar | Jan 09, 2018, 09:00 PM IST

लखनऊ. लगातार 4 साल तक घरेलू हिंसा का शिकार रही राजधानी की ललिता गौतम पति से अलग रहकर जीवन यापन कर रही हैं। उनकी दो बेटियां है। हसबैंड से अनबन होने के बाद से दोनों ने अलग रहने का फैसला किया। बाद में ललिता ई-रिक्शा चलाकर रोजी-रोटी कमाने लगी। वो करीब डेढ़ साल से लखनऊ की सड़कों पर ई रिक्शा दौड़ा रही है और बेटियों की तकदीर खुद अपने हाथों से लिख रही है। ललिता ने DainikBhaskar.com से बात की।

18 साल की उम्र में घरवालों ने कर दी थी शादी
- ललिता (27) बताती हैं, ''मेरा जन्म लखनऊ के मवैया में हुआ। घरवालों ने 18 साल की उम्र में मेरी शादी लखनऊ के रामचंद्र से करा दी।''
- ''ससुराल की तरफ से जितनी डिमांड की गई, उससे ज्यादा पूरी की गई। बस एक बाइक बाकी रह गई थी। उसे बाद में देने को बोला गया।''
- ''मेरे हसबैंड शादी में ड्रिंक करके पहुंचे। उस दिन नशे में खूब बदतमीजी की। लेकिन तब भी घरवालों ने उनकी गलतियों को इग्नोर कर दिया।''

हसबैंड की पिटाई से पहले दिन हो गई थी बीमार
- ''शादी के बाद जब मैं सुसराल पहुंची। शादी की पहली रात हसबैंड ड्रिंक करके घर आए। बिना किसी गलती के मेरे ऊपर हाथ उठाया। पिटाई के बाद मेरी तबीयत बिगड़ गई। डॉक्टर बुलाकर इलाज कराना पड़ा।''
- ''मैंने ये सोच कर उन्हें माफ कर दिया कि शादी की खुशी में ड्रिंक करके आए होंगे। नशे में ऐसा कर दिया होगा। ये सोच कर चुप रही कि वो सुधर जाएंगे। लेकिन दिन बीतने के साथ अत्याचार बढ़ता गया।''

22 की उम्र में छोड़ दिया ससुराल
- ''शादी के बाद ससुरालवालों और हसबैंड का टॉर्चर बढ़ गया। 22 साल की उम्र में मैंने हसबैंड को छोड़ने का फैसला किया। मैं अपना सामान लेकर मायके आ गई।''
- ''उसके बाद भी उन्होंने टॉर्चर करना नहीं छोड़ा। वो रोज घर आने लगे। मायके में भी उनकी बुरी आदतें बंद नहीं हुई। तब मैंने उनके खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया।''
- मैंने घरवालों से कहा- उन्हें यहां न आने दे। अगर वो जबरदस्ती करते हैं, तो उनका खुल कर विरोध करें।''

लाइफ में ऐसे आया यू-टर्न
- ''इस दौरान मेरी मुलाकात घरेलू हिंसा के खिलाफ काम करने वाली संस्था 'हमसफर' के कार्यकर्ताओं से हुई।''
- ''मैंने उन्हें पूरी बात बताई। संस्था ने मेरी मदद की। मुझे ई-रिक्शा की ट्रेनिंग दिलाने का काम शुरू किया। ट्रेनिंग के लिए घर से 10 किमी जाती थी। उसके बाद मैंने लाइसेंस के लिए अप्लाई किया।''

ई-रिक्शा देकर अखिलेश ने की थी हौसला आफजाई
- ''यूपी के एक्स सीएम अखिलेश यादव ने 15 फरवरी को लखनऊ में 7 महिलाओं को सम्मानित किया था।''
- ''अखिलेश ने कहा था, 'मैं ललिता जैसी महिलाओं के हौंसले और साहस के लिए उन्हें बधाई देता हूं। उन्हें भरोसा दिलाता हूं कि कुछ ही दिनों में समाजवादी सरकार उनका खुद का रिक्शा दिलाएगी। कुछ दिन बाद ललिता सहित 7 महिलाओं को ई रिक्शा मिला।''

जीती हैं ऐसी लाइफ
- ''मेरी दो बेटी हैं। ज्योति (7) और आस्था (6)। दोनों स्कूल जाने लगी हैं। मैं स्कूल और फिर स्कूल से उन्हें घर लाकर छोड़ती हूं।''
- ''मैंने मायके और ससुराल से दूर किराए पर एक कमरा ले रखा है। वहीं बेटियों के साथ रहती हूं। इस टाइम ठंड ज्यादा है, इसलिए सुबह 9 बजे से ई-रिक्शा लेकर घर से निकलती हूं और शाम तक 500-550 कमाकर घर वापस लौट जाती हूं।''
- ''8वीं तक पढ़ा है, लेकिन बेटियों को अच्छे स्कूल में पढ़ाकर उन्हें आत्म निर्भर बनाऊंगी।''