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जिसका कभी उड़ता था मजाक, अब उस दिव्यांग से लोग लेने आते हैं TIPS

DainikBhaskar.com आपको एक ऐसे ही दिव्यांग शख्स के बारे में बता रहा है, जिसने विदेश में जाकर इंडिया का झंडा फहराया है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 27, 2018, 11:36 AM IST

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    सूर्य प्रताप बताते हैं- जब मैं डेढ़ साल का तब मुझें बुखार और दस्त हो गया था। बाद में पैरों में पोलियो हो गया।

    लखनऊ. दिल में कुछ करने का जज्बा हो तो हौसलों को उड़ान मिलने से कोई नहीं रोक सकता। DainikBhaskar.com आपको एक ऐसे ही दिव्यांग शख्स के बारे में बता रहा है, जिसने लोगों के उड़ाए मजाक को मुंह तोड़ जवाब दिया। साथ ही, अपना पैरा आर्म रेसलिंग (पंजा कुश्ती) में अलग मुकाम भी बनाया। 22 नवंबर 2017 को पोलैंड के रुमिया शहर में 85 देशों के प्लेयर्स के बीच आयोजित वर्ल्ड कप में पंजा कुश्ती कम्पटीशन में सिल्वर मेडल जीता।

    बचपन में इस कारण से छोड़नी पड़ी थी पढ़ाई

    -देवरिया के मुराडीह गांव में 15 जनवरी 1994 को जन्में सूर्य प्रताप शर्मा (24) के पिता मुनीब प्रसाद गन्ना अनुसंधान संस्थान में क्लर्क थे।

    - 2015 में पिता की डेथ के बाद मां सावित्री, पांच भाई-बहन के साथ रहते हैं। यह सबसे छोटे हैं।

    - सूर्य प्रताप बताते हैं, ''जब मैं डेढ़ साल का तब मुझें बुखार और दस्त हो गया था। बाद में पैरों में पोलियो हो गया। 10 साल तक बीएचयू में घरवालों ने इलाज कराया, लेकिन पैर ठीक नहीं हुआ।''

    - ''क्लास 9वीं तक की पढ़ाई काफी मुश्किल से हुई। चलने-फिरने में काफी मुश्किल होती थी। 2009 में 10वीं की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी।

    - ''तब घरवालों ने मुझें हौसला दिया। फिर मैंने 1 साल बाद 2010 में दोबारा एडमिशन कराया और 2nd डिविजन से हाईपास किया।''

    लोग उड़ाते थे मजाक- आज पूछते हैं टिप्स

    - इनके मुताबिक, ''बचपन में दूसरे बच्चों को खेलता देख, इनका भी मन करता था। लोग विकलांग कहकर मजाक उड़ाने से भी पीछे नहीं हटते थे।''

    -''तब घरवाले हिम्मत देते थे। कभी निराश नहीं होने देते थे। मोटिवेशनल बातों से हौसला बढ़ाते रहते थे। तभी से इन्होंने तय किया कि दिन रात कड़ी मेहनत करेंगे और एक मुकाम बनाएगा।''

    - ''इंटर की पढ़ाई करने के बाद एक जॉब फेयर में गए। वहां कई कंट्रीज के स्पोर्ट्स के बच्चों और उनके कोच से मुलाकात हुई।''

    - ''कोच ने इनकी बॉडी देखकर काफी तारीफ की फिर इनका मोबाइल नंबर लिया। 2014 में कॉल करके तालकटोरा स्टेडियम में पैरा आर्म रेसलिंग में ट्रायल देने के लिए बुलाया।''

    - ''इस दौरान नेशनल गेम में इनका सिलेक्शन हो गया। 2014 में ही पैरा आर्म रेसलिंग में पार्टिसिपेट किया और नेशनल लेवल के गेम में पहली बार गोल्ड मेडल मिला। अब लोग बॉडी बनाने के टिप्स लेते हैं।''

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    2016 में नागपुर में आयोजित गेम में ब्रोंज मेडल से सम्मानित किए गए।

    लोगों से मदद लेकर पहली बार गए थे खेलने

    - सूर्य बताते है, ''मुझें पहली 2016 में लोगों से मदद लेकर यूरोप के बुल्गारिया शहर में खेलने के लिया जाना पड़ा था। उस टाइम मेरे पिता की डेथ हो चुकी थी।''

    - ''घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, इसलिए कई लोगों से मदद मांगी। लखनऊ के एक्स डीएम राजशेखर ने तब 1 लाख 6 हजार रुपए देकर हेल्प की। फिर मैं खेलने के लिए जा सका।''

    पैरा आर्म रेसलिंग में जीत चुके है ये अवॉर्ड

    -2014 में दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित गेम में गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।

    -2015 में दिल्ली के खेल गांव में आयोजित गेम में गोल्ड मिला।

    -2016 में नागपुर में आयोजित गेम में ब्रोंज मेडल से सम्मानित किए गए।

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    सूर्य बताते हैं- 2014 में ही पैरा आर्म रेसलिंग में पार्टिसिपेट किया और नेशनल लेवल के गेम में पहली बार गोल्ड मेडल मिला।
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    2015 में दिल्ली के खेल गांव में आयोजित गेम में गोल्ड मिला।
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    सूर्य प्रताप बताते हैं- 10 साल तक बीएचयू में घरवालों ने इलाज कराया, लेकिन पैर ठीक नहीं हुआ।
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Web Title: Struggle Story On International Player Paragraph Arm Wrestling
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