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1500 रुपए की छोड़ी थी जॉब, बनाई खुद की कंपनी-टर्नओवर है 1.5Cr.

सक्सेज सीरीज में DainikBhaskar.com अंजली सिंह के अचीवमेंट के बारे में बताने जा रहा है।

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2018, 10:46 AM IST
एनजीओ में काम कर रही एक एंप्लाई शबनम के साथ अंजलि ने जूट के बैग्स और दूसरे आइटंस बनाने का काम शुरू किया। एनजीओ में काम कर रही एक एंप्लाई शबनम के साथ अंजलि ने जूट के बैग्स और दूसरे आइटंस बनाने का काम शुरू किया।

लखनऊ. राजधानी की अंजली सिंह कभी एयर होस्टेस बनाना चाहती थी। उन्होंने कुछ दिनों तक प्राइवेट कंपनी में 1500 रुपए सैलरी की जॉब भी की, लेकिन नौकरी करना रास नहीं आया। पिता से इंस्पायर होकर उन्होंने खुद का स्टार्ट-अप शुरू किया। बाद में उसे एक कंपनी में तब्दील कर दिया। आज उनकी कंपनी का सलाना टर्न ओवर डेढ़ करोड़ रुपए पहुंच गया है। बिजनेस के फील्ड में बेहतरीन परफार्मेंस और महिला सशक्तिकरण के लिए उन्हें ह्यूमन इंपावरमेंट फाउंडेशन ने अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। सक्सेज सीरीज में DainikBhaskar.com इनके अचीवमेंट बता रहा है।

1500 रुपए की छोड़ी जॉब
- इंदिरानगर की रहने वाली अंजली (40) ने बताया, ''मैं एक मिडिल क्लास फैमिली से हूं। बचपन से ही एयर होस्टेस बनने का सपना था, लेकिन घरवालों ने बाहर पढ़ने नहीं भेजा। लखनऊ यूनिवर्सिटी से MBA किया।''
- ''2001 में लखनऊ के शिवगढ़ रिजॉर्ट में चेन मार्केटिंग की पोस्ट पर करीब 1500 रु. महीने की जॉब मिली। कुछ ही महीने में ये जॉब छोड़ दी।''
- ''2001 में ही ICFAI यूनिवर्सिटी की लखनऊ ब्रांच में काउंसलर की पोस्ट पर ज्वाइन किया। यहां 4 हजार रु. सैलरी मिली। 2009 में प्रमोशन हुआ और उसी कंपनी में 20 हजार सैलरी के साथ मार्केटिंग मैनेजर बन गई।''


पिता से प्रेरणा पाकर शुरू किया ये काम
- ''2009 में जॉब करने के कुछ दिनों के बाद मैंने ये जॉब छोड़ दी। मैं खुद के लिए और बाकी महिलाओं के लिए कुछ करना अलग करना चाहती थी।''
- ''पिता बैंक ऑफ इंडिया में जॉब करते थे, उन्होंने 1995 में वीआरएस लेकर एक एनजीओ शुरू किया था। नेशनल-जूट बोर्ड मिनिस्टरी ऑफ टेक्सटाइल गवर्मेंट ऑफ इंडिया से जूट से डिफरेंट टाइप के आइटम बनाने का प्रोजेक्ट मिला था।''
- ''मैं पिता के साथ काम पर जाने लगी। मैंने वहां पर कुछ महिलाओं को काम करते हुए देखा। बाद में पिता से इंस्पायर्ड होकर जूट के क्षेत्र में काम करने के लिए फील्ड में उतर गई।''

एक इंप्लोई को साथ लेकर शुरू किया ये बिजनेस
- ''एनजीओ में काम कर रही एक एंप्लाई शबनम के साथ जूट के बैग्स और दूसरे आइटंस बनाने का काम शुरू किया। धीरे-धीरे 25 से 30 महिलाएं साथ जुड़ गईं।''
- ''इसके बाद कंपनी शुरू करने के लिए सरकारी बैंक से 15 लाख का लोन लिया। 2017 में भारतीय सेवा संस्थान एनजीओ को जूट आरटीशियन्स गिल्ड प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के तौर पर रजिस्टर्ड कराया।''
- ''वर्तमान में कंपनी की लखनऊ में ही 4 ब्रांच हैं, जिसमें 200 से ज्यादा महिलाएं काम कर रही हैं। जिसका सलाना टर्नओवर 1 करोड़ से ज्यादा है।''

हसबैंड ने दिया ऐसे साथ
- ''2006 में मेरी शादी बनारस के रहने वाले शैलेंद्र से हुई। पति उस समय दिल्ली बेस्ड कंपनी के बिजनेस स्कूल में वाइस प्रेसिडेंट थे। शादी के कुछ साल बाद कंपनी में हाथ बंटाने के लिए पति ने भी जॉब छोड़ दी। 2 बच्चे हैं।''

मिल चुके हैं कई अवॉर्ड
- 29 अप्रैल 2017 - गवर्नर राम नाईक द्वारा अंजली को आउटस्टैंडिंग वुमन एंटरप्रेन्योर के लिए फिक्की फ्लो अवॉर्ड।
- 8 मार्च 2017 - लखनऊ मैनेजमेंट एसोसि‍एशन ने बेस्ट वुमन एंटरप्रेन्योर का अवॉर्ड।
- 8 मार्च 2017 - ही-ईस्टर्न मसाला कंपनी की तरफ भी बेस्ट वुमन एंटरप्रेन्योर का अवॉर्ड।
- 26 अगस्त 2017 - जन मिस्ठा अवॉर्ड से लखनऊ में सम्मान।
- 29 अगस्त 2017- महर्षि और इंटीग्रल यूनिवर्सिटी की तरफ से लखनऊ में सम्मान।
- 12 सिंतबर 2017- फोकटेल संस्था की तरफ से सम्मान।
24 दिसंबर- ह्यूमन इंपावरमेंट फाउंडेशन की तरफ से महिला सशक्तिकरण के लिए सम्मानित किया गया।

अंजली (40) ने बताया, ''मैं एक मिडिल क्लास फैमिली से हूं। बचपन से ही एयर होस्टेस बनने का सपना था, लेकिन घरवालों ने बाहर पढ़ने नहीं भेजा। लखनऊ यूनिवर्सिटी से MBA किया। अंजली (40) ने बताया, ''मैं एक मिडिल क्लास फैमिली से हूं। बचपन से ही एयर होस्टेस बनने का सपना था, लेकिन घरवालों ने बाहर पढ़ने नहीं भेजा। लखनऊ यूनिवर्सिटी से MBA किया।
2001 में लखनऊ के शिवगढ़ रिजॉर्ट में चेन मार्केटिंग की पोस्ट पर करीब 1500 रु. महीने की जॉब मिली। कुछ ही महीने में ये जॉब छोड़ दी। 2001 में लखनऊ के शिवगढ़ रिजॉर्ट में चेन मार्केटिंग की पोस्ट पर करीब 1500 रु. महीने की जॉब मिली। कुछ ही महीने में ये जॉब छोड़ दी।
मैं पिता के साथ काम पर जाने लगी। मैंने वहां पर कुछ महिलाओं को काम करते हुए देखा। बाद में पिता से इंस्पायर्ड होकर जूट के क्षेत्र में काम करने के लिए फील्ड में उतर गई। मैं पिता के साथ काम पर जाने लगी। मैंने वहां पर कुछ महिलाओं को काम करते हुए देखा। बाद में पिता से इंस्पायर्ड होकर जूट के क्षेत्र में काम करने के लिए फील्ड में उतर गई।
2006 में मेरी शादी बनारस के रहने वाले शैलेंद्र से हुई। पति उस समय दिल्ली बेस्ड कंपनी के बिजनेस स्कूल में वाइस प्रेसिडेंट थे। शादी के कुछ साल बाद कंपनी में हाथ बंटाने के लिए पति ने भी जॉब छोड़ दी। 2006 में मेरी शादी बनारस के रहने वाले शैलेंद्र से हुई। पति उस समय दिल्ली बेस्ड कंपनी के बिजनेस स्कूल में वाइस प्रेसिडेंट थे। शादी के कुछ साल बाद कंपनी में हाथ बंटाने के लिए पति ने भी जॉब छोड़ दी।
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एनजीओ में काम कर रही एक एंप्लाई शबनम के साथ अंजलि ने जूट के बैग्स और दूसरे आइटंस बनाने का काम शुरू किया।एनजीओ में काम कर रही एक एंप्लाई शबनम के साथ अंजलि ने जूट के बैग्स और दूसरे आइटंस बनाने का काम शुरू किया।
अंजली (40) ने बताया, ''मैं एक मिडिल क्लास फैमिली से हूं। बचपन से ही एयर होस्टेस बनने का सपना था, लेकिन घरवालों ने बाहर पढ़ने नहीं भेजा। लखनऊ यूनिवर्सिटी से MBA किया।अंजली (40) ने बताया, ''मैं एक मिडिल क्लास फैमिली से हूं। बचपन से ही एयर होस्टेस बनने का सपना था, लेकिन घरवालों ने बाहर पढ़ने नहीं भेजा। लखनऊ यूनिवर्सिटी से MBA किया।
2001 में लखनऊ के शिवगढ़ रिजॉर्ट में चेन मार्केटिंग की पोस्ट पर करीब 1500 रु. महीने की जॉब मिली। कुछ ही महीने में ये जॉब छोड़ दी।2001 में लखनऊ के शिवगढ़ रिजॉर्ट में चेन मार्केटिंग की पोस्ट पर करीब 1500 रु. महीने की जॉब मिली। कुछ ही महीने में ये जॉब छोड़ दी।
मैं पिता के साथ काम पर जाने लगी। मैंने वहां पर कुछ महिलाओं को काम करते हुए देखा। बाद में पिता से इंस्पायर्ड होकर जूट के क्षेत्र में काम करने के लिए फील्ड में उतर गई।मैं पिता के साथ काम पर जाने लगी। मैंने वहां पर कुछ महिलाओं को काम करते हुए देखा। बाद में पिता से इंस्पायर्ड होकर जूट के क्षेत्र में काम करने के लिए फील्ड में उतर गई।
2006 में मेरी शादी बनारस के रहने वाले शैलेंद्र से हुई। पति उस समय दिल्ली बेस्ड कंपनी के बिजनेस स्कूल में वाइस प्रेसिडेंट थे। शादी के कुछ साल बाद कंपनी में हाथ बंटाने के लिए पति ने भी जॉब छोड़ दी।2006 में मेरी शादी बनारस के रहने वाले शैलेंद्र से हुई। पति उस समय दिल्ली बेस्ड कंपनी के बिजनेस स्कूल में वाइस प्रेसिडेंट थे। शादी के कुछ साल बाद कंपनी में हाथ बंटाने के लिए पति ने भी जॉब छोड़ दी।
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