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पिता करते थे मजदूरी-बेटी ने यूं बदली तस्वीर, ऐसी है इस वंडरगर्ल की STORY

Dainikbhaskar.com से इन्होंने लाइफ के स्ट्रगल और एक्सपीरियेंस शेयर किए।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 09, 2018, 08:11 PM IST

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    सुषमा ने बताया- पापा मजदूर थे। कभी उनको काम मिलता था तो कभी नहीं। जब मेरा एमएससी में एडमीशन होना था, तब फीस के पैसे नहीं थे।

    लखनऊ.12 जनवरी को यूथ डे है। ऐसे में Dainikbhaskar.comआपको एक ऐसी खास बच्‍ची से रूबरू कराने जा रहा है, जिसने 7साल में हाईस्‍कूल और 9 साल की उम्र में इंटरमीडिएट कर लिया है। इतना ही नहीं अब वो 17 साल की उम्र में पीएचडी कर रही है। लोग इसे वंडरगर्ल के नाम से भी बुलाते हैं। पीएम मोदी इसे मेडल देकर सम्मानित कर चुके हैं। राष्ट्रपति कोविंद ने भी इसे देश का गौरव मानते हैं।


    ऐसे बीता था बचपन

    - रायबरेली में 7 फरवरी 2000 को जन्मी सुषमा वर्मा फैमिली के साथ लखनऊ के आशियाना में रहती हैं।
    - पिता तेजबहादुर बीबीएयू में सैनिटेशन असिस्टेंट(चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी) और मां छाया देवी हाउस वाइफ है। तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर है।

    - सुषमा बताती हैं, ''मेरे जन्म के समय पापा को 5 से 6 हजार रुपए सैलरी मिलती थी। उसी में परिवार का खर्च चलता था। सभी की फीस जमा करने में काफी प्रॉब्लम फेस करनी पड़ी थी।''

    बचपन में ही घरवालों को दिखने लगा था बेटी का फ्यूचर
    - पिता तेजबहादुर बताते है, ''मैं रोजाना शाम को काम से आने के बाद रामचरित मानस का पाठ करता था।''

    - ''बेटी भी साथ बैठती थी। धीरे-धीरे वो रामचरित मानस की चौपाई पढ़ने लगी। उस समय उसकी उम्र केवल 2 साल 3 महीने की थी।''

    - ''2 साल की उम्र में बेटी ने लखनऊ के राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में 3 सौ लोगों के बीच रामायण का पाठ पढ़कर सुनाया था।''
    - ''धीरे-धीरे 5 साल की उम्र में वो अपने भाई की 7th की किताबें पढ़ लेती थी। पढ़ाई में इंटरेस्‍ट के चलते 5 साल में उसका एडमिशन 9वीं में कराने की कोशिश की।''

    - ''2007 में लिमका बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने इन्हें 10वीं पांस करने वाली सबसे कम उम्र की स्टूडेंट घोषित किया। उस वक्त इनकी उम्र 7 साल, तीन महीने और 28 दिन की थीं।''

    कभी टाइम टेबल बनाकर नहीं की पढ़ाई

    - सुषमा ने बताया ''मैंने कभी टाइम टेबल बनाकर पढ़ाई नहीं की। एक बार टाइम टेबल बनाया था, लेकिन जब पढ़ने का समय होता तो मन ही नहीं लगता था।''

    - ''इसीलिए मैंने हमेशा जब मन हुआ तभी पढ़ाई की। स्कूल में हमेशा ये सोचकर जाती थी कि वहां पर केवल पढ़ाई ही करनी है। इसके साथ होमवर्क पर जरूर फोकस करती थी।''

    - ''11 साल में सीपीएमटी का एक्जाम दिया, लेकिन एज कम होने की वजह से मेरा रिजल्ट रुक गया। तब बहुत दुख हुआ था।''

    - ''इंट्री भले ही न मिलती लेकिन मेरा रिजल्ट तो देना चाहिए था। जिससे मुझे पता चलता कि मैंने पेपर में कितना सही किया था।''

    - ''सीपीएमटी का रिजल्ट नहीं आया तो मैंने 13 साल में बीएससी किया। बायोलॉजी में इंटरेस्ट था, इसलिए मैंने 15 साल में माइक्रोबायोलॉजी से एमएससी में टॉप किया।''

    जमीन बेचकर एमएससी में पापा ने एडमीशन कराया

    - आंखों में आंसू लेकर सुषमा ने बताया,''पापा मजदूर थे। कभी उनको काम मिलता था तो कभी नहीं। जब मेरा एमएससी में एडमीशन होना था, तब फीस के पैसे नहीं थे।''

    - ''उन्होंने जमीन बेचकर मेरा एडमीशन कराया। कभी-कभी लगता है, मुझे पापा की हेल्प करनी चाहिए।''

    - ''बीबीएयू से माइक्रोबायोलॉजी सब्जेक्ट से पीएचडी कर रही हूं। पढ़ाई में आर्थिक बाधा न पड़े, इसके लिए कॉलेज के वीसी (वाइस चांसलर) ने वहीं पर इनके पिता को सेनेटरी असिस्टेंट की नौकरी दे दी।

    भाई-बहन भी मनवा चुके है अपनी प्रतिभा का लोहा

    - मां छाया का कहना है, ''मेरे तीनों बच्चे बचपन से ही पढ़ने में काफी तेज हैं। बेटे शैलेन्द्र ने 14 साल की उम्र में बीसीए किया। इस टाइम वो बंगलौर की एक कम्पनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है।''

    - ''भाई की तरह ही सुषमा भी पढ़ने में काफी तेज है। उसने 13 साल की उम्र में ग्रेजुएशन कम्प्लीट किया। अब 17 साल की उम्र में बीबीएयू से माइक्रोबायोलॉजी सब्जेक्ट से पीएचडी कर रही है।''
    - ''सबसे छोटी बेटी अनन्या भी पढ़ाई में ऊपर उठ रही है। इस वक्त 6 साल की है, लेकिन अभी तक एक बार भी स्कूल नहीं गई है। बिना ट्यूशन ही घर पर हाईस्कूल की परिप्रेशन कर रही है।''

    बिना स्‍कूल गए हो गई थी 9th पास की नॉलेज

    - उन्होंने बताया, 2007 में सुषमा ने 7 साल की उम्र में 59.6% अंक के साथ हाईस्‍कूल पास किया।
    - 2010 में इंटर (63%) करने के बाद 'कम्बाइंड प्री मेडिकल टेस्ट' (सीपीएमटी) में भी बैठी।
    - 2013 में लखनऊ यूनिवर्सिटी से अनुमति लेकर 10 साल की उम्र में बीएससी में एडमिशन लिया और 66% अंक के साथ पास किया।
    - इसकी अनोखी प्रतिभा को देखते हुए प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्तर ने हमारी आर्थिक मदद की।

    - 2007 में लिमका बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने इन्हें 10वीं पांस करने वाली सबसे कम उम्र की स्टूडेंट घोषित किया। उस वक्त इनकी उम्र 7 साल, तीन महीने और 28 दिन की थीं।

    PM ने कियासम्‍मानित-राष्ट्रपति ने की तारीफ

    - 2016 में बीबीएयू के दीक्षांत समारोह में पीएम मोदी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने 3 स्टूडेंट्स को मेडल दिया।

    - इसमें 15 साल की सबसे कम उम्र की एमएससी टॉपर सुषमा भी शामिल थी। उसे गोल्‍ड मेडल मिला है, जो 'लिम्का बुक्स ऑफ रिकॉर्डस' में भी दर्ज है।

    - 15 दिसंबर 2017 में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने बीबीएयू के सातवें दीक्षांत समारोह में शिरकत करने पहुंचे। मंच से उन्होंने 17 साल की उम्र में पीएचडी कर रही सुषमा तारीफ की।

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    पढ़ाई में इंटरेस्‍ट देखते हुए 5 साल में एडमिशन 9वीं में कराया गया।
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    पिता ने बताया- 5 साल की उम्र में बेटी अपने भाई शैलेन्द्र की 7th की किताबें पढ़ लेती थी।
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    सुषमा ने बताया- 11 साल में सीपीएमटी का एक्जाम दिया, लेकिन एज कम होने की वजह से मेरा रिजल्ट रुक गया।
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    2007 में लिमका बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने 10वीं पांस करने वाली सबसे कम उम्र की स्टूडेंट घोषित किया। उस वक्त सुषमा की उम्र 7 साल, तीन महीने और 28 दिन की थीं।
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    सुषमा ने बताया- बायोलॉजी में इंटरेस्ट था, इसलिए 15 साल की उम्र में माइक्रोबायोलॉजी से एमएससी में टॉप किया।
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Web Title: Special Story On Struggle Of Girl
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