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कितनी बड़ी देशभक्त है बहन, टेस्ट लेने के लिए भगत सिंह ने किया था उसे टॉर्चर

आजादी की बात आते ही सरदार भगत सिंह का नाम खुद बखुद जहन में आ जाता है।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Feb 06, 2018, 01:36 PM IST

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    सरदार भगत सिंह पर कई फिल्में भी बन चुकी हैं। ऐसी ही एक फिल्म का स्टिल।

    लुधियाना.आजादी की बात आते ही सरदार भगत सिंह का नाम खुद बखुद जहन में आ जाता है। DainikBhaskar.com ने सरदार भगत सिंह की छोटी बहन बीबीअम्बर कौर के बेटे सरदार जगमोहन सिंह से बातचीत की। उन्होंने भगत सिंह के जीवन से जुड़ी कई अनसुनी कहानियां बताईं। सरदार जगमोहन सिंह लुधियाना में रहते हैं। वह एक कॉलेज से कम्प्यूटर साइंस के प्रोफेसर पद से रिटायर्ड हुए हैं।

    बहन के सीने पर रख दी थी जलती लालटेन

    सरदार जगमोहन सिंह ने बताया "8 साल की उम्र में एक बार जब सरदार भगत सिंह अपनी छोटी बहन के साथ बैठ कर पढाई कर रहे थे। उस दौरान भगत सिंह कोई किताब पढ़ रहे थे। उसी समय उत्सुकता से छोटी बहन ने उनकी किताब देखने की कोशिस की। इसी समय भगत सिंह ने अपनी 4 साल की बहन के सीने पर जलती लालटेन रख दिया। जिससे लालटेन से वह कई जगह झुलस गई। जैसी ही वह चिल्लाईं भागत सिंह ने बहन का मुहं बंद करते हुए कहा कि चिल्लाना नहीं मै तो देखना चाहता था कि तुममे कितनी सहन शक्ति है। जब सहन शक्ति होगी तभी देशभक्ति की राह में आगे चल पाओगी। भगत सिंह से यह बात सुनकर छोटी बहन ने अपनी पीड़ा को सहते हुए चिल्लाना बंद कर दिया।"

    पेन चुभा कर पैर को कर दिया था लहूलुहान


    सरदार जगमोहन सिंह ने बताया " इस घटना के तकरीबन 2 साल बाद की बात है। भगत सिंह काफी गंभीरता से बैठे कुछ लिख रहे थे, उसी दौरान उनकी छोटी बहन दौडती हुई आई और भगत सिंह की कॉपी में देखने लगी। भगत सिंह ने उसी पेन को बहन के पैर में चुभा दिया। पैर से खून निकलने लगा और बहन दर्द से चीख पड़ी। फिर से भगत सिंह ने बहन को चुप कराते हुए कहा कि मै तुम्हे पीड़ा देना नहीं बल्कि मै तो ये देखना चाहता था कि दो साल बीतने के बाद तुममे सहनशक्ति की क्षमता कितनी बढ़ी है, ये दो निशान के शरीर पर बने रहे।"

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    बीबीअम्बर कौर भगत सिंह से तीन साल छोटी थी

    बहन तो बोझ होती है लोगों की इस बात का भगत सिंह ने ये दिया जवाब

    सरदार जगमोहन सिंह ने बताया कि "उनकी मां ने एक बार अपने बचपन का किस्सा बताया था। एक बार भगत सिह उनके साथ खेल रहे थे। उसी दौरान किसी ने कहा कि अब तो आपकी एक बहन भी आ गई, बहन तो बड़ा बोझ होती है। इस पर भगत सिंह ने जवाब दिया कि क्या फर्क पड़ता है। चार आने होंगे तो मकान के अंदर शादी कर देंगे। रूपए हुए तो ढोल नगाड़े के साथ छत पर शादी कर देंगे। भगत सिंह के इस जवाब से या बात बोलने वाले की बोलती बंद हो गई। "

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    सरदार भगत सिंह के भांजे जगमोहन सिंह

    बहनोई को दिया ऐसा जवाब


    सरदार जगमोहन सिंह ने बताया कि "एक बार उनके पिता अपनी ससुराल गए थे। जब वहा खाना खाने बैठे तो कई प्रकार के व्यंजन परोसे गए। उनके साथ उनके साले यानि भगत सिंह को भी खाना परोसा गया। पिता जी ने यूं ही भगत सिंह से पूंछा 'वीर जी' पहले इसमें से क्या खाना चाहिए? भगत सिंह जवाब सुनकर वहां मौजूद सभी लोग ठहाके लगाकर हंस पड़े। उनका जवाब था कि जो चीज सबसे ज्यादा पसंद हो उसे ही सबसे पहले खाओ, क्योंकि अगर खाने के दौरान भागना पड़े तो मन में ये बात न रह जाए कि मै अपना पसंदीदा खाना नही खा सका।"

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    बहनोई को कहा गांव वाले नही पहनते हैं 'बूट'

    सरदार जगमोहन सिंह ने बताया कि "मेरे पिता जी लगभग अपने साले भगत सिंह के हमउम्र थे। लेकिन मेरी माता जी भगत सिंह से तीन साल से छोटी थी। इसलिए भगत सिंह को पिता जी भी बड़ा ही मानते थे। एक बार उनके पिता ससुराल गए। उन्होंने भगत सिंह से कहा कि वीर जी मुझे बूट खरीद दो मै बूट पहनूंगा। जिसपर सरदार भगत सिंह का जवाब था कि गांव के देशभक्त लोग बूट नही पहनते। उस समय पंजाब में जूतियाँ पहनी जाती थीं। उन्होंने पिता जी को जूतियाँ खरीदकर दी और बोले ये लो नई जूती और जब तुम्हारी खराब हो जाए तब इसे पहनना। "

    'बंदूकें बो रहा हूँ पिता जी'


    भगत सिंह के भांजे सरदार जगमोहन सिंह ने बताया की उन्होंने भगत सिंह के कई किस्से अपनी मां से सुने थे। उन्होंने बताया " एक बार भगत सिंह अपने घर के अहाते में मिट्टी में छोटी छोटी लकड़ियाँ दबा रहे थे। उसी समय उनके पिता सरदार किशन सिंह ने पूंछा क्या कर रहे हो बेटा, भगत सिंह के जवाब ने वहां बैठे सभी को चौंका दिया। भगत सिंह का जवाब था बंदूकें बो रहा हूँ पिता जी। भगत सिंह की इस बात ने सभी को चौंका दिया था। लेकिन यह कोई नही जानता था कि आगे चलकर उनका रिश्ता इन्ही बन्दूको से जुड़ने वाला है।

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Web Title: The Untold Story Of Bhagat Singh
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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