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मंगल पाण्डेय को पकड़ने के लिए अंग्रेजों ने भेजी थी औरत, जानें ये अनटोल्ड स्टोरी

मंगल पाण्डेय के पांचवीं पीढ़ी के प्रपोत्र रघुनाथ पाण्डेय ने शेयर की कुछ अनटोल्ड स्टोरीज।

Danik Bhaskar | Jan 28, 2018, 03:58 PM IST
फोटोज मंगल पांडे पर आधारित फिल्म मंगल पाण्डेय- द राइजिंग से लिए गए हैं। फोटोज मंगल पांडे पर आधारित फिल्म मंगल पाण्डेय- द राइजिंग से लिए गए हैं।

लखनऊ. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की बात उठते ही एक शख्स का नाम जरूर जुबान पर आ जाता है, वो है मंगल पांडे का। भारत के प्रथम क्रांतिकारी के रूप में प्रसिद्ध मंगल पांडे देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्रामी कहलाते हैं। उनके द्वारा 1857 में शुरू किया अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह समूचे देश में जंगल की आग की तरह फैल गया। इसकी बदौलत काफी संघर्ष के बाद हमें 1947 में आखिरकार आजादी मिल ही गई। मंगल पाण्डेय के पांचवीं पीढ़ी के प्रपोत्र ने सुनाई ये अनटोल्ड स्टोरी...

हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान स्वन्त्रता सेनानियों के परिवार को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सम्मानित किया था। इस दौरान शहीद मंगल पांडे के परिवार की तरफ से उनकी पांचवीं पीढ़ी के प्रपोत्र रघुनाथ पांडे को सम्मानित किया गया। रघुनाथ पांडे ने DainikBhaskar.com से खास बातचीत की और मंगल पांडे के जीवन से जुड़ी कई इंटरेस्टिंग स्टोरी भी बताई।

रघुनाथ पांडे ने बताया कि मंगल पांडे का पता लगाने के लिए अंग्रेजों ने एक महिला का सहारा लिया था और उनके घर पहुंचकर परिजनों को काफी प्रताड़ित किया था।

आगे की स्लाइड्स में जानें कि कैसे अंग्रेजों ने एक औरत की मदद से पता लगाया था मंगल पांडे का घर...

कई सालों तक मंलग पांडे को ढूंढते रहे अंग्रेज

 

 

- 65 साल के रघुनाथ पाण्डेय बताते हैं- मैं मंगल पाण्डेय की पांचवी पीढ़ी से ताल्लुक रखता हूं। मेरे ग्रैंड फादर मुझें बताते थे कि मंगल पांडे का पता लगाने के लिए अंग्रेजों ने काफी कोशिश की थी, लेकिन उन्हें कई वर्षों तक कोई कामयाबी नहीं मिल पाई, क्योंकि बीच में काफी वर्षों तक मंगल पांडे के बारे में अग्रेजों को जानकारी मिलना बंद हो गई थी।

 

 

- उन्होंने बताया- "उस टाइम अंग्रेज काफी परेशान हो गये थे। वे एक शहर से दूसरे शहर मंगल पांडे की तलाश में छापेमारी कर रहे थे। पुलिस भी मंगल पांडे के पीछे पड़ी हुई थी, लेकिन अंग्रेजों को कहीं से कोई कामयाबी नहीं मिल पाई। कई साल बाद जाकर उन्हें ये बात पता चली कि मंगल पांडे बलिया जिले के नगवा गांव के रहने वाले हैं। फिर उनके सामने पांडे लोगों के गांव में मंगल पांडे का घर पता लगाने की चुनौती थी।"

 

 

- "ये चुनौती इसलिए भी बड़ी थी क्योंकि गांव के लोग भी मंगल पांडे को बचाने के लिए मैदान में उतर आए थे। पूरे गांव में पांडे लोगों का घर ज्यादा था। उनमें से कोई भी मंगल पांडे के बारे में मुंह खोलने को तैयार नहीं था।"

अंग्रेजों ने एक औरत की मदद ली

 

 

- रघुनाथ पाण्डेय के मुताबिक, "इसके बाद अग्रेजों ने एक अनोखी तरकीब अपनाई। अंग्रेजों को किसी से ये बात पता चली कि ब्राह्मणों के घर में किसी भी शुभ कार्य में उनके पूर्वजों का नाम लिया जाता है। इससे गांव में मंगल पांडे के असली परिवार का सही पता लगाया जा सकता है।"

 

 

- "इस काम के लिए अंग्रेजों ने एक औरत को शादी-विवाह और पूजा-पाठ में काम करने वाली एक नाउन बनाकर गांव के अंदर भेजा। उससे बोला था कि गांव में होने वाली पूजा में शामिल होकर वहां से पता लगाओ कि किस घर में मंगल पांडे के पूर्वजों का नाम लिया जाता है। वही घर मंगल पांडे का असली घर होगा। बाद में इस अनोखी तरकीब की मदद से अंग्रेजों को मंगल पांडे के घर का सही पता लगाने में कामयाबी मिल गई।"

'परिजनों को किया प्रताड़ित'

 

 

- रघुनाथ पांडे बताते हैं- "मेरे ग्रैंडफादर मुझें बताया करते कि मंगल पांडे का मकान गंगा नदी में बाढ़ आने के कारण उसमें डूब गया था। घर का सब कुछ उस पानी में बह गया था। अग्रेंज मंगल पांडे के परिजनों को काफी प्रताड़ित भी किया करते थे और उनसे मंगल पांडे की लोकेशन ना बताने पर मारपीट भी करते थे।"

 

 

- "जब अंग्रेज मंगल पाण्डेय के परिवार के लोगों से कोई जानकारी इकट्ठी नहीं कर पाए तो गुस्से में उन लोगों ने घर में आग लगा दी। किसी तरह मंगल पाण्डेय के परिवार के लोगों ने भागकर अपनी जान बचाई थी। कई दिन तक घर के लोगों ने खुले में रात बिताई थी। बाद में बड़ी मुश्किल से छत का इंतजाम हो पाया था। इसके बाद फिर से पूरा परिवार एक ही मकान में रहने लगा था।"

चार पीढियों ने आजादी की लड़ाई लड़ी

 

 

- "मंगल पांडे बीच-बीच में चोरी-छिपे घर के लोगों से मिलने के लिए यहां आया करते थे। गांव के कुछ लोगों को भी ये बात पता थी, लेकिन वो अपना मुंह नहीं खोलते थे। वे मंगल पांडे के साथ थे। लेकिन, अंग्रेजों ने काफी जद्दोजहद के बाद उन्हें पकड़ लिया और 8 अप्रैल 1857 को फांसी पर लटका दिया। इसके बाद स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई और तेज हो गई थी।"

 

 

- रघुनाथ पांडे बताते हैं कि "आजादी की लड़ाई में मेरे खानदान से चार पीढियों ने हिस्सा लिया था। मेरी चौथी पीढ़ी के दादा ब्रह्मेश्वर नाथ पांडे भी आजादी की लड़ाई में उतरे।"