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दागी स्कूलों में बोर्ड एग्जाम देंगे छात्र, इन कॉलेजों को सेंटर्स बनाए जाने पर सवाल!

लखनऊ. यूपी बोर्ड के एग्जाम के लिए दागी और फर्जी रजिस्ट्रेशन स्कूलों को सेंटर्स बनाया गया है।

Danik Bhaskar | Dec 12, 2017, 09:26 PM IST

लखनऊ. इस बार यूपी बोर्ड के एग्जाम के लिए दागी और फर्जी रजिस्ट्रेशन स्कूलों को सेंटर्स बनाया गया है। इसका खुलासा शिक्षा विभाग की तरफ से जारी ने किया। इस साल पहली बार हाईस्कूल-इंटर यूपी बोर्ड के परीक्षा केंद्रों की सूची ऑनलाइन सॉफ्टवेयर के माध्यम से निर्धारित की गई थी। 154 बनाए गए परीक्षा केंद्र...

- 154 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। इनमें कई राजकीय और अनुदानित विद्यालयों को दरकिनार कर निजी वित्तविहीन कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बना दिया गया था।

- इस सूची में कई खामियों की वजह से जिलाधिकारी की निगरानी में दोबारा परीक्षा केंद्रों का निर्धारण किया गया। नई सूची में दावा किया गया कि 34 कॉलजों को परीक्षा केंद्र की सूची से बाहर कर दिया गया और 18 राजकीय और अनुदानित विद्यालयों को सूची में शामिल किया गया।

- इसके बावजूद दागी और फर्जी पंजीकरण के आरोपी कॉलेजों सूची में जगह पा गए। राजधानी में इस साल एक लाख छात्र रजिस्ट्रर्ड हैं।

# केस -1

- मलिहाबाद स्थित कुंवर आसिफ अली इंटर कॉलेज में 2017 की बोर्ड परीक्षा के पहले दिन ही गड़बड़ी मिली थी। स्कूल प्रशासन ने सीटिंग प्लान में खेलकर अपने यहां की छात्राओं को अलग बैठा दिया और विषय विशेषज्ञ की ही ड्यूटी लगा दी।

- पूर्व डीआईओएस ने कॉलेज को काली सूची में डालने की संस्तुति की थी। इस साल यह कॉलेज फिर से परीक्षा केंद्र बना है।

# केस 2
- माल स्थित एस पब्लिक इंटर कॉलेज में बोर्ड परीक्षा-2017 में 18 मार्च को हुई। इस दौरान हिंदी की परीक्षा में उसी सब्जेक्ट के टीचर की ड्यूटी लगाई।
- डीआईओएस ने इस कॉलेज को भी डिबार करने की संस्तुति की थी। इसके बावजूद इस बार भी यह कॉलेज परीक्षा केंद्र की सूची में शामिल किया गया है।

# केस 3
- माल स्थित महेश सिंह सरस्वती इंटर कॉलेज में विभागीय अधिकारियों ने 2 बार औचक निरीक्षण किया। वहां छात्रों के फर्जी पंजीकरण का खुलासा भी हुआ था।
- कक्षा 10 और 12 में पंजीकरण के मुकाबले छात्रों की संख्या काफी कम थी। डीआईओएस ने छात्र संख्या असत्य और संदिग्ध मानते हुए नामावली जमा करने पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद यह कॉलेज भी इस साल सेंटर की सूची में शामिल किया गया है।

क्या कहना है शिक्षा विभाग का ?
- डीआईओएस डॉ. मुकेश कुमार सिंह के मुताबिक, ''माल और मलिहाबाद क्षेत्र में राजकीय और अनुदानित कॉलेज काफी कम हैं। इसलिए मजबूरी में ही इन कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। हमारे पास विकल्प नहीं थे। इनपर पूरी निगाह होगी। जरूरत पड़ी तो केंद्र व्यवस्थापक विभाग की तरफ से तैनात होगा।''