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IAS के टाइटल में राहुल गांधी का गब्बर सिंह....और गेरूआ रंग की धूम

पिछले सालों के टाइटलों में जिन अधिकारियों का जलवा हुआ करता था, उनका नाम इस बार टाइटल सूची से गायब था।

Dainik Bhaskar

Dec 16, 2017, 12:04 AM IST
आईएएस राजीव कुमार। फाइल आईएएस राजीव कुमार। फाइल

लखनऊ. सीएम योगी आदित्यनाथ ने कुछ घंटे पहले ही आईएएस अधिकारियों को उनकी कार्यशैली पर आइना दिखाया। नौकरशाही के ढांचे पर सवाल खड़े करते हुए उन्होंने कहा, कमिश्नर (मंडलायुक्त) को रबर स्टाम्प बना दिया गया। इस पद को ताकतवर बनाने का संकेत दिया गया। दिन के सख्त माहौल के बाद शाम को एमबी क्लब में सर्विस डिनर के मेन्यू कार्ड में 'मिर्च मसाला' शीर्षक से नौकरशाहों ने खुद को दिलचस्प टाइटलों से नवाजा। इसमें मुख्य सचिव की कुर्सी पर अधिकारियों की नजर का भरपूर इशारा रहा। हां, पिछले सालों के टाइटलों में जिन अधिकारियों का जलवा हुआ करता था, उनका नाम इस बार टाइटल सूची से गायब था। इसे बदली हुकूमत का असर भी माना जा रहा है। आगे पढ़‍िए आईएएस के टाइटल्स...

आप आए, बहार आई
-प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद सेन्ट्रल डेपुटेशन अधूरा छोड़कर वापस लौटे आईएएस और मुख्य सचिव राजीव कुमार को टाइटल दिया गया- 'आप आए, बहार आई।'

-इस टाइटल के पीछे वह सुकून भी छिपा है जब पूर्व मुख्य सचिव राहुल भटनागर देर रात तक अधिकारियों की मीटिंग कराते रहते थे।

हम भी खड़े हैं राहों में...

-वरिष्ठ आईएएस अनूप चन्द्र पांडेय, आरपी सिंह (राज प्रताप सिंह) और संजय अग्रवाल को टाइटल दिया गया है- 'हम भी खड़े हैं राहों में....'।

-इस टाइटल को राजीव कुमार के रिटायरमेन्ट का समय करीब होने और इस बीच उनके फिर केन्द्र की सेवा में जाने की चर्चा से जोड़ा जा रहा है।

-दरअसल, राजीव कुमार के बाद मुख्य सचिव की दौड़ में ये ही तीन अधिकारी शामिल हैं। इनमें से राज प्रताप तत्कालीन सीएम मायावती के सचिव भी रह चुके हैं।

क्यों नहीं लेते पिया प्यार का नाम
-प्रमुख सचिव सूचना, पयर्टन समेत आधा दर्जन महकमों का जिम्मा संभालने वाले अवनीश अवस्थी को टाइटल दिया गया- 'सुबहो-शाम बस काम ही काम, क्यों नहीं लेते पिया प्यार का नाम।'

-भाजपा सरकार बनने के बाद केन्द्र की सेवा से लौटे अवनीश अवस्थी इन दिनों सुबह से शाम तक सरकार की इमेज बिल्डिंग में व्यवस्त रहते हैं और आईएएस महकमे में यह चर्चा आम है कि वह परिवार को समय नहीं दे पा रहे हैं। जिसे केन्द्र में रखकर उनके साथियों ने उन्हें यह टाइटल दिया है। अवनीश की पत्नी मालनी अवस्थी मशहूर लोक गायिका हैं।

आगे की स्लाइड्स में पढ़‍िए अन्य अफसरों के टाइटल्स के बारे में...

आईएएस शश‍ि प्रकाश गोयल। फाइल आईएएस शश‍ि प्रकाश गोयल। फाइल

रात बाकी, काम बाकी
-मुख्यमंत्री के सचिव शशि प्रकाश गोयल की विजी वर्क शेड्यूल को केन्द्रित करते हुए टाइटल दिया गया है- 'रात बाकी काम बाकी, फाइलें मीटिंग्स हो जाने दो।'

-इस टाइटल के पीछे की सच्चाई यह है कि अक्सर परिवार की ओर से फोन आने पर भी शशि प्रकाश जवाब देते हैं- मीटिंग्स होने दो, फाइलें अभी नहीं निपटी हैं।



नहीं तो चिरागों से लौ जा रही थी
 -सीएम योगी आदित्यनाथ के विशेष आग्रह पर केन्द्र की सेवा छोड़कर वापस लौटे आईएएस अधिकारी प्रशांत त्रिवेदी, संजय भूस रेड्डी, आलोक कुमार प्रथम, आलोक टंडन और मनोज कुमार सिंह को संयुक्त रूप से तंजिया टाइटल कूछ यूं दिया गया है- 'तुम आ गए हो नूर आ गया है, नहीं तो चिरागों से लौ जा रही थी।'

-जिन अधिकारियों को यह टाइटल दिया गया है, उनमें से एकाध-दो को छोड़कर हर किसी की सत्ताधारियों से निभ नहीं रही है।



हम बड़े काम की चीज
-सामान्यतः आईएएस कैडर में सरल और लो प्रोफाइल अधिकारियों में शुमार मगर प्रमुख सचिव गृह जैसा बड़ा ओहदा संभाल रहे हैं अरविंद कुमार को टाइटल दिया गया है- 'हमका एेसा-वैसा न समझो, हम बड़े काम की चीज।' -उनको यह टाइटल दिए जाने के पीछे आईएएस-आईपीएस के बीच अधिकारों के टकराव को सुलझाने में उनके शालीन प्रयासों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। वरिष्ठ आईएएस रजनीश दुबे का टाइटल है-'मैं शायर तो नहीं।'


 

आईएएस कामरान र‍िजवी। फाइल आईएएस कामरान र‍िजवी। फाइल

बाबुल का घर प्यारा लगे
-विधानसभा चुनाव के समय मुख्य निर्वाचन अधिकारी की भूमिका निभाने वाले टी. वेंकटेश, कल्पना अवस्थी और हिमांशु कुमार को संयुक्त रूप से टाइटल दिया गया है- 'मैं तो छोड़ आई पिया का देश, बाबुल का घर प्यारा लगे।' -दरअसल, इन तीनों अधिकारियों के केन्द्र की सेवा से वापस लौटने की चर्चा है। वरिष्ठ आईएएस अफसर अनिल कुमार को टाइटल दिया गया, 'गली-गली तेरी लौ जली, जियो रे बाहुबली'।

-अनिल कुमार के टाइटल के पीछे का सच ये है कि सपा सरकार में गोरखपुर में कमिश्नर नियुक्त हुए थे। बीजेपी सरकार बनने के बाद 100 से ज्यादा आईएएस अफसरों के तबादले हुए, लेकिन अनिल कुमार जहां के तहां बने है। इसलिए उन्हें नौकरशाही के 'बाहुबली' का टाइटल दिया गया।

-नितीश कुमार (2010 बैच) का टाइटिल है- 'मुझे तुमसे कितने गिले हैं।' नितीश इन दिनों केन्द्र की सेवा में हैं।

 

 

अच्छा चलता हूं
-वरिष्ठ अधिकारी कामरान रिजवी और अमित घोष के केन्द्र की सेवा में जाने की मंजूरी और उनकी कार्य शैली को टाइटल के रूप में कुछ यूं रेखांकित किया गया- 'अच्छा चलता हूं फाइलों में याद  रखना है।'

-दरअसल, कामरान के बारे में यह आम धारणा है कि वह फाइलों पर हस्ताक्षर करने से पूर्व ढेरों बार वार्ता, चर्चा आदि शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, जबिक अमित घोष ज्यादा खोजबीन के बगैर से फाइल बढ़ाते हैं।


 

आईएएस प्रशांत त्र‍िवेदी। फाइल आईएएस प्रशांत त्र‍िवेदी। फाइल

मोहे रंग तो गेरूआ
-सपा सरकार में महत्वपूर्ण ओहदों पर रही और अब योगी सरकार में पीलीभीत के डीएम का जिम्मा संभाल रही शीतल वर्मा की बदली कार्यशैली की रेखांकित करते हुए उनके साथियों ने ही टाइटल दिया है- 'रंग दे तू मोहे गेरूआ।'

-शीतल के पति इन दिनों मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात हैं।



टॉयलेट का जुगाड़
-अखिलेश यादव की सरकार में उनके सचिव रहे अमित गुप्ता व विजय किरन अानंद के पास स्वच्छता अभियान का जिम्मा है, लेकिन महकमा सवालों के घेरे में है। एेसे में साथियों ने टाइटल दिया है- 'भैया धाड़, धाड़, धाड़ कर ले, अब तो टॉयलेट का गुगाड़ कर ले।'


 

आईएएस अरव‍िंद कुमार। फाइल आईएएस अरव‍िंद कुमार। फाइल

आज मैं ऊपर
-सिर्फ चार साल की नौकरी में मुख्यमंत्री के विशेष सचिव बन गए अविनाश कुमार की ऊर्जा को उभारते हुए साथियों ने टाइटल दिया है- 'आज मैं ऊपर आसमान नीचे।' दरअसल, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव के रूप में वह एेसे आईएएस अधिकारियों को भी निर्देश देते हैं, जो चीफ सिक्रेट्री बनने की रेस में हैं।'

 


दोस्तों को सलाम करे
-सपा सरकार में बेहद प्रभावशाली रही पंधारी यादव, अनुराग यादव, रंजन कुमार, विकास गोठलवाल और कंचन वर्मा के इन दिनों स्टडी टूर पर लंदन में होने को कुछ यूं याद किया- 'लंदन को गए मेरे दोस्त, दोस्त को सलाम करो।'


 

आईएएस आलोक कुमार। फाइल आईएएस आलोक कुमार। फाइल

गब्बर सिंह टीम
-वित्तीय समस्याओं से जूझ रही सरकार के लिए जीएसटी, स्टाम्प शुल्क जुटाने में लगे वरिष्ठ आईएएस मुकेश मेश्राम और आरके तिवारी का टाइटल है- 'गब्बर सिंह टीम।'

-ध्यान रहे राहुल गांधी ने गुजरात चुनाव के दौरान जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स कहा था।
 

 

बदल जाए अगर माली...
-अखिलेश यादव के विशेष सचिव रहे और अब योगी आदित्यनाथ के विशेष सचिव का दायित्व संभाल रहे रिग्जियान सैफिल को उनके दोनों सरकार के साथ बेहतर तालमेल को देखते हुए टाइटल दिया गया है- 'बदल जाए अगर माली, चमन होता नहीं खाली।'

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आईएएस राजीव कुमार। फाइलआईएएस राजीव कुमार। फाइल
आईएएस शश‍ि प्रकाश गोयल। फाइलआईएएस शश‍ि प्रकाश गोयल। फाइल
आईएएस कामरान र‍िजवी। फाइलआईएएस कामरान र‍िजवी। फाइल
आईएएस प्रशांत त्र‍िवेदी। फाइलआईएएस प्रशांत त्र‍िवेदी। फाइल
आईएएस अरव‍िंद कुमार। फाइलआईएएस अरव‍िंद कुमार। फाइल
आईएएस आलोक कुमार। फाइलआईएएस आलोक कुमार। फाइल
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