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'यूपीकोका' बिल विधानसभा में पास, अखिलेश बोले- विपक्ष की आवाज दबाने के लिए आया है बिल

विपक्ष इस बिल का विरोध कर रहा है।

Danik Bhaskar | Dec 20, 2017, 01:07 PM IST
मकोका की तरह है यूपी कोका। मकोका की तरह है यूपी कोका।

लखनऊ. यूपी में संगठित क्राइम को रोकने के लिए योगी सरकार द्वारा बुधवार को विधानसभा में यूपीकोका बिल पेश किया गया। इस बिल पर चर्चा शुरू हो गई है। पिछले दिनों इस कानून को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी मिली थी। मायावती ने इसका विरोध करते हुए कहा- "ये दलितों-अल्पसंख्यकों को खत्म करने वाला कानून है।" वहीं, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा- "विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए सरकार ये बिल लेकर आई है।"

-सीएम योगी ने आदित्यनाथ ने विधानसभा में दोपहर 1बजे 'यूपीकोका' कानून का ड्राफ्ट पेश किया। सदन में चर्चा के बाद इसे पास कर दिया गया। इसके बाद सरकार इसे विधान परिषद में चर्चा के लिए पेश करेगी वहां से पास होने के बाद उसे राज्यपाल के यहां भेजा जाएगा।

विपक्ष ने किया हंगामा


-बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा- "इस कानून का इस्तेमाल सिर्फ दलितों और अल्पसंख्यकों के खात्मे के लिए बनाया गया है। दलितों पर इसके तहत केस दर्ज कर जानबूझकर जेल भेजा जाएगा। उन्हें प्रताड़ित किया जाएगा। ये पूरी तरह से भाजपा की अल्पसंख्यक विरोधी नीति और मानसिकता को दिखाता है।"
-अखिलेश यादव ने कहा- "इस कानून से भाजपा अपना राज चाहती है, इसका डर दिखाकर वो विपक्ष को कमजोर करने का साजिश रच रही है। पहले से इतने कानून हैं उन्हें लागू नहीं करवा पा रही है। अपनी कमियों को छुपाने के लिए यूपीकोका लेकर आई है।"


मकोका की तर्ज पर काम करेगा यूपीकोका


-यूपीकोका महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) की तर्ज पर काम करेगा।
-सीएम योगी ने सत्ता संभालने के बाद संगठित अपराध, माफियाओं पर शिकंजा कसने का आदेश दिया था। इसके बाद तत्कालीन गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्र ने मुंबई, दिल्ली और बिहार समेत कई राज्यों में संगठित अपराध के लिए बनाए गए कानून के बारे में जानकारी जुटाई।

क्या है मकोका


- साल 1999 में महाराष्ट्र सरकार ने मकोका (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट) बनाया था। इसका मुख्य मकसद संगठित और अंडरवर्ल्ड क्राइम को खत्म करना था। 2002 में दिल्ली सरकार ने भी इसे लागू कर दिया। फिलहाल महाराष्ट्र और दिल्ली में यह कानून लागू है।


-इसके तहत संगठित अपराध जैसे अंडरवर्ल्ड से जुड़े अपराधी, जबरन वसूली, फिरौती के लिए अपहरण, हत्या या हत्या की कोशिश, धमकी, उगाही सहित ऐसा कोई भी गैरकानूनी काम जिससे बड़े पैमाने पर पैसे बनाए जाते हैं, मामले शामिल है।


सख्त है मकोका कानून


- ‌मकोका लगने के बाद आरोपियों को आसानी से जमानत नहीं मिलती है। मकोका के तहत पुलिस को चार्जशीट दाखिल करने के लिए 180 दिन का वक्त मिल जाता है, जबकि आईपीसी के प्रावधानों के तहत यह समय सीमा सिर्फ 60 से 90 दिन की है। मकोका के तहत आरोपी की पुलिस रिमांड 30 दिन तक हो सकती है, जबकि आईपीसी के तहत यह अधिकतम 15 दिन की होती है।


ऐसे लगता है किसी पर मकोका


- किसी के खिलाफ मकोका लगाने से पहले पुलिस को एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस से मंजूरी लेनी होती है। इसमें किसी आरोपी के खिलाफ तभी मुकदमा दर्ज होगा, जब 10 साल के दौरान वह कम से कम दो संगठित अपराधों में शामिल रहा हो।
- संगठित अपराध में कम से कम दो लोग शामिल होने चाहिए। इसके अलावा आरोपी के खिलाफ एफआईआर के बाद चार्जशीट दाखिल की गई हो। अगर पुलिस 180 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल नहीं करती, तो आरोपी को जमानत मिल सकती है।

फाइल । फाइल ।