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परिषद में नहीं पास हो सका यूपीकोका, बिल प्रवर समिति को भेजा गया

यूपीकोका पर सपा, बसपा और कांग्रेस ने एक सुर में किया विरोध, लाए संशोधन ।

Dainik Bhaskar

Dec 22, 2017, 09:11 PM IST
गुरुवार को विधानसभा में यह बिल गुरुवार को विधानसभा में यह बिल

लखनऊ.उम्मीद के मुताबिक विधान परिषद में यूपीकोका (उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक 2017) पास नहीं हो पाया। विपक्ष के संशोधन प्रस्तावों के साथ सभापति रमेश यादव ने बिल को प्रवर समिति को भेज दिया है। गुरुवार को विधानसभा में यह बिल पास किया गया था। जिसे आज विधान परिषद में टेबल किया था। शुक्रवार को परिषद में 11 विधेयक टेबल किये गए इनमें से यूपीकोका व यूपी सहकारी समिति बिल पास नहीं हो सके। दोनों बिलों को संशोधन के लिए प्रवर समिति को भेज दिया गया है। सभापति रमेश यादव प्रवर समिति के सदस्यों का नाम जल्द घोषित करेंगे।

परिषद में नेता सदन ने बिल टेबल किया

-शुक्रवार की शाम को नेता सदन दिनेश शर्मा ने उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक 2017 के विधानसभा में पारित होने की जानकारी देते हुए उसे परिषद में पास करने का प्रस्ताव किया।

- मगर विपक्षी सदस्य भड़क गए। सपा, बसपा एवं कांग्रेस के सदस्यों ने संयुक्त -रूप से संशोधन प्रस्ताव के साथ बिल को प्रवर समिति के सुपुर्द करने की मांग की।

-सदन में विपक्षी दलों का बहुमत है, जिस पर सभापति रमेश यादव ने बिल को प्रवर समिति को भेजना स्वीकार कर लिया

विरोधियों को चुप कराने को आया बिल

-यूपीकोका के संशोधन के प्रस्ताव पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि यह जनता को धोखा देने वाला कानून है।

-यह कानून व्यवस्था ठीक करने के लिये नहीं बल्कि राजनैतिक विरोधियों को चुप कराने के लिये लाया जा रहा है।

-भाजपा सरकार कानून व्यवस्था नहीं राजनैतिक विरोधियों को ठीक करना चाहती है। कानून व्यवस्था ठीक करने के नाम पर प्रदेश को धोखा न दे।

बसपा भी लायी संशोधन प्रस्ताव

-बसपा विधायक दल के नेता सुनील चित्तौड़ ने यूपीकोका को काला कानून ठहराते हुए कहा कि यह दलित, अल्पसंख्यकों को उत्पीड़ित करने की मंशा से लाया गया है।

-इस कानून के जरिये राजनीतिक विरोधियों को सबक सिखाने की सरकार की मंशा है वह विपक्ष विहीन राजनीति करना चाहती है। बसपा ने भी संशोधन प्रस्ताव का समर्थन किया।

कांग्रेस भी संशोधन के समर्थन में

-कांग्रेस के सदस्य दीपक सिंह ने इस कानून को 1919 में बने अंग्रेजों के कानून व प्रेस पर अंकुश लगाने वाले वरर्नाकुलर एक्ट से तुलना करते हुए कहा कि इसमें न वकील व न दलील की स्थिति है।

-लोकतंत्र में इस तरह का काला कानून थोपा नहीं जा स कता है। कांग्रेस इस बिल का विरोध करती है।

सरकार ने कहा दुरुपयोग नहीं होगा

-उपमुख्य मंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि अगर पूर्व सरकार ने डायल 100 का सही उपयोग किया होता तो कानून व्यवस्था इतनी खराब नहीं होती

-हमारी सरकार यूपीकोका के माध्यम से पहली बार भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।

-जनता में इस विधेयक का गलत संदेश दिया जा रहा है। यह अपराधियों के खिलाफ है राजनैतिक कार्यकर्ता के खिलाफ नहीं है।

-संशोधन वापस लेने की बात कहते हुए कहा कि आशंकाये निर्मूल है यह एक्ट उनकी मदद के लिये है जिनकी कोई सुनवाई नहीं करता।

-हमारा किसी के प्रति दुराग्रह या दुराभाव नहीं है मैं संशोधन वापस लेने की मांग करता हूं।

परिषद में किसके कितने सदस्य

समाजवादी पार्टी-61

बहुजन समाज पार्टी-09

भारतीय जनता पार्टी-13

कांग्रेस-02

रालोद-01

शिक्षक दल (गैरराजनीतिक)-05

निर्दल समूह-05

निर्दल व असंबद्ध-02

सपा ने इस बिल पर भी दिया संशोधन

सपा के सदस्यों ने विधान सभा से पारित उत्तर प्रदेश सहकारी समिति (संशोधन) विधेयक 2017 पर संशोधन पेश किया। जिस पर सभापति ने इसे भी प्रवर समिति के सुपुर्द कर दिया समिति के माह के अंदर देगी अपनी रिपोर्ट। इस बिल में चुने हुए प्रतिनिधियों के स्थान पर अधिकारियों के अधिकार बढ़ाए गए हैं। सहकारी समितियों की चुनावी प्रक्रिया में भी बदलाव का प्रस्ताव है।

ये बिल पास हो गए

1. उत्तर प्रदेश चलचित्र (विनियमन) (संशोधन विधेयक) 2017

2.उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास संशोधन विधेयक 2017

3.उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल और अन्य कर्मचारियों के वेतन का भुगतान संशोधन विधेयक 2017

4.उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा संशोधन विधेयक 2017

5.उत्तर प्रदेश निरसन विधेयक, 2017

6. दण्ड विधि अपराधों का शमन और विचारणों का उपशमन संशोधन विधेयक 2017

7.उत्तर प्रदेश प्रयागराज मेला प्राधिकरण, इलाहाबाद विधेयक,2017

8. उत्तर प्रदेश आबकारी (संशोधन) विधेयक, 2017

9.उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2017

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