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4 साल बाद ओपी सिंह UP वापस, चुनौतियों के अंबार के बीच संभालेंगे DGP का पद

ओपी सिंह की डीजीपी पर नियुक्ति का आज जारी होगा आदेश, मंगलवार को संभालेंगे चार्ज

parvez Ahmad | Last Modified - Jan 22, 2018, 07:33 PM IST

  • 4 साल बाद ओपी सिंह UP वापस,  चुनौतियों के अंबार के बीच संभालेंगे DGP का पद
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    ओपी सिंहः 1983 बैच न्यू डीजीपी

    लखनऊ.UP के डीजीपी को लेकर कई दिनों से चल रहा इंतजार मंगलवार को खत्म होगा। नामित होने के 24वें दिन 1983 बैच के आईपीएस ओपी सिंह DGP का पद संभाल लेंगे। मंगलवार उनकी नियुिक्त का आदेश जारी होगा। वह 10 महीने पुरानी योगी सरकार के तीसरे डीजीपी होंगे। जावीद अहमद, सुलखान सिंह और अब ओपी सिंह डीजीपी बनेंगे। बता दें कि श्री सिंह केन्द्र से प्रतिनियुक्ति बीच में छोड़कर 4 साल बाद यूपी लौट रहे हैं। ..नए डीजीपी के सामने चुनौतियां ही चुनौतियां

    31 दिसंबर को डीजीपी नामित हुए थे ओपी सिंह

    -31 दिसंबर को सुलखान सिंह के तीन माह के सेवा विस्तार की अवधि पूरी हो गई थी। तब गृह विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि 1983 बैच के ओपी सिंह को डीजीपी बनाने के लिए केन्द्र को प्रस्ताव भेजा गया है।

    -यूपी सरकार ने उन्हे डीजीपी पद के लिए यूपी बुलाने का जब प्रस्ताव भेजा, उस समय ओपी सिंह सीआइएसएफ में डीजी के पद पर तैनात थे। 19 दिनों तक यह प्रस्ताव केन्द्रीय गृह मंत्रालय व पीएमओ कार्यालय में लंबित रहा, इस पर उनके न आने की चर्चाएं होने लगीं। कयास लगने लगे। -आखिर 19 जनवरी को गृह मंत्रालय ने ओपी सिंह को डेपुटेशन की अवधि पूरी होने से पहले यूपी वापस भेजने के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया। 21 तारीख को नियुक्ति संबंधी कैबिनेट ने उन्हें कार्यमुक्त कर दिया। 23 जनवरी को ओपी लखनऊ पहुंचेंगे।

    -ओपी सिंह को यूं तो सुलझा हुआ और व्यावहारिक पुलिसिंग का तजुर्बेकार अधिकारी माना जाता है, मगर यूपी के बहुचर्चित स्टेट गेस्ट हाउस कांड का दाग भी उन पर है।

    आज जारी होगा औपचारिक आदेश

    -यूपी सरकार ने ओपी सिंह को केन्द्र से वापसी के लिए भेजे पत्र में डीजीपी नियुक्त करने की बात कही है। मगर नियुक्त का आदेश जारी नहीं हुआ। शासन के सूत्रों का कहना है कि मंगलवार को डीजीपी नियुक्त करने आदेश होगा।

    ये है नियम

    - कोई IPS जब कैडर में वापस लौटता है तो उसे डीजीपी कार्यालय को लिखित रूप से वापस लौटने की जानकारी देनी होती है।

    - जिसके आधार पर आइजी कार्मिक अर्द्धशासकीय पत्र के जरिये गृह विभाग को संबंधित आइपीएस के वापस लौटने की जानकारी देते हैं।

    -आईजी कार्मिक के पत्र पर गृह विभाग तैनाती का प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजता है।

    -मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद गृह विभाग की ओर से नियुक्ति का आदेश निर्गत करने का निर्णय होता है।

    सामने हैं ये चुनौतियां

    -नए डीजीपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुलिस पर "जाति विशेष" के अधिकारियों को तवज्जो दिये जाने के कथित इल्जामों से निपटना होगा। एनकाउंटर की होड़ में तकनीकी गलतियों से निपटना बड़ी चुनौती है। दरअसल, सुमित गुर्जर एनकाउंटर, मथुरा में पुलिस की गोली से स्कूली बच्चे की मौत, शामली में सिपाही की शहादत के पीछे की लापरवाही सवालों घेरे में है।

    -प्रभारी निरीक्षक, थानाध्यक्ष पदों पर तैनाती में शासनादेशों का पालन कराना बड़ी चुनौती है। महत्वपूर्ण पदों पर तैनात वरिष्ठ अधिकारियों के कथित अतिउत्साही रवैये पर नियंत्रण उनके लिए खासी बड़ी चुनौती होगी।

    -लूट, हत्या और डकैती की वारदातों में तेजी से हो रहा इजाफा रोकना। आतंकवाद, संगठित अपराधों से निपटने की रणनीति को जमीन पर उतारने की चुनौती होगी। सड़क पर बढ़ती गुंडागर्दी और पुलिस पर लगने वाले वसूली के इल्जामों से निपटने की रणनीति पर भी जनता की नजर होगी।

    सुलखान के रिटायर होने पर ओपी सिंह का चयन

    -आपको बता दें कि 31 दिसंबर, 2017 को डीजीपी सुलखान सिंह ने रिटायरमेंट के बाद मिले तीन माह के सेवाविस्तार की अवधि पूरी की, जिसके बाद इस पद के लिए ओपी सिंह का चयन किया गया।

    कैसा था सुलखान सिंह का कार्यकाल ?

    -10 महीने के कार्यकाल में करीब 1000 एनकाउंटर, 2,000 से अधिक अपराधी जेल भेजे गए। रिटायरमेंट से दो दिन पहले पुलिस ने किया दावा- "हत्या में 4.43, दहेज हत्या में 6.68, रोड होल्ड अप फीसदी की गिरावट आई।"
    -सुलखान सिंह की पहल पर सरकार ने पुलिस रेंज में आइजी और जोन में एडीजी की तैनाती का निर्णय किया, मगर गोरखपुर रेंज, जोन में यह फैसला लागू नहीं हो सका।

    कार्यकाल के दौरान कमी?


    -दावे से इतर 15 मार्च से दिसंबर 2017 तक डकैती के मामले 15.85 फीसद इजाफा हुआ। लूट 20.46, अपहरण में 44.44 फीसद और बलात्कार की वारदातों में 40.83 फीसद बढ़ीं। पुलिस एनकाउंटरों पर विपक्ष ने सवाल उठाए- "नोएडा में सुमित गुर्जर के एनकाउंटर पर पार्टी लाइन से ऊपर उठकर आंदोलन हुए।"


    CO को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने पर सवाल

    -डिप्टी एसपी कमल यादव को अनिवार्य रिटायरमेन्ट का फैसला विवादों भरा रहा। वजह, लखनऊ में जैश- ए-मोहम्मद के 3 आतंकियों को मार गिराने वालों में वह अग्रणी था। दिल्ली के निर्भया रेप कांड से ज्यादा चर्चित लखनऊ के आशियाना रेप कांड के आरोपियों की गिरफ्तार किया। घटना से समय प्रदेश में सपा की सरकार थी। आरोपितों के परिजन सपा के प्रमुख नेता थे।

    -बुंदेलखंड के कुख्यात डकैत ददुआ से सबसे ज्यादा 15 मुठभेड़ करने, गोरखपुर के उद्योगपति जालान के बदमाशों से मुक्त कराने और एक अपहर्ता को मुठभेड़ में मार गिराने पर तत्कालीन सरकार ने उसे आउट आफ टर्न प्रोन्नत किया।

    -लखनऊ में आतंक के पर्याय रहे बावरिया गिरोह के छह सदस्यों को मुठभेड़ में ढेर करने का तमगा भी इसी पुलिस अधिकारी के नाम है।

    -जिस दिन कमल यादव को अनिवार्य सेवानिवृति के फैसला सुनाया गया उसके एक दिन पहले ही योगी सरकार के आला पुलिस अधिकारियों ने ही लखनऊ में शिया-सुन्नी टकराव रोकने के लिए प्रशस्ति पत्र दिया गया।

    योगी सरकार में 33 दिन के डीजीपी जावीद अहमद

    -19 मार्च को 2017 को योगी आदित्यनाथ ने सीएम पद की शपथ ली और कानून व्यवस्था ठीक करने का दावा किया। तत्कालीन डीजीपी जावीद अहमद को अपराधियों के विरुद्ध अभियान चलाने का हुक्म मिला। मगर सांसद समर्थकों ने सहारनपुर के तत्कालीन SSP लवकुमार के घर में घुसकर उपद्रव किया। जावीद ने सांसद व उनके समर्थकों के विरुद्ध गंभीर धाराओं में एफआइआर दर्ज करवा दी।

    -बसपा नेता व पूर्व ब्लाक प्रमुख मोहम्मद शमी को मऊआइमा में दौड़ाकर गोलियों से भून दिया गया। BJP सरकार में राजनीत की मुख्य धारा के किसी व्यक्ति की यह पहली हत्या थी, हालांकि शमी खुद भी हिस्ट्रीशीटर थे।

    -मगर योगी सरकार ने अपने कार्यकाल के 33वें दिन 22 अप्रैल 2017 को जावीद अहमद डीजीपी पद से हटा दिया। जावीद अहमद का कार्यकाल पुलिस में प्रोन्नति व वेतन विसंगतियां खत्म कराने के लिए जाना जाता है।

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Web Title: Waiting Will End, UP Gets DGP Today
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