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साल 2018: उत्साह में बीजेपी, कांग्रेस, सपा और बसपा के लिए हैं ये चुनौतियां

सपा और बसपा के सामने कई चुनौतियां हैं।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 01, 2018, 01:36 PM IST

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    बीजेपी के सामने वादों को पूरा करने की भी चुनौती होगी। (फाइल)

    लखनऊ.न्यू ईयर 2018 का जहां लोग जश्न माना कर स्वागत कर रहे हैं वहीं, यूपी की राजनीति के लिए 2018 का साल काफी अहम माना जा रहा है। DainikBhaskar.com आपको बता रहा है साल 2018 यूपी की राजनेताओं के लिए कैसा रहेगा। बसपा के लिए कैसा रहेगा नया साल

    -पॉलिटिक्ल एक्सपर्ट वीरबहादुर मिश्रा ने बताया- "बसपा के लिए 2018 का नया साल चुनौतियों के साथ एक मौका भी लेकर आया है। 2017 की हार के बाद बसपा में एक बेचैनी थी कि उसने जो गलतियां की उसे वो सुधार करेगी।"
    -थोड़ी सी राहत बसपा को निकाय चुनावों में वोट प्रतिशत बढ़ने से मिला। उसका सीधा सा पहलू दलित मुस्लिम एक होते दिखे लेकिन संख्या बहुत कम थी।
    -2019 लोकसभा चुनावों में जाने से पहले मायावती को पहले अपना कैडर वापस पाना होगा। जिससे बल पर वोट मांगती हैं। क्योंकि अभी वहीं, इनके पास नहीं है। मुस्लिम फैक्टर प्लस प्वाइंट हो सकता है लेकिन बिना कैडर बेकार। इनको संगठन में मजबूती लानी होगी।

    अखिलेश के लिए कई चुनौतियां

    -पिछले साल जो पॉलिटिकल चेंज यूपी में हुआ, उससे समाजवादी पार्टी और परिवार दोनों को बड़ा नुकसान हुआ। सपा के नए मुखिया अखिलेश यादव ने जिस तेजी से शिवपाल और मुलायम सर्मथकों को बाहर का रास्ता दिखाया, उतनी ही धीमी गति रही इनके बढ़ने की।
    -अखिलेश यादव को अगर वोटरों के पास पहुंचना हैं तो 2019 से पहले तक इनके लिए अपना संगठन केा मजबूत करना ही चुनौती होगी।
    -शिवपाल यादव भी के साथ तालमेल भी अखिलेश यादव के लिए चुनौती है।


    भाजपा में उत्साह

    -यूपी में बेहतरीन प्रर्दशन से भाजपा कार्यकर्ता और नेताओं में उत्साह है। 2018 में इनके लिए 2017 में किये गए वादों को जमीन पर उतारना होगा, क्योकि 2017 में पूर्ण बहुमत और निकायों में सफलता से कहीं भी बहाना नहीं है।
    -इनके लिए वादों को पूरा करने की चुनौती है क्योंकि अब वोटर इनके भाषण नहीं काम देखना चाहता है। खासतौर पर यूथ और किसान को लेकर।

    कांग्रेस को बढ़त की उम्मीद

    -वरिष्ठ पत्रकार शरद प्रधान ने कहा- "कांग्रेस के पास 2019 लोकसभा चुनावों से पहले 2018 में उम्मीद की एक किरण जरूर दिख रही है। लेकिन ये अपने संगठन को सही तरीके से बना पाए तो।"
    -यूपी में हवाई जहाज वाले फिल्मीं नेताओं से भीड़ जरूर आ सकती है लेकिन वो वोटर नहीं हो सकते। इनके पास संगठन में बगावत और उसे बचाने की चुनौती है।
    -2019 से पहले भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे को रोकने के लिए तीसरा मोर्चा बनने की सुगबुगाहट भी तेज होती दिख रही हैं लेकिन राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद ये बहुत सीमित ही रहेगी। क्योंकि अभी तक राहुल को महांगठबंधन के साथ जाते हुए नहीं देखा गया।

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    बसपा को अपने वोट बैंक को मजबूत करने की जरुरत है। (फाइल)
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    कांग्रेस को संगठन मजबूत करने की जरुरत है। (फाइल) ।
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    सपा को अपनों को साथ लेकर चलना होगा।
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Web Title: What Will Be The Year 2018 For Uttar Pradesh Politics
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