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मंडी में 300 करोड़ का घोटाला सदन मेें उठा तो सीनियर से हटा जूनियर अधिकारी को सौंपी जांच

सीमेन्ट घोटाला विधान परिषद में उठने के बाद डिपार्टमेन्ट ने मामले की जांच वरिष्ठ अधिकारी से लेकर कनिष्ठ को सौंपी है।

Danik Bhaskar | Dec 26, 2017, 02:06 PM IST
बीजेपी विधायक द्वारा मुख्यमं बीजेपी विधायक द्वारा मुख्यमं

लखनऊ. मंडी परिषद में 300 करोड़ों का सीमेन्ट घोटाले की आवाज विधान परिषद में उठने के बाद डिपार्टमेन्ट ने पूरे मामले में लीपा-पोती शुरू कर दी है। घोटाले को दोषियों तक पहुंच गए वरिष्ठ पीसीएस पुष्पराज सिंह से जांच वापस लेकर जांच उपनिदेशक (विपणन) बृजेश कुमार को सौंप दी है। जांच वापस मंडी निदेशक धीरज कुमार ने दिया है। बता दें कि इस घोटाले में आरोपी डिप्टी डायरेक्टर जितेंद्र सिंह और उनके जूनियर तेज सिंह हैं। स्वाति सिंह नहीं दे पाईं थी जवाब...

-मामला 19 दिसंबर को विधानपरिषद में सपा एमएलसी (विधान परिषद सदस्य) शतरुद्ध प्रकाश ने उठाया था। जिसका कृषि विपणन व व्यापार राज्यमंत्री स्वाति सिंह जवाब नहीं दे पाईं थी। इससे सदन में सरकार की किरकिरी हुई थी। अब वरिष्ठ अधिकारी से जांच वापस लेकर जूनियर अधिकारी को सौंपे जाने पर डिपार्टमेन्ट के अधिकारियों की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बता दें कि इस घोटाले का पर्दाफाश DainikBhaskar.com ने किया था।

ये है मामला

- मंडी परिषद गाजियाबाद के डिप्टी डायरेक्टर के पद पर साल 2012 से तैनात जितेंद्र सिंह और इंजीनियर तेज सिंह पर कन्सट्रक्शन क्वालिटी और सीमेंट की खरीददारी में घोटाला करने के आरोप लगे थे।
- गाजियाबाद यूनिट में तैनात कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में इन पर कार्रवाई की संस्तुति की थी। जिस पर विशेष सचिव (कृषि) ने भी माना था कि तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर जितेंद्र सिंह और इंजीनियर तेज सिंहने मंडी और जनेश्वर मिश्रा गांवों के कन्स्ट्रक्शन में सीमेंट की सप्लाई बाहर की एजेंसी से कराई ।
- सीमेंट की सप्लाई परिषद में रजिस्टर्ड संस्था के अलावा बाहरी एजेंसी से मार्केट से ऊंचे दामों पर की गई। जिस सीमेंट की खरीद की दर ऑन पेपर दिखाई उसकी सप्लाई न कर लो-क्वालिटी सीमेंट की सप्लाई कराई, जिससे गुणवत्ता खराब हुई।

हर बोरी पर 40 रुपए कमीशन का आरोप

- मंडी परिषद की रिपोर्ट के अनुसार ,डिप्टी डायरेक्टर जितेंद सिंह ने निर्माण के लिए बाहर की एजेंसी को हायर कर रखा था, जबकि परिषद में रजिस्टर्ड एजेंसियों को किसी न किसी रूप में बाहर कर देते थे।
- हर बोरी पर 40 रुपए का कमीशन फिक्स कर रखा था, जो कि इंजीनियर तेज सिंह के जरिए वसूल कर हिस्सा बांट लिया जाता था, इस तरह का इल्जाम लगाया गया था।
- मंडी परिषद गाजियाबाद में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर रहते हुए उन्हें मेरठ और बुलंदशहर जोन में चीफ के तौर पर अतिरिक्त प्रभार दिया गया था।
- इस दौरान करीब 700 से ज्यादा जनेश्वर मिश्र गांवों में आरसीसी सड़क निर्माण और किसान मंडियों के निर्माण किया गया, जिसमें घोटाले का आरोप है।

- आरसीसी सड़क और मंडियों को बनाने के लिए ज्यादातर इस्तेमाल सीमेंट का ही होता है। यही वजह है कि लाखों बोरी सीमेंट को आसानी से खपत हो गई, जबकि जरूरत इतनीं नहीं थी।
- डिप्टी डायरेक्ट और इंजीनियर ने सीमेंट की कॉस्टिंग को बढ़ाने के लिए ओपीसी सीमेंट की सप्लाई का पेमेंट किया, ओपीसी सीमेंट 40 रूपए तक महंगी होती है, जबकि वास्तव में पीपीसी सीमेंट की ही सप्लाई की गई।

टेक्निकल ऑडिट सेल से कराई गई जांच
- विशेष सचिव की ओर से 14 अगस्त 2017 को जारी लेटर में कहा गया कि सभी फर्जीवाड़े और फाइनेंसियल धांधली की जांच डिर्पाटमेंट टेक्निकल ऑडिट सेल से कराए।
- ये सभी जांचें हर उस जगह पर कराई जाएं, जहां भी इन दोनों की नियुक्ति रही हो, जिसमें मेरठ, बुलंदशहर, गाजियाबाद और नोएडा प्रमुख तौर पर हैं।
- पिछली कमिश्नरी जांच टीम से जुड़े एक सदस्य की माने, हर यूनिट को साल में निर्माण के लिए 16 करोड़ से 20 करोड़ तक मिलते है। उनके पास 3 यूनिट का चार्ज था। एक यूनिट की 5 सालों की अनियमितता को 20 करोड़ से कैलकुलैट करें , तो वो 100करोड़ होती है।
-उनके पास 3 यूनिट का काम था। ऐसे में 300 करोड़ से ज्यादा का घोटाला उन्होंने किया था। अब उसमें भी क्वालिटी कम्प्रोमाइज में कितना घपला हुआ, ये जांच के बाद ही कह पाऊंगा।
- वर्तमान में डिप्टी डायरेक्टर रहे जितेंद सिह को मंडी परिषद के चीफ इंजिनियर ग्रेड-2 पर रखते हुए लखनऊ कार्यालय से अटैच किया गया है।

विधान परिषद में घोटाले की आवाज उठते ही बदली जांच

-सीमेंट घोटाले का मामला एमएलसी शतरूद्ध प्रकाश द्वारा उठाए जाने के बाद मंडी परिषद दागी अफसरों को बचाने में लग गया है। एमएलसी शतरुद्ध प्रकाश का ये आरोप है।

-19 दिसम्बर को मामला उठते ही डायरेक्टर मंडी परिषद् धीरज कुमार ने जांच अधिकारी बदल दिए। उन्होंने डीडीए मेरठ पुष्पराज सिंह से जांच वापस लेकर विभाग के जूनियर अधिकारी बृजेश कुमार को सौंप दी।

-बृजेश कुमार लंबे समय तक घोटाले में आरोपित जितेन्द्र सिंह के मातहत उनके सचिव के रूप में काम कर चुके हैं।

चार बार नोटिसों का नहीं दिया जवाब

-DainikBhaskar.com पास मौजूद दस्तावेजों से साफ है कि अब तक घोटाले की जांच कर रहे सीनियर पीसीएस पुष्पराज सिंह ने आरोपी अफसरों को चार बार नोटिस भेजा, उसके बाद भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

-अब सवाल यह उठता है कि घोटाले के आरोपी अफसर, तब सीनियर पीसीएस अधिकारी को जवाब नहीं दे रहे हैं तो अपने जूनियर अधिकारी को क्या जवाब देंगे ?

-इस मामले की शिकायत करने वाले भाजपा विधायक ज्ञान तिवारी का कहना है कि अधिकारी दोषियों को बचाना का ताना-बाना बुन रहे हैं जबिक सरकार पारदर्शी व भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पूरे प्रकरण की जांच जानकारी देकर ठोस कार्रवाई कराई जाएगी।

मंत्री और प्रमुख सचिव को नही दी गई कोई कॉपी
-सीएम ऑफिस के आदेश पर घोटाले की जांच कर रहे अधिकारी से जांच लेकर दूसरे अधिकारी को दिये जाने के मामले की जानकारी विभागीय मंत्री स्वाति सिंह को भी नहीं थी।प्रमुख सचिव (कृषि) भी इस मामले के जांच अधिकारी बदले जाने की जानकारी से इंकार करते हैं। उनका कहना है कि उन्हें एेसी कोई जानकारी नहीं है, वह मामले की जानकारी लेंगे।