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लोकसभा-विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद BSP का कमबैक, ये रही वजह

बीएसपी सुप्रीमो ने जुलाई में राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर बेस वोट को मजबूत करने पर फोकस किया।

Dainik Bhaskar

Dec 01, 2017, 05:30 PM IST
निकाय चुनाव में BSP की जीत कमबैक के तौर पर देखी जा रही है। निकाय चुनाव में BSP की जीत कमबैक के तौर पर देखी जा रही है।

लखनऊ. विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद बीएसपी ने ग्रास रुट लेवल पर काम करना शुरु किया। बीएसपी ने अपने मंडल कोर्डिनेटर्स से लेकर जिला संयोजक और जिला प्रभारी को एक्टिव किया। पार्टी के लोग मोहल्ला-मोहल्ला मीटिंग कर लोगों के बीच अपनी पैठ बनाने का काम करते रहे। इसका असर निकाय चुनाव में देखने को मिला। बेस वोट पर पकड़ मजबूत बनाई...

-बीएसपी सुप्रीमो ने जुलाई में राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर बेस वोट को मजबूत करने पर फोकस किया। इसके लिए उन्होंने मेरठ और सहारनपुर में मंडल स्तरीय रैली भी की। आपको बता दें कि ये दोनों इलाके दलित और मुस्लिम बाहुल्य हैं।


- जाटव और नॉन जाटव बीएसपी के लिए हमेशा से बेस वोट रहे हैं। विधानसभा चुनाव में हार के बाद मायावती ने उसे मजबूत करने की कोशिश की। सहारनपुर में ठाकुरों- दलितों के बीच हुए जातीय संघर्ष के बाद वहां का दौरा कर दलितों के बीच अपना मैसेज दिया। इसकी वजह से बीएसपी की पकड़ दलितों के बीच मजबूत हुई। निकाय चुनाव में बीएसपी ने उस मिथ को भी तोडा, जिसमें ये कहा गया कि दलित वोटों में बीजेपी ने सेंध लगा दी है।

सिम्बल पर चुनाव लड़ना फायदेमंद रहा
-चुनाव कोई भी हो, बीएसपी का बेस वोट हाथी चुनाव चिन्ह देख कर ही वोट करता है। निकाय चुनाव में बीएसपी का सिम्बल पर चुनाव लड़ना इसलिए भी फायदेमंद रहा है।

ओवरकॉफिडेंस नहीं दिखाया
-निकाय चुनाव को लेकर बहुत ज्यादा शोर बीएसपी ने नहीं मचाया। जिस तरह से विधानसभा में सबसे ज्यादा मुस्लिमों को टिकट देकर वह सबके निशाने पर आई थी। बहुत सोच समझ कर कैंडिडेट उतारे।

मायावती ने किया लखनऊ में कैंप
-मायावती ने भले ही पार्टी का चुनाव में प्रचार नहीं किया लेकिन इस दौरान वह लखनऊ में रहकर पूरे चुनाव पर नजर बनाए हुए थी।

2019 चुनावों में क्या होगा असर
- निकाय चुनाव का रिजल्ट देख कर मुस्लिम वोट का पोलराइजेशन अपने पक्ष में बीएसपी कर सकती है। 2019 लोकसभा चुनावों में किसी भी तरह का टाई-अप होता है। तब बीएसपी की बारगेनिंग पॉवर बढ़ जाएगी। सबसे बड़ा फायदा कि इस रिजल्ट को दिखाकर बीएसपी को अपना बेस वोट बैंक मजबूत करने का मौका मिल जायेगा।


लोकसभा में खाता नहीं खुला। जबकि विधानसभा में सिर्फ 19 सीटों पर बीएसपी ने जीत दर्ज की। लोकसभा में खाता नहीं खुला। जबकि विधानसभा में सिर्फ 19 सीटों पर बीएसपी ने जीत दर्ज की।
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निकाय चुनाव में BSP की जीत कमबैक के तौर पर देखी जा रही है।निकाय चुनाव में BSP की जीत कमबैक के तौर पर देखी जा रही है।
लोकसभा में खाता नहीं खुला। जबकि विधानसभा में सिर्फ 19 सीटों पर बीएसपी ने जीत दर्ज की।लोकसभा में खाता नहीं खुला। जबकि विधानसभा में सिर्फ 19 सीटों पर बीएसपी ने जीत दर्ज की।
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