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आस्था के केन्द्र बिन्दु हैं राम, उनके बगैर भारत में नहीं हो सकता कोई काम : CM योगी

योगी आदित्यनाथ ने कहा- राम हमारी आस्था के प्रतीक हैं।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Nov 14, 2017, 12:09 PM IST

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    योगी आदित्यनाथ ने कहा- राम भारत के पूरी आस्था का केन्द्र बिन्दु हैं (फाइल)।
    लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या मुद्दे में श्रीश्री रविशंकर की मध्यस्ता को लेकर कहा है कि हम हर बेहतर प्रयास का स्वागत करते हैं। राम मंदिर के मुद्दे पर योगी ने कहा-"राम के बगैर भारत में कोई काम नहीं हो सकता है, राम हमारी आस्था के प्रतीक हैं।" उन्होंने कहा- राम भारत के पूरी आस्था का केन्द्र बिन्दु हैं। अयोध्या से करेंगे चुनाव अभियान की शुरुआत
    -योगी आदित्यनाथ ने बात निकाय चुनानवों के लिए प्रचार में निकले से पहले सीएम आवास पर कही हैं। सीएम आज से निकाय चुनावों के प्रचार शुरू करेंगे। सीएम की पहली जनसभा अयोध्या में है।
    -अयोध्या को देश की राजनीति का केंद्र बिन्दु माना जाता है। निकाय चुनावों के प्रचार की शुरुआत योगी आदित्यनाथ यहीं से कर रहे हैं। शहरी स्थानीय निकाय चुनाव राज्य में सत्ताधारी भाजपा के लिए परीक्षा है।
    -वहीं, विपक्षी दल भी कमर कर ली है। विधानसभा चुनावों के प्रदर्शन को दोहराने का दबाव भाजपा पर रहेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने यह एक बड़ी चुनौती है।

    अयोध्या आ रहे हैं श्रीश्री रविशंकर
    -अयोध्या मुद्दे पर मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए आगे आए अध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर 16 नवम्बर को अयोध्या पहुंच रहे हैं। यहां वो हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही पक्षकारों से मुलाकात करेंगे। वहीं, शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने सोमवार को इलाहाबाद में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेन्द्र गिरी से मुलाकात की थी।

    वसीम रिजवी ने भी की थी सीएम से मुलाकात
    -शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने गुरुवार को सीएम योगी से मुलाकात की थी। इस दौरान रिजवी ने कहा था- ''मैंने राम मंदिर बनाने को लेकर मुलाकात की है। जिस स्थान पर मंदिर है, वहां मंदिर ही बनेगा, जबकि मस्जिद को अयोध्या से दूर किसी मुस्लिम क्षेत्र में बनाने पर हमने बात की है।
    -उन्होंने कहा था- "इसके लिए मैं पक्षकारों से बात कर रहा हूं।'' वहीं, जब मुस्लिम पक्षकारों से बात की गयी तो उन्होंने सिरे से ही वसीम रिजवी के प्रस्ताव को नकार दिया है।
    1949 से चल रहा है विवाद
    -बता दें, 1949 में विवादित ढांचे में रामलला की मूर्ति सामने आने के बाद विवाद शुरू हुआ। तब सरकार ने इस जगह को विवादित घोषित कर दिया और इस जगह ताला लगा दिया गया था।
    -शिया वक्फ बोर्ड अयोध्या मामले में रिस्पॉन्डेंट (प्रतिवादी) नंबर 24 है। बोर्ड ने पहली बार सुप्रीम कोर्ट में ही एफिडेविट दायर किया है। 68 साल पुराने इस मसले को सुलझाने के लिए शिया वक्फ बोर्ड के अलावा सुप्रीम कोर्ट, इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुब्रमण्यम स्वामी भी रास्ता सुझा चुके हैं।
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