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सउदी में छपता था रिचार्ज वाउचर, इलाहाबाद-गोरखपुर समेत कई शहरों में फैला था नेटवर्क

लखनऊ पुलिस ने ऐसे गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार किया है जो अवैध रुप से निजी टेलीफोन एक्सचेंज चला रहा था।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Nov 14, 2017, 08:56 AM IST

  • सउदी में छपता था रिचार्ज वाउचर, इलाहाबाद-गोरखपुर समेत कई शहरों में फैला था नेटवर्क
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    फाइल ।
    लखनऊ. इंटरनेशनल कॉल को लोकल बनाकर करोड़ों रुपए की हेराफेरी करने वाले गिरोह के तीन आरोपियों को एटीएस ने गिरफ्तार किया है। इनके पास से कई कंपनियों के सिम और लैपटॉप बरमाद हुए हैं। वहीं, इस गिरोह के तार गोरखपुर और इलाहाबाद से जुड़े हुए हैं। यह बात पुलिस की जांच में सामने आयी है। सऊदी अरब में बैठा नसीम गोरखपुर में मौजूद अपने साथियों की मदद से रिचार्ज वाउचर छपवाता था। नसीम के साथियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम जब गोरखपुर पहुंची तो सभी आरोपित फरार हो चुके थे। यह भी पता चला है कि अवैध टेलीफोन एक्सचेन्ज संचालित करने वाले गिरोह के तार इलाहाबाद व गोरखपुर समेत अन्य जिलों में फैले हुए हैं। कई शहरों में फैला है नेटवर्क
    -पकड़े गए जालसाजों में दुबग्गा निवासी असद उर्फ अरशद उर्फ असदुल्लाह पुत्र इरशाद, नजरबाग लखनऊ निवासी अबू बक्र पुत्र मो सलीम, सतरिख बाराबंकी निवासी विजय पुत्र रामखेलावन यादव बताया है।
    -असद कई साल तक दुबई में रहने के बाद लौट कर भारत आया है और अपने साथियों की मदद से सिम बॉक्स का काम कर रहा था। हजरतगंज थाने में मामले में मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
    -विजय .यादव ने पूछताछ में बताया-"जानकीपुरम के एक मोबाइल शॉप से फर्जी नाम और पते पर सिम खरीदता था।
    -पुलिस के मुताबिक आरोपितों के पास से जो सिम बरामद किए गए हैं वह सारे सिम फर्जी आईडी से खरीदे गए थे। पुलिस अब इस दिशा में भी जांच कर रही है कि बिना वेरिफिकेशन किए इतनी बड़ी संख्या में सिम किसने जारी किए थे।
    -एटीएस असीम अरुण ने बताया- "पूछताछ में पता चला है कि फाफामऊ इलाहाबाद निवासी दिलशाद ही सिम खरीदवाता था। दिलशाद ने ही आरोपितों को इलाहाबाद से कई उपकरण भी उपलब्ध कराए थे। आरोपित ने फर्जी आईडी पर सिम दिलाने में मदद की थी।
    -पुलिस ने जब दिलशाद की लोकेशन की जांच की तो पता चला कि वह सऊदी अरब में बैठा है और वहीं से अवैध टेलीफोन एक्सचेन्ज का धंधा संचालित कर रहा है।
    -पुलिस सऊदी अरब में बैठे नसीम और दिलशाद के पासपोर्ट रद्द कराने की तैयारी कर रही है। पासपोर्ट कैंसिलेशन की रिपोर्ट बनाकर पुलिस शासन को भेजगी।
    -दोनों आरोपितों के पकड़े जाने के बाद कई अहम सामने आने उम्मीद है। पुलिस इस मामले को लेकर बेहद संवेदनशील है और आतंकी संगठनों से गिरोह के संबंध होने की संभावना को देखते हुए पड़ताल कर रही है।
    इंडिया में कराते थे बात
    -पकड़े गये आरोपितों ने पुलिस को बताया- "वह खाड़ी देशों में काम करने गए लोगों को रिचार्ज वाउचर बेचते थे और अपने बनाए गए आवेदन की मदद से उनकी इंडिया में बात कराते थे।
    -बरामद किए गए मोबाइल फोन की कॉल डिटेल भी पुलिस निकलवाएगी, जिससे गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में पता किया जाएगा।
    -पुलिस को पता चला है कि नसीम ने दिलशाद की मदद से पहला अवैध टेलीफोन एक्सचेंज इलाहाबाद में खोला था। आरोपितों ने 8 एमबीपीएस का तीन कनेक्शन लिए थे।
    -वहां पर नेटवर्क का संचालन ठीक से नहीं होने के कारण पूरा धंधा लखनऊ से शुरू करने कर दिया था।
    -मूलरूप से जफर कलोनी तिवारीपुर गोरखपुर निवासी नूर मोहम्मद और करमाई बुजुर्ग गुल्हरिया गोरखपुर निवासी मनोज कुमार गुप्ता के बैंक खातों की पुलिस ने पड़ताल की है।
    करोड़ों रूपए का लेनदेन होना बताया जा रहा
    -सूत्रों बताते हैं कि नसीम ने नूर मोहम्मद के खाते में सऊदी अरब से मोटी रकम भेजी थी। यह लेनदेन करोड़ों रुपये का बताया जा रहा है।
    - दिलशाद ने अधिकतर बीएसएनएल के सिम इलाहाबाद से उपलब्ध कराए थे। पुलिस गिरोह में शामिल टेलीकॉम कम्पनियों के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच करेगी।
    -विदित हो कि कृष्णानगर पुलिस ने बाराबिरवा चौराहे के पास से नूर मोहम्मद व मनोज गुप्ता को रविवार को गिरफ्तार कर उनके पास से 22 पासपोर्ट व भारी संख्या में सिम बरामद किए थे। उसके बाद ही जांच में पूरा मामला खुलता चला गया और फर्जी टेलीफोन एक्सचेंन्ज संचालित करने का भण्डाफोड़ किया था।
    रविवार को हुआ था खुलासा
    -लखनऊ पुलिस ने रविवार की शाम को एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो इंटरनेशनल कॉल को लोकल बनाकर करोड़ों रुपए की हेराफेरी करते थे। पुलिस ने गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया था।
    -एसएसपी दीपक कुमार ने बताया था- "खुफिया विंग की विशेष शाखा से कुछ दिन पहले इस इंटरनेशनल कॉल रैकेट के बारे में सूचना मिली थी। इसके बाद एक स्पेशल टीम का गठन किया गया था।
    -एसएसपी के मुताबिक पकड़े गए आरोपी इंटरनेट के जरिए इंटरनेशनल कॉल को लोकल में कनवर्ट कर देते थे। इसके बाद अपने निजी सिम नंबर के जरिए खाड़ी देश में रहने वाले लोगों के परिवार के नंबर फारवर्ड कर देते थे। इन कॉल्स की मॉनिटरिंग करना भी आसान नहीं है। पुलिस से बचने के लिए इन आरोपियों ने टूर एंड ट्रैवेल्स कंपनी खोल रखी थी।
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