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पैसे की कमी से नहीं कर सका MBA, अब बाप-बेटे एक ही जिले में हैं जज

उज्ज्वल सिंह | Last Modified - Nov 11, 2017, 10:00 AM IST

2016 में हुआ था राहुल मिश्रा का PCS-J में सिलेक्शन, आई थी 9वीं रैंक।
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    राहुल मिश्रा की पढ़ाई-लिखाई वाराणसी में पूरी हुई है। मूलत: ये बिहार के रहने वाले हैं।
    लखनऊ. सक्सेज सीरीज में DainikBhaskar.com ने कोलकाता की सिविल कोर्ट में तैनात जज राहुल मिश्रा से बात की। उन्होंने अपने संघर्षों की कहानी बयां की। उनकी पढ़ाई वाराणसी में हुई है। उनके पिता भी उसी जिले में जज हैं, जहां राहुल की तैनाती है। वो कहते हैं- ''ऐसा पहली बार है कि पिता-पुत्र 10 साल के लिए एक ही जिले में जज हैं।''
    13 की उम्र में हो गई थी पिता की शादी
    - राहुल ने बताया, "13 साल की उम्र में मेरे पिता मदन मोहन मिश्रा और मां लीलावती की शादी हो गई थी। उस समय मां उनसे 2 महीने छोटी थी।''
    - ''मां उस समय क्लास 9th में पढ़ रही थीं। लेकिन शादी के बाद घर की जिम्मेदारी आने के बाद उनकी पढ़ाई छूट गई। पिता जी उस समय क्लास 10th के छात्र थे।''
    - ''18 की उम्र में पिता जी बीएससी के छात्र थे। उसी समय मेरे बड़ी बहन का जन्म हुआ। इसके बाद एक बड़े भाई फिर मैं तीसरे नंबर पर हूं। पिता जी बीएससी की पढ़ाई पूरी करने के बाद लॉ करने वेस्ट बंगाल चले गए।"
    स्कूल के लिए एक साथ 4 टिफिन बनाती थीं मां
    - राहुल कहते हैं- "हम लोग भी बंगाल चले गए। मां चार टिफिन बनाती थी। तीन हम भाई-बहन के लिए और एक पापा के लिए।''
    - ''पढ़ाई पूरी हो गई तो वे बंगाल में ही वकालत करने लगे। इसके बाद मां ने हमें पढ़ाने के लिए वाराणसी आ गईं। उस समय मैं क्लास थर्ड में था। हम तीनों की पढ़ाई वाराणसी में ही हुई।"
    पैसे की कमी से नहीं कर सका MBA
    - "पिता जी वकालत करते थे। उसी दौरान उनका सिलेक्शन पीसीएस-जे में हो गया। लेकिन उस समय उनकी सैलरी ज्यादा नहीं थी। हम वाराणसी में किराए के मकान में रहते थे।''
    - ''मेरा पढ़ने में ज्यादा मन नहीं लगता था। इसलिए ग्रैजुएशन के बाद मैंने MBA करके प्राइवेट जॉब करने के बारे में सोचा। लेकिन जब ये बात मैंने पिता जी को बताई तो उन्होंने पैसे की कमी की बात कहकर मना कर दिया। उसके बाद मैंने भी लॉ करके वकालत करने का मन बनाया।"
    पहले ही प्रयास में हुए थे जज
    - "मैं भी वेस्ट बंगाल चला गया और वहां लॉ में एडमीशन ले लिया। 2015 में लॉ पूरा होने के बाद वहां की कोर्ट में वकालत करने का प्लान था। उसी समय वेकेंसी आ गई। मैंने फॉर्म भर दिया लेकिन सिलेक्शन नहीं हुआ। 2016 में दूसरी बार एग्जाम दिया, इस बार सफलता मिल गई। 9th रैंक आई।"
    मां के संघर्षों से मिली प्रेरणा
    राहुल का कहना है " मुझे मां के संघर्षों से प्रेरणा मिली। इतनी कम उम्र में तीन बच्चों की जिम्मेदारी उठाकर पिता जी से दूर अकेले वाराणसी में रहते हुए उन्होंने हमें पढ़ाया।''
    - ''ये बात मेरे जहन में थी कि मां हम लोगों के लिए ही पिता जी से इतनी दूर अकेले रहते हुए संघर्ष कर रही है।"
    बाप-बेटे एक ही जिले में हैं जज
    - "ऐसा पहली बार हो रहा है- कोई पिता-पुत्र एक साथ 10 साल तक एक ही स्टेट में जज रहेंगे। राहुल ने बताया, हम दोनों कोलकाता के नॉर्थ- 24, परगना जिले की अलग-अलग कोर्ट में तैनात हैं। अभी पापा के रिटायरमेंट में 10 साल हैं। ऐसे में ये पहली बार कि मैं पापा के साथ इतने लंबे समय तक साथ काम करूंगा।"
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    राहुल के माता-पिता की शादी 13 साल की उम्र में हुई थी।
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    राहुल तीन भाई बहनों में सबसे छोटे हैं।
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    वो कहते हैं-'ऐसा पहली बार है कि पिता-पुत्र 10 साल के लिए एक ही स्टेट में जज हैं।
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Web Title: Father Son Posted Judge Together
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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