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HC की खबरें: पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति की जमानत अर्जी खार‍िज

अपहरण और छेड़छाड़ के मामले में पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Nov 16, 2017, 11:08 PM IST

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    27 जुलाई, 2017 को पुलिस ने अपहरण व छेड़छाड़ के आरोप में गायत्री प्रजापति के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। (फाइल)

    लखनऊ. कोर्ट ने सीजेएम संध्या श्रीवास्तव के अपहरण और छेड़छाड़ के मामले में पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। उन्होंने प्रथम दृष्टया अभियुक्त गायत्री के इस अपराध को गंभीर और अजमानतीय करार दिया है। फिर खारिज हुई जमानत अर्जी...


    - अभियेाजन के मुताबिक 26 अक्टूबर, 2016 को चित्रकुट की एक महिला ने थाना गोमतीनगर में आईपीसी की धारा 294, 504 और 506 में बबलू सिंह व आशीष शुक्ला के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।

    - विवेचना के दौरान इस मामले में गायत्री का भी नाम प्रकाश में आया था। साथ ही, इस मामले में अभियुक्तों के खिलाफ अपहरण और छेड़छाड़ का भी आरोप पाया गया।

    - 29 अप्रैल 2017 को पुलिस ने इस मामले में गायत्री का न्यायिक रिमांड हासिल किया।

    - 27 जुलाई, 2017 को पुलिस ने अपहरण व छेड़छाड़ के आरोपों की बढ़ोत्तरी करते हुए बबलू व आशीष के साथ ही गायत्री प्रजापति के खिलाफ भी आईपीसी की धारा 354 (ए) (।।), 364, 511, 504 व 506 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया।

    - बीते 8 नवंबर को अदालत ने आरोप पत्र पर संज्ञान लिया।

    यह था पूरा मामला

    - 18 फरवरी, 2017 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गायत्री प्रसाद प्रजापति व अन्य छह मुल्जिमों के खिलाफ थाना गौतमपल्ली में गैंगरेप, जानमाल की धमकी व पॉक्सो ऐक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था।

    - सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश पीड़िता की अर्जी पर दिया था। पीड़िता ने गायत्री प्रजापति व उनके साथियों पर गैंगेरप का आरोप लगाते हुए अपनी नाबालिग बेटी के साथ भी दुष्कर्म के प्रयास का आरोप लगाया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने गायत्री समेत सभी मुल्जिमों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

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    कोर्ट ने डॉ. शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय के VC के खिलाफ जांच आदेश को किया रद्द

    लखनऊ.इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने गुरुवार को डॉ शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुर्नवास विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ निशीथ राय को बड़ी राहत दे दी। कोर्ट ने उनके खिलाफ जांच बिठाने और जांच के दौरान उन्हें कामकाज से सेवामुक्त रखने के संबधी आदेशों को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि विस्तृत आदेश शीघ्र ही जारी कर दिया जाएगा। डॉ राय की तरफ से दायर याचिका को किया मंजूर...

    - जस्टिस विक्रम नाथ एवं जस्टिस अब्दुल मोईन की डिवीजन बेंच ने डॉ राय की तरफ से दायर याचिका को मंजूर करते हुए यह आदेश पारित किया। मामले की सुनवाई पिछले तीन महीने में 28 तारीखों पर हुई।
    - राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह और उनके सहयेागी सरकारी अधिवक्ता अभिनव एन त्रिवेदी और रणविजय सिंह ने अपना पक्ष रखा। वहीं, डॉ राय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ एल पी मिश्रा , गौरव मेहरोत्रा और अभिनव सिंह ने पक्ष रखा।
    - इस केस में राज्य सरकार महाधिवक्ता के तर्को से बेंच सहमत नहीं हुई। कोर्ट ने महाधिवक्ता को पिछली तारीख पर सुझाया था कि डॉ राय के खिलाफ पारित आदेशों को रद कर दिया जाए और इस मामले को कुछ शर्तो के साथ रिमांड कर दिया जाए।
    - लेकिन महाधिवक्ता ने मेरिट पर पूरा फैसला सुनाने की बात बेंच के सामने रखी, जिसके बाद कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिका को मंजूर किया जाता है और विस्तुत आदेश 4-5 दिन में जारी कर दिया जाएगा।

    कोर्ट ने लिया ये फैसला
    - सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से संक्षिप्त प्रतिशपथपत्र दाखिल किया गया और कोर्ट के कहने पर भी विस्तृत प्रतिशपथपत्र दाखिल करने से महाधिवक्ता ने इंकार कर दिया।
    - उन्होंने कोर्ट से कहा कि वह रिकार्ड कोर्ट में पेश कर रहें है और रिकार्ड को देखकर ही बहस सुन ली जाए। रिकार्ड देखकर कोर्ट ने पाया कि गवर्निग काउंसिल की अर्जेंट बैठक बुलाने का कोई कारण नहीं दर्शाया गया था और न ही काउसिलं के 22 सदस्यों को प्रारम्भिक जांच रिपेार्ट ही प्रेषित की गयी थी।
    - ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि जब काउंसिल के मेम्बरेां के सामने पूरी जांच रिपेार्ट थी ही नहीं तो वह किस प्रकार मान बैठै कि डॉ राय के खिलाफ आगे जांच का आधार है।
    - कोर्ट ने डॉ राय के वकीलों के इस तर्क में बल पाया कि मौजूदा समय में काउंसिल में 22 में से केवल 15 सदस्य हैं, जिनमें से अधिसंख्य सरकारी पदों पर बैठे लोग है। ऐसे में बिना डॉ राय के खिलाफ जांच आगे बढ़ाने का जो निर्णय काउंसिल ने लिया है वह बिना मस्तिष्क का प्रयोग किए लिया गया है।

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