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भाई की हत्या का बदला लेने के लिए बना था डाकू, अब बन गई फिल्म

भाई की ह्त्या का बदला लेने लेने के लिए एक डाकू बने इस शख्स की कहानी बेहद दिलचस्प है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Nov 14, 2017, 12:15 AM IST

भाई की हत्या का बदला लेने के लिए बना था डाकू, अब बन गई फिल्म
लखनऊ.भाई की हत्या का बदला लेने लेने के लिए एक डाकू बने इस शख्स की कहानी बेहद दिलचस्प है। अपने भाई के हत्यारों को मारने के बाद इस डाकू ने पहली हत्या की तो उसके बाद अपराध जगत में ये इतना फेमस हो गया कि यूपी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया। 15 सालों तक इसे पुलिस पकड़ नहीं सकी।DainikBhaskar.comने 1976 में पुलिस की गोली से मारे गए बरसाती डाकू की 80 साल की पत्नी जगरानी से बात की। इस दौरान उन्होंने बरसाती डाकू के बारे में कई अनसुनी बातें बताईं। कौन था बरसाती डाकू...
- बरसाती डाकू अमेठी जि‍ले के थोरा गांव का रहने वाला था। वो शुरू में मेहनत-मजदूरी करता था, लेकिन भाई की हत्या का बदला लेने के बाद वो एक खूंखार अपराधी बन गया।
- वो अपने तीन भाइयों रामचरन, बिर्जू, रघु के साथ आपराधिक वारदातों को अंजाम देता था। उसके खौफ से आसपास के जिलों के कई गांव थर्राते थे। 70 के दशक में वो पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती था। उसके साथ हुई मुठभेड़ में कई पुलिस कर्मी शहीद भी हुए थे।
ऐसे बना डाकू
- बरसाती डाकू की पत्नी जगरानी ने बताय, "गांव में गीत-संगीत का कार्यक्रम था। मेरे पति भी अपने बड़े भाई लल्लू के साथ प्रोग्राम में गए थे। इसी दौरान बैठने की दरी को लेकर विवाद हो गया और वहां मौजूद कर्मबली कश्यप ने फावड़े से मारकर की हत्या कर दी। इसके बाद ये पुलिस से शिकायत करने गए तो पुलिस ने इन्हें डांटकर भगा दिया।''
- ''इसी का बदला लेने के लिए 12 साल बाद उन्होंने अपने भाई रामचरन और दो चचेरे भाइयों के साथ मिलकर कर्मबली कश्यप की हत्या कर दी। इसके बाद पुलिस इन लोगों के पीछे पड़ गई और चारों भाई घर छोड़कर फरार हो गए। इस दौरान इन लोगों ने धीरे-धीरे अपना गैंग बड़ा कर लिया डाकू बन गए।''
15 सालों तक नहीं पा सकी पुलिस
- ''इनका गैंग करीब 15 साल तक पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना रहा। पुलिस से कई बार बरसाती गैंग की मुठभेड़ हुई, लेकिन पुलिस कभी भी उनको पकड़ नहीं सकी। इन मुठभेड़ों में कई पुलिस कर्मी भी शहीद हुए थे।''
- ''1973 में बरसाती के सबसे प्रिय भाई रामचरन का एन्काउंटर पुलिस ने कर दिया। गैंग के कई सदस्य भी मारे जा चुके थे। 15 साल तक वो अपने गांव के ही आसपास रहता था, लेकिन कभी पुलिस को उसकी भनक नहीं लग सकी। आसपास के कई गांवों के लोग उसे बचाने के लिए पुलिस को गुमराह भी करते रहते थे।''
- ''वो गरीबों की हमेशा मदद करता था। कई गरीब बेटियों की शादी भी कराई थी। इसीलिए लोग छिपने में उसकी मदद करते थे और पुलिस कभी अरेस्ट नहीं कर पाती थी।''
पहले भेजता था लेटर, फिर करता था लूट
- एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी ने बताया, ''बरसाती डाकू का आतंक इतना था कि वो लोगों को बताकर लूटपाट करता था। वह पहले चिठ्ठी भेज देता था कि आज वो लूटने आ रहा है और लूट करके चला जाता था।''
- ''प्रतापगढ़ के अंतू थाने के पास ही उसने डकैती डाल कर पुलिस को चुनौती दे दी थी। उस समय एसओ रहे सीपी शुक्ला ने बरसाती को मारने की कसम खाई थी। इसके बाद से ही दोनों एक दूसरे के दुश्मन हो गए थे।''
- ''इंस्पेक्टर ने जब डाकू को घेरा तो दोनों पक्षों से कई घंटों तक गोलियां चलती रहीं। इस मुठभेड़ में इंस्पेक्टर को गोली लगी और वो शहीद हो गए। जबकि बरसाती आसानी से फरार हो गया। अंतू थाने में आज भी शहीद सी.पी.शुक्ला की प्रतिमा लगी हुई है।''
ऐसे मारा गया था बरसाती
- जगरानी ने बताया, ''पति के एक दोस्त ने उन्हें मिलने के लिए सुल्तानपुर जिले के कादीपुर में बुलाया था। वहां से पहले ही पुलिस मौजूद थी। उनके पहुंचते ही वहां गोलियां चलने लगीं। इसमें उनको कई गोलियां लगीं और उनकी मौत हो गई।''
- ''इसके बाद गैंग के सभी सदस्य एक-एक कर पुलिस मुठभेड़ में मारे गए। बरसाती का एन्काउंटर उस समय अमेठी थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर रामजतन यादव ने किया था। इसके बदले सरकार ने उन्हें एक बुलेट और 11 हजार रुपए देकर सम्मानित किया था।''
अब बन गई फिल्म बरसाती गैंग
- बरसाती डाकू की कहानी पर अब एक फिल्म भी बनी है। 'बरसाती गैंग' नाम से ये फिल्म यूपी के कई थिएटरों में चल रही है। फिल्म के डायरेक्टर शिवकुमार विश्वकर्मा ने बताया कि ये फिल्म बरसाती के कैरेक्टर पर फोकस करके बनाई गई है। इस फिल्म में बरसाती का रोल उन्होंने खुद निभाया है।
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