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इनके ट्रांसफर से नाराज थे वाजपेयी, कल्याण सिंह ने कहा था- CM क्यों नहीं बन जाते

तबादले की खबर सुन वाजपेयी ने नहीं करवाया था इलाज।

Danik Bhaskar | Nov 16, 2017, 03:03 PM IST
फाइल । फाइल ।

लखनऊ. यूपी में एक बार फिर से चुनावी माहौल है। 1995-2005 तक लखनऊ के मेयर रहे डॉ एससी राय के दोस्त जेपी सिंह और तत्कालीन पार्षद रहे रमेश कपूर ने DainikBhaskar.com से बातचीत करते हुए बताए कुछ अनकही कहानियां बताईं।


-जेपी सिंह ने बताया- "डॉ एससी राय के व्यवहार और काबिलियत की वजह से जो मरीज एक बार उनके पास दिखाने के बाद कहीं और जाना पसंद नहीं करता था।"
-सरकारी चिकित्सक होने के नाते सभी विधायक व नेताओं का उनके यहां इलाज के लिए आना-जाना लगा रहता था। जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, वर्तमान गृहमंत्री राजनाथ सिंह, लालजी टंडन और मुरली मनोहर जोशी जैसे बड़े नेता शामिल थे।


कल्याण सिंह हुई थे नाराज
-प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने सीएम बनने के बाद उनका ट्रांसफर बलरामपुर जिला अस्पताल से हटाकर कानपुर के उर्सला हॉस्पिटल में कर दिया था।
-डॉ एससी राय ने बिना किसी से कुछ कहे अगले ही दिन वहां ज्वाइन कर लिया। लेकिन उसी रोज इलाज करवाने पहुंचे अटल बिहारी वाजपेयी उनके ट्रांसफर की खबर सुनकर निराश हो गए। उन्होंने अपने सहयोगियों से कहा कि- "मैं इलाज उनके अलावा किसी से नहीं कराऊंगा। उनके अलावा कई विधायकों को भी उदास वापस ही लौटना पड़ा था।"
-जब एससी राय के ट्रांसफर पर सरकार ने जवाब देते हुए सदन में कहा कि- "उनका ट्रांसफर पॉलिसी के हिसाब से हुआ है। सीएम कल्याण सिंह ने किसी की नहीं सुनी और ट्रांसफर कर दिया।"
-2 दिनों तक यूपी सदन इसी बात को लेकर हंगामा होता रहा। उसके बाद कांग्रेस विधायक डीपी बोरा ने एक हस्ताक्षर अभियान चलाकर कल्याण सिंह के फैसले को बदलने का प्रयास किया, जिसमें पक्ष-विपक्ष के 200 विधायकों ने उनका ट्रांसफर रूकवाने के लिए हस्ताक्षर किया था। जेपी सिंह ने बताया- इससे कल्याण सिंह नाराज हो गए थे।
-कल्याण सिंह ने नाराज होकर डॉ एससी राय को बुलाकर कहा- 'जब तुम पॉलिटिकल इतनी पकड़ रखते हो, सारे विधायक और पार्टी भी तुम्हारे लिए बार-बार कह रही हैं। तो चुनाव लड़कर सीएम बन जाओ, राजनीति करो।"

सीएमओ नहीं बनने के लिए दी थी एप्लीकेशन
-जिस वक्त डॉ एससी राय का ट्रांसफर किया गया था। उसके तुरंत बाद ही उन्हें सीएमओ बनाने के लिए प्रमोट किया गया था। जिसके बाद उन्होंने सीएम कल्याण सिंह को लेटर लिखकर सीएमओ न बनाने की अपील की थी।
- डॉ एससी राय ने कहा- "मैं चिकित्सक रहकर मरना पसंद करूंगा, सीएमओ के लिए अपने को योग्य नहीं मानता हूं। इस लेटर को लिखने के बाद ही तुरंत उन्हें कानपुर के उर्सला हॉस्पिटल से निकालकर लखनऊ के बलराम हॉस्पिटल में फिर तैनात कर दिया गया था।"

मंत्र पढ़कर करते थे ऑपरेशन
-वहीं, तत्कालीन पाषर्द रहे रमेश कपूर ने बताया- "डॉ एससी राय अपने पूरे मेडिकल कैरियर में हमेशा मंत्र पढ़कर ही किसी ऑपरेशन की शुरूआत करते थे। बहुत ही ज्यादा आस्थावान व्यक्ति थे। गायत्री परिवार से उनका लगाव बहुत पुराना था। ऑपरेशन के दौरान वो गायत्री मंत्र पढ़ते थे।
-कई बार तो हॉस्पिटल के अलावा घर पर मरीज पहुंच जाते थे। जिससे उनके घर में परिवार में पत्नी और भाई भी उनके काम के प्रति लग्न की वजह से गुस्सा हो जाते थे।

जनता द्वारा निर्वाचित पहले मेयर थे

-1995 में पहली बार जनता द्वारा चुनकर मेयर प्रतिनिधि के रूप में डॉ एससी राय ही आए थे। उसके पहले तक मेयर को पार्षद के द्वारा चुना जाता था, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पहल पर संविधान के 84वें संशोधन के जरिए मेयर को जनता से सीधे चुनकर आने का प्रस्ताव पास किया गया।
-अटल बिहारी वाजपेयी ने पार्टी के अधिकृत कैंडिडेट के रूप में 1995 डॉ एससी राय का नाम आगे बढ़ाया, जिसके बाद इनको मेयर बनाया गया था।
-डॉ एससी राय अपने दूसरे कार्यकाल में निगम के अधिकारियों के विरोध में पैदल विधानसभा तक मार्च किया था।

फाइल । फाइल ।
फाइल । फाइल ।
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