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4 साल में 25 हजार से बना करोड़पति, फिर भी शादी के लिए किया स्ट्रगल

बरेली के दो दोस्तों ने 2013 में 25 हजार की जॉब छोड़ने के बाद नोएडा में एक ठेले पर चाय बेचने की शुरुआत की थी।

आदित्या मिश्रा | Last Modified - Nov 13, 2017, 12:05 AM IST

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    अभ‍िनव बताते हैं- वो और उनके दोस्त दोनों ही बचपन से साथ्ज्ञ पढ़े हैं।
    लखनऊ.यूपी के बरेली के रहने वाले दो दोस्त अभिनव टंडन और प्रमित शर्मा ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद 1 लाख रुपए से चाय बेचने का स्टार्ट अप शुरू किया। आज वो सलाना एक करोड़ से ज्यादा के टर्नओवर वाली कंपनी के मालिक हैं। खास बात ये है कि दोनों ने 2013 में ये बिजनेस शुरू किया था। अब 'चाय कॉलिंग' एक ब्रॉन्ड बन चुका है। इस नाम से 10 से ज्यादा इनकी आउटलेट रन कर रही हैं। अभिनव को अपने काम की वजह से शादी के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा था। तब जाकर शादी हो पाई थी। दोनों ने DainikBhaskar.com से बातचीत में अपने एक्सपीरियंसेज को शेयर किया।
    ऐसे बीता बचपन
    - अभिनव टंडन ने बताया, ''मैं और प्रमित शर्मा दोनों ही बरेली के रहने वाले हैं। दोनों ने एक साथ एक ही स्कूल से पढ़ाई की है। मेरा जन्म 4 फरवरी 1989 और प्रमित शर्मा का 14 जुलाई 1989 को हुआ था। मेरे पापा राजीव नारायण टंडन स्टेट बैंक में मैनेजर और प्रमित के पिता राजेश शर्मा चीनी का बिजेनस करते हैं।''
    - ''हमने हाईस्कूल की पढ़ाई बरेली के बीबीएल पब्लिक स्कूल से 2005 में कंप्लीट की है। मेरे हाईस्कूल में 87 और प्रमित के 84 परसेंट मार्क्स थे। दोनों ने उसी स्कूल से 2007 में इंटर की पढ़ाई पूरी की है। इंटर में मेरे के 84 और प्रमित के 80 परसेंट मार्क्स आए थे।''
    - ''हमने गाजियाबाद के अजय कुमार गर्ग इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़ाई की है। मैंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और प्रमित ने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। दोनों ही संपन्न परिवार से आते हैं और उनका बचपन काफी अच्छे से बीता था।''

    ऐसे आया था चाय कॉलिंग का IDEA

    - प्रमित बताते हैं ''हम दोनों दोस्त जब कॉलेज में साथ पढ़ाई करते थे, तब हमें चाय पीने के लिए कई बाहर जाना पड़ता था। चाय पीते टाइम हमें कई बार दुकान पर गंदगी नजर आती थी। साफ-सफाई न होने के कारण कई दुकानों से बिना चाय पि‍ए ही लौटना पड़ता था।''
    - ''यही प्रॉब्लम जॉब करते टाइम भी सामने आई थी। तब लगा क्यों न कुछ ऐसा किया जाए कि जिससे बिजेनस भी हो सके और लोगों को साफ-सुथरी चाय पीने को मिल सके। उसके बाद से ही हम दोनों ने 'चाय कालिंग' की नाम से आउटलेट खोलने का डिसीजन लिया था।''

    25 हजार और 40 हजार रुपए की छोड़ी Job
    - अभिनव टंडन के मुताबिक, ''इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद वो दिल्ली में क्रॉम्पटन फैन बनाने वाली कंपनी में क्वालिटी एनालिस्ट की पोस्ट पर कार्यरत थे। उस टाइम मुझे हर महीने 25 हजार रुपए की सैलरी मिलती थी। मैंने एक साल बाद ये जॉब छोड़ी दी।''
    - ''प्रमित भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद टीसीएस कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर था। मेरी तरह उसने भी 1 साल बाद जॉब छोड़ दी। जॉब छोड़ने के टाइम प्रमित को 40 हजार की सैलरी मिलती थी।''
    2013 में ठेले से हुई 'चाय कॉलिंग' की शुरुआत
    - ''हम दोनों ने एक साथ 2013 में जॉब छोड़ने के बाद नोएडा में एक ठेले पर चाय बेचने की शुरुआत की थी। उस टाइम हम चाय के साथ सैंडविच बेचा करते थे। इस काम के लिए हम लोगों ने एक लड़के को रखा था। 6 महीने के अंदर लोगों से अच्छा रिस्पॉन्स मिलने लगा।''
    - ''उसके बाद हम दोनों ने अपनी सेविंग में से 50-50 हजार रुपए मिलाकर 1 लाख रुपए में बरेली शहर में चाय कॉलिंग नाम से अपना पहले आउटलेट की शुरुआत की और चाय और सैंडविच बेचने लगे। चाय बेचने के लिए एक लड़के को काम पर रखा था।''
    - ''धंधा चल पड़ा। छह महीने के अंदर ही ठेले से शुरू किए हुए बिजनेस को एक बड़ी शॉप में कन्वर्ट कर दिया। हमने नोएडा सेक्टर -16 में अपनी चाय की पहली शॉप खोली। इसके बाद से हमने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा।''
    - ''आज चाय कॉलिंग एक कंपनी के रूप में कन्वर्ट हो गई है। दस आउट लेट के अंदर 30 से ज्यादा स्टाफ काम कर रहे हैं। उन्हें मिनिमम 6 से लेकर 12 हजार तक सैलरी दी जाती है।

    लखनऊ, नोएडा और बरेली में है 'चाय कॉलिंग' के दस से ज्यादा आउट लेट
    - अभिनव और प्रमित बताते हैं- ''हमने नोएडा शहर में एक आउट लेट से 'चाय कॉलिंग' की शुरुआत की थी। आज नोएडा, लखनऊ, बरेली समेत यूपी के कई बड़े शहरों में 10 से ज्यादा हमारे चाय के आउट लेट चल रहे हैं।''
    - ''यूपी के अलावा कई अदर स्टेट से भी लोग चाय कॉलिंग की फ्रेंचायजी लेने के लिए हमारे संपर्क में हैं। फ्यूचर में देश के सभी प्रमुख शहरों में खोलने की योजना है। हम यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से जल्द ही मुलाकात करने जा रहे हैं, ताकि सभी सरकारी ऑफिस में इसके आउटलेट खोल सकें।''

    शादी के टाइम आई थी काफी अड़चनें

    - ''मैंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के बाद 'चाय कॉलिंग' की आउट लेट खोली। इसके बाद से ही शादी के कई रिश्ते आने लगे। लेकिन कई रिश्ते मेरे काम की वजह से टूट गए। जब भी कोई लड़की वाले आते थे तब मेरे से एक ही क्वेश्चन पूछा जाता था- 'अच्छा बेटा तुम ये बताओ आखिर काम क्या करते हो।' मैं जब उन्हें बताता- 'मैं चाय का बिजेनस करता हूं तब उन्हें लगता था इंजीनियंरिंग के बाद चाय का बिजेनस।' भला ये कौन सा बिजनेस है।''
    - ''लोग हैरत की नजर से मुझें देखते थे। इस चक्कर में मेरे कई रिश्ते टूट गए। बाद में 2017 में एक मेरे लिए एक और रिश्ता आया था। मेरे से फिर वही सवाल पूछा गया। क्या काम करते हो? मैंने फिर वही जवाब दिया। चाय का बिजनेस है। लड़की पक्ष वाले थोड़ा हैरान हुए कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई एक बाद चाय की शॉप क्यों? फिर मैंने उन्हें समझाया कि चाय में भी अच्छा बिजनेस किया जा सकता है।''
    - ''मैंने उन्हें चाय कॉलिंग का पूरा कांसेप्ट समझाया। उसके बाद बड़ी मुश्किल से लड़की पक्ष वाले मेरी बात को समझ पाए। फरवरी 2017 में मेरी अरेंज मैरिज हो पाई।''
    - ''लेकिन प्रमित की शादी में कोई अड़चनें नहीं आई। उसके पापा चीनी का बिजनेस करते थे। पूरा परिवार बिजेनस में लगा था। इसलिए उसके रिश्ते के लिए लड़की पक्ष के लोगों ने कोई ऑब्जेक्शन नहीं किया। दोनों पक्षों के लोग उनके लव मैरिज शादी के पक्ष में थे। बाद में उनकी लव मैरिज शादी हुई।''
    क्या है 'चाय कॉलिंग'
    - ''चाय कॉलिंग चाय बेचने की एक शॉप का नाम है। जो आज एक कंपनी के रूप में कन्वर्ट हो चुकी है। यहां पर 15 तरीके की चाय मिलती है। एक मिडिल क्लास आदमी 2 रुपए से लेकर एक नौकरी पेशा आदमी 30 रुपए की चाय यहां से खरीदकर पी सकता है।''
    - ''चाय कॉलिंग के आउट लेट पर चाय के अलावा स्नैक्स भी मिलते हैं। इसका दाम 5 रुपए से लेकर 30 रुपए तक रखा गया है।''
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    कॉलेज और नौकरी टाइम पर चाय की दुकानों पर गंदगी देख ये आइड‍िया आया था।
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    यूपी भर में 'चाय कालिंग' एक ब्रॉन्ड बन चुका है। इस नाम से 10 से ज्यादा इनकी आउटलेट रन कर रही हैं।
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    प्रमित ने 40 हजार की जॉब छोड़कर ये बिजनेस ज्वॉइन किया था।
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    दोनों ने एक साथ 2013 में जॉब छोड़ने के बाद नोएडा में एक ठेले पर चाय बेचने की शुरुआत की थी।
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