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प्रदेश के हर जिले में निकलेगी अटल अस्थि कलश यात्रा, बटेश्वर से लखनऊ तक पूर्व पीएम की याद में स्मारक बनाएगी यूपी सरकार

प्रदेश की प्रमुख नदियां जिसमे गंगा, घाघरा, गोमती और सरयू जैसी नदियों में अटलजी की अस्थियां प्रवाहित की जायेंगी।

Dainik Bhaskar

Aug 18, 2018, 08:10 PM IST
Atal asthi kalash yatra in uttar pradesh

लखनऊ. गुरूवार को 93 वर्ष की उम्र में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हो गया। इस मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने एलान किया है कि हर जिले में अटल अस्थि कलश यात्रा निकाली जायेगी। साथ ही हर जिले की ख़ास नदियों में अटल की अस्थियां भी विसर्जित की जायेंगी। वहीँ सीएम के आदेश के बाद अटल से जुड़े स्थलों का कायाकल्प करने का प्लान भी यूपी के जिम्मेदार अफसर बनाने में जुट गए हैं।

अस्थि कलश यात्रा में हर जिले में एक मंत्री होगा शामिल: बीजेपी ने प्लान किया है कि अटल अस्थि कलश यात्रा हर जिले में निकाली जाए। जिससे जो कार्यकर्ता या उनका प्रशंसक इस यात्रा में शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि दे सके। तय किया गया है कि अस्थि कलश यात्रा में हर जिले में एक मंत्री होगा और एक सभा भी होगी। जिसमे सभी अपने विचार अटल जी के लिए रख पाएंगे।

प्रत्येक जिले की प्रमुख नदियों में प्रवाहित की जाएगी अस्थियां: इस सम्बन्ध में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि यूपी अटलजी की कर्मभूमि रही है। यूपी के हर क्षेत्र से उनका लगाव था। ऐसे में जनभावनाओं को देखते हुए तय किया गया कि प्रदेश की प्रमुख नदियां जिसमे गंगा, घाघरा, गोमती और सरयू जैसी नदियों में अटलजी की अस्थियां प्रवाहित की जायेंगी। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग अटल की अंतिम यात्रा में शामिल हो सके।

22 अगस्त को लखनऊ में होगी श्रद्धांजलि सभा -राजनाथ होंगे शामिल: भाजपा महानगर मुकेश शर्मा ने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर 22 अगस्त 2018 दिन बुधवार को शाम 4 बजे मोती महल लॉन पर श्रद्धांजलि सभा होगी। देश के गृहमंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह भी इस सभा में शामिल होंगे।

अटल की याद में योगी सरकार बनवाएगी स्मारक: वहीँ योगी सरकार ने फैसला लिया है कि बटेश्वर से लेकर लखनऊ तक अटल की याद में स्मारक बनवाये जायेंगे। जिसमे जन्मस्थान बटेश्वर, उच्च शिक्षा के लिए कानपुर, बलरामपुर से पहली बार सांसद बने और लखनऊ उनकी कर्मभूमि रही। यहां से वे 5 बार सांसद चुने गए। जबकि गोरक्षपीठ में स्मारक बनाया जायेगा। अटल का गोरक्षपीठ के तत्कालीन पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ से बेहतर रिश्ते थे। अमूमन पूर्वांचल में चुनाव प्रचार की शुरुआत वह गोरखपुर से करते थे।

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