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नेट और जेआरएफ के लिए चार सालों में 800 स्टूडेंट्स को फ्री में पढ़ा चुका है ये शख्स, 300 से ज्यादा सिलेक्ट भी हुए

बिहार के राजा पाठक ने कहा- जब घर से पैसा आता, तो लगता था कि कोई सामान बिका होगा

अमित मुखर्जी | Last Modified - Jun 11, 2018, 09:34 AM IST

  • नेट और जेआरएफ के लिए चार सालों में 800 स्टूडेंट्स को फ्री में पढ़ा चुका है ये शख्स, 300 से ज्यादा सिलेक्ट भी हुए
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    बीएचयू के डीन चंद्रमा पांडेय ने उन्हें कैंपस में एक क्लास मुहैया कराई।

    वाराणसी.बीएचयू के रिसर्च स्कॉलर राजा पाठक शिक्षा जगत के लिए एक मिसाल बन गए हैं। उन्होंने 2014 से 2018 के बीच करीब 800 स्टूडेंट्स को फ्री में नेट के कंबाइंड पेपर (मैथ्स, इंग्लिश, कम्प्यूटर साइंस, रीजनिंग, पॉलिटिकल साइंस) पढ़ाया। इसमें 300 से ज्यादा स्टूडेंट्स ने नेट, जेआरएफ क्वालीफाई किया। चार साल पहले बीएचयू के बगीचे में 9 स्टूडेंट को कोचिंग देने का सिलसिला शुरू हुआ। एक साल बाद संख्या 50 हो गई। बाद में डीन चंद्रमा पांडेय ने उन्हें कैंपस में ही एक बड़ा क्लास रूम दिया और आज स्थिति यह है कि उनकी क्लास में 300 से ज्यादा स्टूडेंट्स कोचिंग ले रहे हैं।2013 में नेट और जेआरएफ क्वालीफाई किया...


    - गोपालगंज बिहार के रहने वाले राजा पाठक जब दो साल के थे तब उनके पिता रामचंद्र पाठक का निधन हो गया।

    - परिवार में 6 बच्चों की जिम्मेदारी अचानक मां कलावती देवी पर आ गई। आर्थिक तंगी के कारण राजा 13 साल की उम्र में काशी संस्कृत विद्यालय नगवा पढ़ने आ गए।

    - चार भाई-बहनों में सबसे छोटे राजा यहां पढ़ाई के लिए इसलिए आए क्योंकि यहां संस्कृत विद्यालय में खाना मुफ्त में मिलता था। घर से साल में एक हजार रुपए मां भेजती थी।

    - कक्षा 5 से 12वीं की पढ़ाई के दौरान जब भी घर से पैसा आता था, राजा समझ जाते थे कि घर का कोई सामान बिका होगा।

    - इंटर के बाद बीएचयू में संस्कृत की पढाई में सिलेक्ट हुए। 2014-15 में बीएचयू में टॉप किया और देश के 100 प्रतिभाशाली छात्रों में शामिल हुए। इसके पहले 2013 में उन्होंने नेट और जेआरएफ क्वालीफाई किया।

    250 से ज्यादा स्टूडेंट्स इस साल नि:शुल्क शिक्षा ले रहे हैं

    - राजा इस साल 250 स्टूडेंट्स को फ्री में नेट, जेआरएफ की तैयारी करवा रहे हैं। अमूमन कंबाइंड की कोचिंग की फीस 24 से 30 हजार सालाना होती है।

    - इस बार उनके पास आने वाले स्टूडेंट्स की बढ़ती संख्या को देखकर उन्होंने अपने संस्थान में दाखिले की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी।

    - करीब 2000 से ज्यादा स्टूडेंट्स ने एप्लाई किया। 250 को सिलेक्ट किया गया। यहां बिहार के सुपर 30 की तर्ज पर विभिन्न राज्यों से आए स्टूडेंट्स शामिल किए गए हैं।

    बीएचयू के डीन ने कहा- राजा का कार्य शिक्षा के लिए वरदान

    - संस्कृत विद्या धर्म संकाय के डीन प्रो चंद्रमा पांडेय ने कहा कि एक समय राजा मेरे पास आया और कहा छात्रों को पढ़ाने के लिए रूम चाहिए। मुझे लगा जीवन में इससे बड़ा मौका कभी नहीं मिलेगा।

    - 2016-17 में उनके पढ़ाए 57 स्टूडेंट्स ने नेट क्वालीफाई किया। राजा शिक्षा का बाजारीकरण नहीं बल्कि पं. मदन मोहन मालवीय के मूल्यों को आगे बढ़ा रहे हैं।

    - सरकार को भी ऐसे लोगों की मदद करनी चाहिए। बीएचयू में पहले प्रयास में ही नेट क्वालीफाई करने वाले गणेश मिश्रा ने बताया कि मैं राजा सर के पहले बैच का छात्र था।

    - कंबाइंड की तैयारी काफी कठिन थी। लेकिन एक चबूतरे पर बैठकर ही राजा सर ने पढ़ाया। नतीजा सामने है।

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