अटल जी से जुड़े 2 किस्से / जब उन्होंने कहा था- लखनऊ के तख्त चौक की चाट और मलाई वाला पान बहुत याद आता है

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी। (फाइल फोटो) पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी। (फाइल फोटो)
अटल जी के साथ पत्रकार अंशुमन शुक्ला। (फाइल फोटो) अटल जी के साथ पत्रकार अंशुमन शुक्ला। (फाइल फोटो)
राज कुमार लाल श्रीवास्तव का फाइल फोटो। राज कुमार लाल श्रीवास्तव का फाइल फोटो।
अटलजी द्वारा श्रीवास्तव परिवार को भेजा शुभकामना सन्देश का पत्र। अटलजी द्वारा श्रीवास्तव परिवार को भेजा शुभकामना सन्देश का पत्र।
अटलजी द्वारा लिखा गया पत्र। अटलजी द्वारा लिखा गया पत्र।
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी। (फाइल फोटो)पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी। (फाइल फोटो)
अटल जी के साथ पत्रकार अंशुमन शुक्ला। (फाइल फोटो)अटल जी के साथ पत्रकार अंशुमन शुक्ला। (फाइल फोटो)
राज कुमार लाल श्रीवास्तव का फाइल फोटो।राज कुमार लाल श्रीवास्तव का फाइल फोटो।
अटलजी द्वारा श्रीवास्तव परिवार को भेजा शुभकामना सन्देश का पत्र।अटलजी द्वारा श्रीवास्तव परिवार को भेजा शुभकामना सन्देश का पत्र।
अटलजी द्वारा लिखा गया पत्र।अटलजी द्वारा लिखा गया पत्र।

  • पत्रकार अंशुमान शुक्ला ने अटल जी के साथ इंटरव्यू के किस्से शेयर किए
  • आज अटलजी की 95वीं जयंती, लोकभवन में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा

दैनिक भास्कर

Dec 25, 2019, 10:46 AM IST

लखनऊ. भारत रत्न और तीन बार प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी की आज 95वीं जयंती है। लोकभवन में अटलजी की प्रतिमा का अनावरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। अटलजी हर देशवासी की यादों में हमेशा रहेंगे। उनके किस्से-कहानियां अनेक हैं। दैनिक भास्कर आज अटलजी के जीवन से जुड़े कुछ किस्से आपके साथ शेयर कर रहा है।

पहला किस्सा

अटलजी ने कहा- अब पहले जैसी गप्पे नहीं लगा पाता
उत्तर प्रदेश में 30 साल से पत्रकारिता में सक्रिय अंशुमान शुक्ला ने अटलजी से जुड़े कई किस्से बताए। अंशुमान बताते हैं- '3 मई 2004 की बात है। जब बतौर प्रधानमंत्री अटलजी का इंटरव्यू लेने का मुझे मौका मिला था। सुबह 9 बजे से 10 बजे इंटरव्यू लेना था। अटलजी सदरी पहन रहे थे। बातचीत के सिलसिले में 45 मिनट के वक्त में मुझे कहीं ऐसा नहीं लगा कि मैं इतनी बड़ी शख्सियत के सामने बैठा हूँ। मैंने एक सवाल पूछा- आप इतने सालों से लखनऊ में हैं। प्रधानमंत्री रहते हुए आपको कौनसी कमी खलती है। उन्होंने उत्तर दिया- मैं अब उन लोगों से खुलकर कर नहीं मिल पाता हूँ जिनसे मिलता था। जिनके गले में हाथ डालकर कभी कुछ खाता था और गप्पे (बातचीत) किया करता था।'

तख्त वाला चाट खाने के लिए नहीं मिलता
शुक्ला बताते हैं कि पत्रकार वार्ता के दौरान अटलजी ने कहा- 'मुझे लखनऊ के चौक में तख्त पर लगाई जाने वाली वो चाट पसंद है। अब नहीं खा पाता हूँ और मलाई वाला पान भी हमसे दूर हो गया है। अटलजी ने मुझसे ही पूछ लिया- आपने कभी खाया? वहां की चाट खाए हो।

आपको सदरी फिट होने लगी
अंशुमान बताते हैं कि अटलजी का लखनऊ से जापान दौरा था। उन्हें जो सदरी पहनकर जाना था, वह फिट नहीं थी। इसलिए दर्जी को बुलाया गया। फिटिंग के बाद अटलजी ने दोबारा उसे पहनकर देखा तो मैंने कहा- अब तो सदरी फिट होने लगी। इस पर अटलजी बहुत तेज हंसे। वह बोले- देखिए, अब आपके सामने ही यह सदरी फिट हो रही है।

सर्किट हाउस में पिताजी के साथ मिला था
अंशुमान बताते हैं- जब अटलजी प्रौढ़ अवस्था थे, तब मेरी पहली मुलाकात इलाहाबाद में सर्किट हाउस में पिताजी के साथ हुई थी। वह पिताजी से आपातकाल में बन्द हुए लोगों के बारे में चर्चा कर रहे थे। वह आरएसएस-अपने संगठन से ज्यादा उन लोगों के बारे में पूछ रहे थे, जो दूसरे दल के थे। जेल में बन्द हुए थे।

दूसरा किस्सा

1967 में उत्तरप्रदेश के बलरामपुर से पहली बार सांसद बने

अटलजी उत्तर प्रदेश के बलरामपुर से पहली बार 1967 में सांसद बने थे। इसलिए उनका बलरामपुर से खासा जुड़ाव था। जब भी यहां आते, अपने परिचितों से मिलते। उनका हाल-चाल लेते। अटलजी का तुलसीपुर क्षेत्र में रहने वाले स्व. पूर्व चेयरमैन राजकुमार लाल श्रीवास्तव से भी गहरे ताल्लुक थे।

जंगल में रास्ता भटकने पर अटलजी बोले- वनविहार कर लेंगे, चुनाव प्रचार बाद में करेंगे
राजकुमार के बेटे एडवोकेट अवधेश कुमार श्रीवास्तव बताते हैं कि 1967 में जब वह 16 साल के थे, तब अटलजी यहां लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए आए थे। वह एक जीप से चुनाव प्रचार के लिए बघेलखण्ड की तरफ जा रहे थे। इसमें अटलजी, पिताजी और ड्राइवर था। रास्ते में रेहरा इलाके में पिताजी ने कहा- लगता हम लोग जंगल में रास्ता भटक गए। तब अटलजी ने कहा, कोई बात नहीं हम लोग वनविहार कर लेंगे। चुनाव प्रचार बाद में करेंगे।

जब अटलजी से मंत्री बनवाने की सिफारिश लेकर दिल्ली पहुंचे दो विधायक
अवधेश बताते हैं कि बलरामपुर जिले से दो विधायक भाजपा से जीते थे। पिताजी ने अटलजी को पत्र लिखा। इसमें सिफारिश करते हुए कहा- घनश्याम शुक्ला और राम प्रताप सिंह विधायक बन गए हैं, इनमें से एक को मंत्री बना दीजिए। लेकिन बात नहीं बनी। तब घनश्याम शुक्ला घर आए कहे। पिताजी से बोले- आप दिल्ली चलिए। पिताजी दोनों विधायकों को लेकर दिल्ली गए। वहां अटलजी से जिले का विकास और संगठन की मजबूती का वास्ता दिया लेकिन उन्होंने मना किया। तब पिताजी ने कहा- आपको बलरामपुर जिले ने सांसद बनाया था। आप जिले से मंत्री नहीं बनवा सकते। अटलजी ने निजी सचिव से कहा कलराज मिश्राजी को फोन कर दीजिए- आपको यूपी में मंत्रीमंडल में शामिल कर लिया जाए।

चुनाव जीते तो सिर पर मोर रख दिया तो गुस्सा गए अटलजी
अटलजी को चुनाव जीतने के बाद एक सभा को संबोधित करना था। मंच पर बैठने के समय ही एक व्यक्ति ने आकर उनके सिर पर मोर रख दिया तब अटलजी बहुत गुस्साए। बोले- जब मैं अविवाहित हूं तब इस तरह का कोई पहनावा नहीं पहनते। इसी दौरान मंच से बोला गया कि अब महान नेता अटलजी संबोधन करेंगे। इस पर फिर उन्होंने कटाक्ष किया। कहा- जीवित रहते हुए कोई महान नहीं होता। इसलिए मैं महान नहीं हूं। आपकी तरह मैं भी एक इंसान हूं।

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