उप्र / पूर्व मंत्री प्रजापति के ठिकानों पर सीबीआई का छापा, अवैध रेत खनन मामले में परिजनों से भी पूछताछ

Dainik Bhaskar

Jun 12, 2019, 01:28 PM IST



पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रजापति। पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रजापति।
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पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रजापति।पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रजापति।

  • अमेठी स्थित घर समेत कई ठिकानों पर सीबीआई छापेमारी कर रही है
  • गायत्री प्रजापति पर महिला से रेप का भी आरोप, इस समय जेल में हैं

लखनऊ. उत्तरप्रदेश में अवैध रेत खनन मामले की जांच कर रही सीबीआई ने बुधवार को अखिलेश सरकार में खनन मंत्री रहे गायत्री प्रसाद प्रजापति के अमेठी स्थित घर पर छापेमारी की है। गायत्री के अलावा इसी मामले में सीबीआई ने एमएलएसी रमेश मिश्र के ठिकानों पर भी छापेमारी की। सीबीआई प्रजापति के परिजनों से भी पूछताछ कर रही है। 

 

पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह के हैं करीबी
मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी माने जाने वाले गायत्री अखिलेश सरकार में रसूख वाले माने जाते रहे।खनन मंत्री रहते हुए उन पर अवैध खनन के अलावा कई संगीन आरोप लगे। प्रजापति पर एक महिला के साथ रेप का भी आरोप लगा। इस मामले में वह अभी जेल में हैं। 

 

हाईकोर्ट के निर्देश पर जांच कर रही सीबीआई 
इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने 2016 में इस मामले की जांच शुरू की। सीबीआई ने इस सिलसिले में अज्ञात लोगों के अलावा सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भी विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। 

 

एफआईआर में नेताओं और अधिकारियों के नाम 
एफआईआर में कुछ नेताओं और सरकारी अधिकारियों के नाम हैं। इनमें आईएएस अफसर बी. चन्द्रकला, आदिल खान, तत्कालीन खनन अधिकारी मोइनुद्दीन, समाजवादी पार्टी के एमएलसी रमेश मिश्रा और उनके भाई, खनन क्लर्क राम आश्रय प्रजापति, अंबिका तिवारी (हमीरपुर), सपा के एमएलसी संजय दीक्षित, खनन क्लर्क राम अवतार सिंह और उनके रिश्तेदार शामिल हैं। 

 

जनवरी में 14 जगहों पर हुई थी छापेमारी 
इससे पहले जनवरी में सीबीआई की टीमों ने लखनऊ, कानपुर, हमीरपुर, जालौन के अलावा दिल्ली समेत 14 जगहों पर छापेमारी की थी। सीबीआई टीम ने लखनऊ स्थित हुसैनगंज में आईएएस अधिकारी बी. चंद्रकला के आवास पर भी छापा मारा था। सफायर अपार्टमेंट में सीबीआई ने छापेमारी के दौरान कई दस्तावेज भी जब्त किए। एजेंसी के मुताबिक इन अफसरों और कर्मचारियों पर 2012 से 2016 के दौरान अवैध खनन की इजाजत देने और लाइसेंसों के रिन्युअल का आरोप है, जबकि नैशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) ने खनन पर रोक लगा रखी थी।

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