--Advertisement--

भारत को समझना है तो हमें संस्कृत की शरण में जाना होगा, भारत दुनिया के प्राचीन राष्ट्रों में से एक: सीएम योगी

संस्कृत को सीमित दायरे में कैद करके मत रखिए इसको आधुनिकता के साथ जोड़ने का प्रयास कीजिए

Danik Bhaskar | Aug 02, 2018, 05:07 PM IST

लखनऊ. सीएम योगी ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की परीक्षा में सर्वोच्च 10 स्थान प्राप्त करने वाले 40 विद्यार्थियों को सम्मानित किया। प्रथम तीन स्थान प्राप्त करने वाले 10 विद्यार्थियों को सम्मान स्वरूप एक-एक लाख रुपये, टैबलेट, मेडल व प्रशस्ति पत्र और शेष मेधावी विद्यार्थियों को 21-21 हजार रुपये, टैबलेट, मेडल व प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।

भारत को समझने के लिए संस्कृत जरूरी: इस दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा, 'भारत को समझना है तो हमें संस्कृत की शरण में जाना होगा। भारत दुनिया के प्राचीन राष्ट्रों में से एक है। अंग्रेज आए लेकिन जब भारत की चेतना आई तो उनको भागना पड़ा। भारत का स्वाभिमान जागृत न हो सके, इसलिए संस्कृत की उपेक्षा की गई।'


संस्कृत को सीमित दायरे में कैद करके मत रखिए: सीएम नो कहा, 'संस्कृत को सीमित दायरे में कैद करके मत रखिए इसको आधुनिकता के साथ जोड़ने का प्रयास कीजिए।' हम संस्कृत के पाठ्यक्रम को कंप्यूटर, गणित, विज्ञान व दुनिया की तमाम भाषाओं से जोड़ने का कार्य करेंगे ताकि लोग देववाणी के माध्यम से तमाम चीजों को जान सकें। संस्कृत साहित्य में बहुत कुछ है। अगर उस ओर ध्यान दिया होता तो संस्कृत को उपेक्षा का सामना न करना पड़ता। पाठ्यक्रम ऐसा बने कि हम अपनी परंपराओं से वंचित न हों और आधुनिकता का समागम भी हो। हम आधुनिकता के विरोधी नहीं रहे। हमने आधुनिकता को मान्यता दी है। शिक्षा के क्षेत्र में भी एक वर्ष में व्यापक परिवर्तन हुए हैं।

प्रदेश में प्रतिभा के साथ खिलवाड़ होता था: सीएम योगी ने कहा, पहले परीक्षा में दो महीने व रिजल्ट में एक महीने लगते थे। नकल के ठेके होते थे। प्रतिभा के साथ खिलवाड़ होता था। प्रदेश में जब शिक्षा विभाग ने ठाना कि मेधावियों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए तो नकलविहीन परीक्षा कराके दिखा दिया गया। नकलविहीन परीक्षा के बाद पहली बार हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के परिणाम एक ही दिन में आ गए। यह परिवर्तन करके दिखाया गया। संस्कृत माध्यमिक शिक्षा परिषद के गठन का मामला 2001 से लंबित था। इसका गठन करने में 17 वर्ष लग गए।