शादी पर पिता को याद करके भावुक हुईं विधायक अदिति, अखिलेश सिंह ने 3 दशक तक रायबरेली में किया राज

3 वर्ष पहले
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अपने पिता अखिलेश सिंह के साथ अदिति सिंह (फ़ाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
अपने पिता अखिलेश सिंह के साथ अदिति सिंह (फ़ाइल फोटो)
  • कांग्रेस विधायक ने किया ट्विट- I love you Papa, I miss you Papa.\"
  • पंजाब के नवाशहर सीट से कांग्रेस विधायक अंगद सिंह से आज हो रही शादी
  • अदिति के पिता अखिलेश सिंह की अंगद के विधायक पिता से थी पुरानी दोस्ती

रायबरेली.  रायबरेली सदर से विधायक अदिति सिंह पंजाब के नवांशहर से विधायक अंगद सिंह के साथ गुरुवार को दिल्ली में सात फेरे लेंगी। इस मौके पर अदिति सिंह ने भावुक होते हुए अपने दिवंगत पिता को याद किया। उन्होंने ट्वीट कर लिखा है, \"एक पिता की सबसे बड़ा सपना उसकी बेटी की शादी करना होता है, पापा आपने अंगद को मेरा सच्चा जीवनसाथी चुना, आज इस खुशी के मौके पर आप नही हैं, आपकी बहुत याद आ रही है। I love you Papa, I miss you Papa.\"
 

निधन से पहले अखिलेश सिंह ने तय की थी बिटिया की शादी

रायबरेली के सीनियर पत्रकार माधव सिंह बताते हैं कि अदिति सिंह की शादी उनके पिता ने अपनी मृत्यु से पहले ही तय की थी। दरअसल, अखिलेश सिंह और अंगद के पिता दोनों काफी समय से दोस्त रहे हैं। उन्होंने अपने रहते इसी दोस्ती को परवान चढ़ाया और रिश्तेदारी में बदल दिया।

कांग्रेस के गढ़ में कांग्रेस को झुकाया

माधव सिंह कहते हैं कि अखिलेश सिंह बहुत ही जीवट राजनीतिज्ञ रहे हैं। 1993 में कांग्रेस से जीते फिर 1996 और 2002 का भी चुनाव जीता। 2003 में कांग्रेस से मतभेद होने पर पार्टी छोड़ दी। 2007 में फिर निर्दलीय चुनाव जीते और लगातार रायबरेली में कांग्रेस को कमजोर करते रहे। यही नहीं उन्होंने 2012 में पीस पार्टी ज्वाइन की। अखिलेश की वजह से ही जिले में पहली बार पीस पार्टी का झंडा बुलंद हुआ।

हालात ये थे कि कांग्रेस की सीनियर लीडरशिप उन्हें हराने के लिए घर-घर जाकर वोट मांग रही थी लेकिन, जब चुनाव हुआ तो अखिलेश सिंह एक बार फिर रायबरेली सदर से चुनाव जीत चुके थे। आलम ये था कि रायबरेली की 5 विधानसभा सीटों में से 4 पर कांग्रेस का कब्ज़ा था जबकि सदर सीट पर अखिलेश सिंह काबिज थे।

अमेरिका से लौटकर अदिति ने पिता की विरासत को आगे बढ़ाया

अमेरिका से पढ़ाई कर और लंदन में कुछ वक्त जॉब करके लौटी अदिति सिंह 2017 विधानसभा चुनाव में अपने पिता की पारंपरिक सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही थी। अदिति की मुलाकात प्रियंका गांधी से हुई और एक बार फिर अदिति सिंह पिता अखिलेश सहित पार्टी में आ गईं थी।अदिति ने उस वक्त मीडिया से बातचीत में बताया था कि मैं लंदन में खुश थी लेकिन रायबरेली का पिछड़ापन मुझे कचोटता था. यही वजह थी कि मैं वापस आई।

अंतिम समय तक\"बाहुबली\" की छवि से नहीं छूटा पीछा

अखिलेश सिंह जहां मंझे हुए पॉलिटिकल व्यक्ति थे, वहीं उन पर बाहुबली का ठप्पा भी लगा हुआ था। सैय्यद मोदी हत्याकांड में भी उनका नाम आया था लेकिन बाद में उन्हें इस केस से बरी कर दिया गया। लेकिन राकेश पाण्डेय हत्याकांड में नाम आने की वजह से कांग्रेस से तनातनी हो गयी। इसके बाद वह अपने दम पर ही सदर सीट जीतते रहे। इसी साल 20 अगस्त को अखिलेश सिंह का निधन हो गया था।

पिता के नक़्शे कदम पर चली अदिति
अदिति सिंह भी अपने पिता के नक़्शे कदम पर चली. बीते 5 अगस्त को जब भाजपा सरकार ने कश्मीर में धारा 370 खत्म किया तो उन्होंने उसकी खुलकर तारीफ की। यही नहीं पिता की मौत के बाद भी जब यूपी सरकार ने महात्मा गाँधी जयंती पर विशेष सत्र का आयोजन किया तो अदिति पार्टी लाइन से हट कर सत्र में पहुंची थीं। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष को भी उनके खिलाफ कार्रवाई करने की चुनौती भी दी थी।

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