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विरोधी भी सुनने आते थे अटलजी का भाषण; खाना छोड़कर निकल पड़े थे प्लेन के यात्रियों की जान बचाने

डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा और अटलजी के बाद लखनऊ के सांसद रहे लालजी टंडन ने दैनिक भास्कर से उनसे जुड़े कुछ किस्से बताए

Dainik Bhaskar

Aug 17, 2018, 11:42 AM IST
Dinesh Sharma and Lalji Tandon tell about the untold story of Atal bihari vajpayee

लखनऊ. भारत रत्न और तीन बार प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हो गया। वे 93 वर्ष के थे। दो महीने से एम्स में भर्ती थे। इससे पहले वे 9 साल से बीमार थे। अटलजी का यूपी से खास लगाव रहा है। अटलजी पहली बार यूपी के बलरामपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद बने थे। वो लंबे समय तक लखनऊ के सांसद रहे। लखनऊ के पूर्व मेयर और उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा और अटलजी के बाद लखनऊ के सांसद रहे लालजी टंडन ने दैनिक भास्कर से उनसे जुड़े कुछ किस्से बताए।

दिनेश शर्मा ने दैनिक भास्कर से कहा कि मैं छोटा था तब मेरे पिता जी ने एक बार मुझसे कहा चलो तुम्हें आज एक नेता को दिखाता हूं। वह मुझे मोपेड पर बैठाकर लक्ष्मण मेला मैदान ले गए। वहां अटलजी की रैली होने वाली थी। तब ठंड बहुत थी वहीं कंबल ओढ़े तीन चार लोग मिले। जो कि कम्युनिस्ट पार्टी से थे। पिता जी ने उनसे पूछा आप लोग यहां पर, तब उनका जवाब था हम ही नहीं कई और लोग भी आए हैं अटलजी को सुनने के लिए। तब पहली बार मैंने अटलजी को भाषण देते देखा था।

लोगों से कहा था मुझे कुर्ता के साथ पैजामा भी चाहिए: दिनेश शर्मा ने अटलजी से जुड़ा किस्सा बताते हुए कहा, ''जब मैं लखनऊ के मेयर पद का चुनाव लड़ रहा था तब अटलजी लखनऊ के सांसद थे। वह मेरे प्रचार के लिए निकल पड़े। अटलजी ने जनता से कहा कि अगर मैं कुर्ता पहना हूं और पायजामा न पहनूं तो? इस पर कार्यकर्ताओं ने कहा कि अच्‍छा नहीं लगेगा। अटलजी ने कहा कि दिनेश शर्मा मेरे पायजामा हैं और वे नगर निगम के मेयर के रूप में चाहिए। अटलजी के बयान के बाद मैं बिना पैसा खर्च किए चुनाव जीत गया।''

रात में खाई थी खीर: दिनेश शर्मा ने बताया कि पहले भाजपा के नेता एक दिन कार्यकर्ताओं के यहां प्रवास किया करते थे। यह परंपरा अभी भी चल रही है। एक बार वह पंडित दीन दयाल जी के साथ हमारे घर पर रुके थे। तब हमारा घर बहुत छोटा सा हुआ करता था। ऐसे ही एक बार अटलजी मेरे घर पर खाना खाने आए। पिताजी के साथ उन्होंने भोजन किया। भोजन के बाद उनका मन खीर खाने का हुआ। उस समय खीर नहीं बनी थी तब पिता जी ने तत्काल खीर बनवाकर उन्हें खिलाई।

निकल पड़े थे प्लेन के यात्रियों की जान बचाने: बीजेपी नेता लालजी टंडन ने अटलजी को याद करते हुए कहा, ''उन दिनों देश में राम जन्मभूमि आंदोलन का दौर चल रहा था और अटलजी लखनऊ के सांसद हुआ करते थे। लखनऊ में अपने प्रवास के लिए आते तो मीराबाई रोड के गेस्ट हाउस में रुका करते थे। तब के तत्कालीन डीएम ने अटलजी से बताया कि अमौसी एयरपोर्ट पर एक युवक ने एक विमान हाईजैक कर लिया है। उसके हाथ में बम है। प्लेन हाईजैकर ने विमान को उड़ाने की धमकी दी है लेकिन यह भी कहा है कि अगर अटल बिहारी वाजपेयी आ जाएं तो मैं सभी यात्रियों को छोड़ दूंगा, इसलिए अगर आप हमारे साथ चलें तो शायद सभी की जान बच जाए। अटलजी ने खाना छोड़ा और डीएम के साथ चलने की हामी भर दी। अटलजी और सभी बीजेपी नेता एयरपोर्ट पहुंचे। वहां से विमान में संपर्क हुआ तो अटलजी ने हाईजैक करने वाले से बात की। उसने अटलजी की आवाज सुनकर कहा कि आप अटलजी नहीं हैं। इसके बाद अटलजी ने डीएम को विमान तक चलने को कहा। एक कार में अटलजी, लालजी टंडन, राज्यपाल के सलाहकार और डीएम विमान तक पहुंचे। लालजी टंडन ने युवक से बातकर अटलजी को विमान में बुलाया। अटलजी पहुंचे तो टंडन ने कहा कि वाजपेयीजी इतनी दूर से तुमसे मिलने आए हैं, इनका पैर तो छू लो। युवक अटलजी का पैर छूने के लिए झुका तभी वहां मौजूद एक पुलिसवाले ने उसे पकड़ लिया। उस युवक ने अपने हाथ में पड़े एक सुतली के गुच्छे को फेंकते हुए कहा कि उसके पास कोई बम नहीं है, वह तो सिर्फ इन्हें यह बताना चाहता था कि देश में राम जन्मभूमि आंदोलन को लेकर कितना आक्रोश है। युवक की गिरफ्तारी के बाद, अटलजी विमान में मौजूद सभी लोगों से मिले। विमान में एक सीट पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता सीताराम केसरी भी बैठे हुए थे। सहमे से केसरी के हाथ पैर कांप रहे थे, अटलजी उनके पास पहुंचे तो उन्होंने उन्हें हिम्मत बंधाई।''

कार्यकर्ताओं से कहते थे राजनीति की बात मत करो: अटलजी ने 1957 का लोकसभा चुनाव में जनसंघ से लड़ा था। उन्होंने यूपी की तीन सीटें लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर से चुनाव लड़ा था। लखनऊ में वो चुनाव हार गए थे जबकि मथुरा में उनकी ज़मानत ज़ब्त हो गई थी। बलरामपुर से चुनाव जीतकर वो पहली बार संसद में पहुंचे थे। बलरामपुर में अटल का चुनाव प्रचार कर चुके पुराने संघ कार्यकर्ता राम प्रकाश गुप्त बताते हैं कि उस समय जब हम चुनाव प्रचार करके वापस आते थे उस समय यदि कोई राजनीति की बात करता था तो वह बहुत नाराज होते थे। वह कहते थे कि यह समय खाने का है।

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