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यूपी: पॉलीथिन प्रतिबंधित करने के अध्यादेश को राज्यपाल ने दी मंजूरी, अब प्रयोग किया तो जाना होगा जेल या देना होगा जुर्माना

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने बीते 2 जुलाई को 15 जुलाई से प्रदेश में पॉलीथिन प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया था।

Dainik Bhaskar

Jul 16, 2018, 03:20 PM IST
governor approoves ordinance ban of plastic in up

लखनऊ. यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने बीते 2 जुलाई को 15 जुलाई से प्रदेश में पॉलीथिन प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया था। हालांकि 15 जुलाई को अध्यादेश को मंजूरी न मिलने की वजह से कहीं कोई कार्यवाई नहीं हो पायी थी लेकिन 15 जुलाई की देर शाम राज्यपाल रामनाईक ने प्लास्टिक और अन्य जीव अनाशित कूड़ा कचरा (उपयोग और निस्तारण का विनियमन) (संशोधन) अध्यादेश, 2018 को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही यह अध्यादेश तत्काल प्रभाव से यूपी के शहरी निकायों में लागू हो गया। इस अध्यादेश में 50 माइक्रॉन से पतली पॉलिथिन के इस्तेमाल को प्रतिबंधित कर दिया गया है।

अब जुर्माना होगा या जाना होगा जेल
-सोमवार से यूपी में 50 माइक्रॉन से पतली पॉलिथिन पर यह प्रतिबंध लागू हो गया है। अब कोई भी 50 माइक्रान से पतली पॉलिथिन प्रयोग करता पाया गया तो पहली बार में एक माह तक की सजा या कम से कम एक हजार और अधिकतम 10 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
-जबकि दूसरी बार अगर व्यक्ति प्रतिबंधित पॉलीथिन प्रयोग करता पाया गया तो 6 महीने की जेल या कम से कम 5 हजार रुपये और अधिकतम बीस हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

बनाने और बेचने पर भी होगी कार्यवाई
-यूपी में कोई व्यवसायी यदि पहली बार पॉलिथिन बैग बेचने, बनाने, बांटने, स्टोर करने और आयात-निर्यात आदि का दोषी सिद्ध होता है तो 6 महीने तक का कारावास या कम से कम 10 हजार रुपये और अधिकतम 50 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा। जबकि दूसरी बार इन मामलों में दोषी पाए जाने पर एक साल तक की सजा या कम से कम 20 हजार रुपये और अधिकतम एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जायेगा।

15 अगस्त से थर्मोकोल और प्लास्टिक के उत्पाद भी होंगे प्रतिबंधित
-आने वाले दिनों में प्लास्टिक के सिर्फ कैरीबैग ही नहीं बल्कि 15 अगस्त से प्लास्टिक के कप-प्लेट व अन्य उत्पाद भी बंद होंगे। फिर थर्मोकोल व प्लास्टिक के सारे उत्पाद बंद किये जायेंगे।
-जांच टीमों में जिला प्रशासन स्तर पर बनी टीम, शहरी निकाय और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम कार्यवाई कर सकती है। अभी तक जांच करने का जिम्मा केवल नगर निगम के पास था। नए अध्यादेश में जांच टीम की शक्ति भी बढ़ा दी गयी है कि वह किसी भी परिसर की जांच कर सकती है। इन टीमों के काम में अड़ंगा लगाने वाले के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकेगी।

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