उत्तर प्रदेश / हाईकोर्ट ने सीबीआई को दिया निर्देश, प्रतापगढ़ में इंस्पेक्टर की हत्या मामले की विवेचना 6 सप्ताह में पूरी करें

High court gives instructions to CBI, complete investigation of Inspector's murder case in Pratapgarh in 6 weeks
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High court gives instructions to CBI, complete investigation of Inspector's murder case in Pratapgarh in 6 weeks

  • याचिका में कहा गया है कि सीबीआई को निर्देश दिया जाए कि वह हत्याकांड की जांच निश्चित समयसीमा के भीतर पूरी करे
  • इंस्पेक्टर अनिल प्रतापगढ़ के सिटी केातवाली के इंचार्ज थे, उसी दौरान उनकी 19 नवंबर 2015 को हत्या कर दी गयी थी 

दैनिक भास्कर

Feb 20, 2020, 12:16 PM IST

लखनऊ/ प्रतापगढ़. इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने वर्ष 2015 में प्रतापगढ़ में यूपी पुलिस के इंस्पेक्टर अनिल कुमार की हत्या को लेकर सीबीआई को छह सप्ताह के भीतर विवेचना पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। मृतक इंस्पेक्टर की पत्नी आरती गुज्जर की ओर से दाखिल रिट याचिका पर सुनवायी करते हुए पारित किया।

यह आदेश जस्टिस रितुराज अवस्थी व जस्टिस विकास कुमार श्रीवास्तव की बेंच में मामले पर सुनवाई के दौरान एसपी क्राइम ब्रांच आर एन मिश्रा तथा डीएसपी मनोज कुमार सीबीआई एससीबी हाजिर हुए। इस दौरान सीबीआई की ओर से जवाबी हलफनामा पेश किया गया जिसका प्रतिउत्तर देने के लिए कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 3 हप्ते का समय प्रदान किया। 

याचिका दायर कर मांग की गयी है कि सीबीआई को निर्देश दिया जाए कि वह हत्याकांड की जांच निश्चित समयसीमा के भीतर पूरी करे। घटना की सीबीआई जांच हाईकेार्ट के 23 मई 2018 के आदेश से हो रही है।

कोर्ट ने 2018 में ही मामले में सीबीआई जांच का आदेश दिया था

दरअसल इंस्पेक्टर अनिल प्रतापगढ़ के सिटी केातवाली के इंचार्ज थे। उनकी 19 नवंबर 2015 को हत्या कर दी गयी थी जिसकी प्राथमिकी उसी दिन सिटी कोतवाली पर दर्ज करायी गयी थी। पोस्टमार्टम में इंस्पेक्टर की मृत्यु का कारण मृत्यु पूर्व लगी चोटों को बताया गया था। बाद में राज्य सरकार ने जनवरी 2016 में घटना की सीबीआई जाचं कराने की सिफारिश की थी। किन्तु केंद्र सरकार ने इसको नकार दिया था। जिसके बाद मृतक इंस्पेक्टर की पत्नी आरती की सीबीआई जांच कराने के लिए हाईकोर्ट की शरण ली । उनकी याचिका पर मंजूर  करते हुए हाईकोर्ट ने 23 मई 2018 को मामले की जाचं सीबीआई को सौंप दी थी।

कोर्ट में फिर से याचिका दायर कर सीबीआई पर आरेाप लगाया गया है कि केस की निष्पक्ष और तेज जाचं नहीं हो रही है। याची के वकील तर्क था कि मृतक की पत्नी का जो बयान उसने दिया है उसे भी दर्ज नहीं किया जा रहा है । याची ने अपनी याचिका में सीबीआई जैसी जांच एजेंसी केा कटघरे में खड़ा किया है।

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