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पुलिसवालों को देख डर गए दीये बेच रहे मासूम, बच्चों की आंख में आंसू देख दारोगा ने निकाला दिवाली को हैप्पी करने वाला IDEA

Dainik Bhaskar

Nov 28, 2018, 06:45 PM IST

अमरोहा में पुलिसवालों की एक कोशिश से HAPPY हो गई इन मासूमों की दिवाली।

अमरोहा, यूपी। पुलिसवालों की एक अच्छी पहल से एक गरीब परिवार ने खुशी-खुशी त्योहार मनाया। बात अमरोहा जिले की है। दिवाली पर बाजार सजा था। आशू नाम का बच्चा अपने भाई के साथ फुटपाथ पर दीये बेचने बैठा था। इस दौरान पुलिस का एक दस्ता बाजार का मुआयना करने निकला। दस्ते में सैदनगली थाने के थानाध्यक्ष नीरज कुमार थे, जो दुकानदारों को दुकानें लाइन में लगाने का निर्देश दे रहे थे। तभी उनकी नजर फुटपाथ पर मायूस बैठे बच्चों पर पड़ी। बच्चे जमीन पर बैठकर ग्राहक का इंतजार कर रहे थे। पुलिस को देखकर दोनों डर गए और उनकी आंख में आंसू आ गए। उनको लगा शायद अब उन्हें हटा दिया जाएगा। बच्चों की मासूमियत देख थानाध्यक्ष नीरज कुमार उनके पास गए और उनसे उनका नाम और परिवार के बारे में पूछा। उन्होंने बताया- मेरा नाम आशू है। मेरे पिता की मौत हो चुकी है। मां मजदूरी करती है। दीये इसलिए बेच रहे हैं, ताकि हम भी दिवाली मना सकें। लेकिन मेरा सामान कोई नहीं खरीद रहा।

बच्चों के बगल में खड़े होकर ग्राहकों को बुलाते रहे दारोगा जी

- बच्चों को अभी भी डर लग रहा था कि पुलिसवाले उसकी दुकान हटाने के लिए आए हैं। बच्चों ने कहा- अंकल जब हमारे दीये बिक जाएंगे तो हट जाएंगे। बहुत देर से बैठे हैं, मगर बिक नहीं रहे। हम गरीब हैं। दिवाली कैसे मनाएंगे? हमें मत हटाइए।

- नीरज कुमार ने बच्चों से कहा, दीये कितने के हैं, मुझे खरीदने हैं…। थानाध्यक्ष ने दीये खरीदे। उन्होंने अन्य पुलिस वाले को भी दीए खरीदने को कहा। इसके बाद थानाध्यक्ष ने देखा कि अभी भी बच्चों के पास काफी मात्रा में दिये बचे हैं। वे बच्चों के बगल में खड़े हो गए और बाजार आने वाले लोगों से दीये खरीदने की अपील करने लगे। देखते ही देखते सारे दीये बिक गए। जैसे-जैसे दीये बिक रहे थे बच्चों के चेहरे पर प्रशन्नता देखते बन रही थी।

- सारा सामान बिकने के बाद थानाध्यक्ष और पुलिसवालों ने बच्चों को तोहफा में कुछ पैसे अलग से भी दिए। पुलिसवालों की एक छोटी सी कोशिश से बच्चों की दिवाली हैप्पी हो गई।

- DainikBhaskar.com से बातचीत में थानाध्यक्ष ने कहा- बच्चों की मासूमियत देखकर हम पिघल गए। उनके जो सवाल थे, वो बहुत ही भावुक कर देने वाले थे। उनकी बातों ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया। इसलिए मैं और मेरे साथियों ने एक छोटी सी मदद करने की कोशिश की।

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