लोकसभा चुनाव  / अंतिम चरण के प्रचार का शोर थमा, मोदी के मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर

Dainik Bhaskar

May 17, 2019, 06:45 PM IST



last phase of voting campaign stopped
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last phase of voting campaign stopped

  • सातवें और अंतिम चरण में 19 मई को होगा मतदान
  • पूर्वांचल में बनारस, गोरखपुर और गाजीपुर समेत 13 सीटों पर डाले जाएंगे वोट

लखनऊ. लोकसभा चुनाव के आखिरी और सातवें चरण का चुनाव प्रचार आज थम गया। इस चरण में पूर्वांचल की 13 सीटों पर 19 मई को मतदान होगा। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी वोट डाले जाएंगे। इस अंतिम चरण में मोदी सरकार में केंद्रीय रेल एवं संचार राज्य मंत्री मनोज सिन्हा, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अनुप्रिया पटेल के साथ ही उप्र भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और चंदौली से सांसद महेंद्र नाथ पांडेय की प्रतिष्ठा दांव पर होगी। साथ ही सीएम योगी पर भी गोरखपुर में फिल्म अभिनेता रवि किशन को जिताने का दबाव होगा। 

 

सातवें चरण में पूर्वांचल के जिन संसदीय क्षेत्रों में चुनाव होना है उनमें महाराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, बांसगांव, घोसी, सलेमपुर, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, मिर्जापुर और राबर्ट्सगंज शामिल हैं।

 

नरेन्द्र मोदी, वाराणसी
2014 में मोदी को वाराणसी की जनता ने 3.5 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जिताया था। मोदी एक बार फिर वाराणसी सीट से मैदान में हैं। 2014 में नरेन्द्र मोदी का मुकाबला अरविंद केजरीवाल से था। इस बार उनके सामने कोई हाई-प्रोफाइल उम्मीदवार नहीं है। मोदी के खिलाफ कांग्रेस ने अजय राय को दोबारा प्रत्याशी बनाया है। वहीं सपा-बसपा गठबंधन से शालिनी यादव लड़ रही हैं। मोदी के सामने इस सीट से अपने जीत के अंतर को 2014 के मुकाबले और ज्यादा बढ़ाने की चुनौती होगी।

 

मनोज सिन्हा, गाजीपुर
गाजीपुर से रेल और संचार राज्यमंत्री मनोज सिन्हा भाजपा के उम्मीदवार हैं। वह इस सीट से तीन बार सांसद रह चुके हैं। इस हाई प्रोफाइल सीट पर मनोज को बसपा प्रत्याशी अफजाल अंसारी से कड़ी चुनौती मिल रही है। पिछली बार यहां सपा-बसपा ने अपने-अपने प्रत्याशी उतारे थे। इसके बाद भी मनोज सिन्हा 31,000 वोटों से जीत हासिल कर पाए थे। 2004 में अफजाल अंसारी ने मनोज सिन्हा को भारी मतों से हराया था। 2009 में भी यहां से सपा प्रत्याशी की जीत हुई थी।

 

महेन्द्र नाथ पांडे, चंदौली
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र नाथ पाण्डेय ने 2014 के चुनाव में वाराणसी से लगी चंदौली सीट पर जीत दर्ज कर पार्टी के लिए 15 सालों का सूखा समाप्त किया था। 2014 के चुनाव में बसपा के अनिल कुमार मौर्य को मात देकर महेंद्र नाथ ने चंदौली में फिर से कमल खिलाया था। लेकिन इस बार सपा-बसपा गठबंधन से पार पाना उनके लिए आसान नहीं होगा। वहीं कांग्रेस ने शिवकन्या कुशवाहा चुनावी मैदान में हैं। 2014 में शिवकन्या कुशवाहा गाजीपुर से मनोज सिन्हा के खिलाफ चुनाव लड़ी थीं और दूसरे नंबर पर रहीं थीं।


अनुप्रिया पटेल, मिर्जापुर
अपना दल की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल ने मिर्जापुर से 2014 में मोदी लहर में जीत हासिल की थी। 2016 में अनुप्रिया पटेल को मंत्रिमंडल में जगह दी गई। उन्हें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया।  जातिगत वोटों के सहारे वह चुनाव मैदान में हैं। लेकिन इस सीट पर अनुप्रिया को भाजपा के मछलीशहर से सांसद रामचरित्र निषाद चुनौती दे रहे हैं। इस बार वो समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार हैं। वहीं कांग्रेस ने ललितेश पति त्रिपाठी को मैदान में उतारा है। ललितेश उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमला पति त्रिपाठी के पौत्र हैं।

 

गोरखपुर में योगी पर भाजपा की वापसी का दबाव
योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में भी इसी चरण में चुनाव होना है। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद इस सीट पर उपचुनाव हुए। जिसमें भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। भाजपा ने इस बार रवि किशन को मैदान में उतारा है। वहीं सपा की तरफ से राम भुआल निषाद चुनाव मैदान में हैं। उपचुनावों में संजय निषाद ने भाजपा उम्मीदवार को हराया था। वह अब भाजपा के टिकट पर संतकबीरनगर से लड़ रहे हैं।

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