उप्र / स्कूल के बच्चों की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट सख्त, कहा- 2 मार्च तक सभी डीएम को बसों की फिटनेस रिपोर्ट देनी होगी

कोर्ट ने सरकार से कहा है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर निर्देशों का पालन जमीन पर दिखना चाहिए। कोर्ट ने सरकार से कहा है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर निर्देशों का पालन जमीन पर दिखना चाहिए।
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कोर्ट ने सरकार से कहा है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर निर्देशों का पालन जमीन पर दिखना चाहिए।कोर्ट ने सरकार से कहा है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर निर्देशों का पालन जमीन पर दिखना चाहिए।

  • लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को इस संबंध में एक अभियान चलाने का आदेश दिया
  • कोर्ट ने सरकार से पूछा- क्या स्कूल की बसों में ट्रैकिंग सिस्टम नहीं लगाया जा सकता

Dainik Bhaskar

Jan 15, 2020, 04:34 PM IST

लखनऊ. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को 2 मार्च तक स्कूल की बसों का फिटनेस टेस्ट करवाकर उसकी रिपेार्ट तैयार करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर डीएम संबंधित यातायात अधिकारियों और पुलिस बल का प्रयोग कर सकते हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने अगली सुनवाई तक प्रमुख सचिव को स्कूल की बसों में ट्रैकिंग सिस्टम लगाए जाने की संभावना तलाशने को भी कहा है। अगली सुनवाई 27 मार्च को होगी।

पीठ ने कहा कि सभी जिलाधिकारी 2 मार्च तक अपनी रिपोर्ट प्रमुख सचिव परिवहन को देंगे और प्रमुख सचिव  21 मार्च तक ये रिपेार्ट कोर्ट में दाखिल करेंगे। कोर्ट ने प्रमुख सचिव, परिवहन विभाग को जिलाधिकारियों के कार्यों की माॅनीटरिंग करते हुए उनसे आदेश का अनुपालन कराया जाना सुनिश्चित करने निर्देश भी दिए हैं। यह आदेश चीफ जस्टिस गोविंद माथुर और जस्टिस चंद्र धारी सिंह की बेंच ने 'वी द पीपल' संस्था की ओर से वर्ष 2017 में दाखिल एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।

स्कूल बसों की दुर्घटनाओं को लेकर दिए निर्देश
एक याचिका में स्कूल की बसों से होने वाली दुर्घटनाओं और इनमें बच्चों के घायल- मृत्यु होने के मामलों का जिक्र करते हुए नियमित निरीक्षण की मांग की गई है। याचिका पर राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि 20 नवम्बर 2012 को इस संबंध में गाइडलाइन बनाते हुए स्कूली बसों के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा निर्देश पारित किए जा चुके हैं।

सिर्फ कागजों पर ही अनुपालन हो रहा है या जमीनी हकीकत भी यही है
कोर्ट ने याचिका में दी गई घटनाओं का जिक्र किया और कहा कि कागजों पर तो सरकार ने काफी काम किया है किन्तु क्या जमीन पर इनका पालन हो रहा है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि ज्यादातर स्कूली बसों में उक्त निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। इनके पालन के लिए किसी प्रकार के निरीक्षण के संबंध में सरकार की ओर से जानकारी नहीं दी गई है।

2 मार्च तक निरीक्षण अभियान पूरा करें
कोर्ट ने कहा कि प्रदेश की हर स्कूली बस का 20 नवम्बर 2012 के दिशा निर्देशों के अनुसार निरीक्षण किया जाए। 2 मार्च तक निरीक्षण अभियान पूरा करके अगले दस दिनों में सभी जिलाधिकारी अपनी रिपोर्ट प्रमुख सचिव, परिवहन विभाग को भेज दें, जिसे 21 मार्च तक कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।  

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