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सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी कम करने से बैंकों का नियंत्रण प्राइवेट हाथों में होगा जिससे कई विजय माल्या और नीरव मोदी पैदा होंगे-सीबीओए के संगठन महासचिव

पीएसबी को होने वाले शुद्ध घाटे का कारण केवल सरकार की दोषपूर्ण नीतियाँ हैं।

Danik Bhaskar | Aug 19, 2018, 06:35 PM IST

लखनऊ. केनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (सीबीओए) 1996 से अस्तित्व में है और केनरा बैंक में अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करने वाला एकमात्र मान्यता प्राप्त एसोसिएशन है। पूरे भारत में लगभग 28,500 अधिकारियों ने स्वयं इस महान संगठन, केनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के सदस्य के रूप में अपने आपको नामांकित किया है। सीबीओए अखिल भारतीय बैंक ऑफिसर्स कॉन्फ़ेडरेशन (एआईबीओसी) से संबद्ध है, जो बैंकों में पूर्ण बहुमत वाले अधिकारियों का सबसे बड़ा राष्ट्रीय संगठन है और बैंकिंग उद्योग में अधिकारियों के 3 लाख से अधिक (यानी 91%) का प्रतिनिधित्व करता है।

मीडिया के लोगों को संबोधित करते हुए कैनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (सीबीओए) और एआईएनबीओएफ के महासचिव जी वी मणिमारण ने कहा कि केनरा बैंक के पास बहुत मजबूत बुनियादी सिद्धांत हैं, जिसके कारण हम केवल एक तिमाही के भीतर ही भारी नुकसान से बाहर आ पाए। मार्च 18 में 3800 करोड़ रुपये का नुकसान होने के बाद, केनरा बैंक ने जून 18 को समाप्त तिमाही के दौरान 281 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया है। केनरा बैंक अपने मूलभूत सिद्धांतों और प्रतिबद्ध कर्मचारियों के बदौलत ही भविष्य में भी और कार्यनिष्पादन करता रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि सीबीओए नियमित रूप से समाज के जरूरतमंद लोगों के लाभ के लिए सामाजिक कल्याणकारी गतिविधियां कर रही है। सीबीओए ने पूरे वर्ष के दौरान वृद्धा आश्रम, अनाथाश्रमों, गरीब बच्चों के सहायतार्थ विभिन्न कल्याणकारी गतिविधियों के अलावा चेन्नई बाढ़, केरल बाढ़, सुकमा शहीदों के पीड़ित परिजनों को समय समय पर दान और सहायता प्रदान की है।

उन्होंने यह भी बताया कि बैंकर एक सम्मानजनक वेतन संशोधन के लिए लड़ रहे हैं जो कि हमारा अधिकार है। वेतन को कर्मचारी द्वारा किए जा रहे श्रम के पारिश्रमिक के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसे लाभप्रदता से नहीं जोड़ा जा सकता है। इस तथ्य को अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) द्वारा भी मान्यता प्राप्त है, जिनके सिद्धांत के आधार पर सातवें वेतन आयोग ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए सिफारिशें की हैं। बैंकर भी अपने वेतन को तय करने के लिए इसी सिद्धांत को अपनाने की मांग कर रहे हैं।

सीबीओए के संगठन महासचिव धनंजय सिंह ने कहा कि बैंकर, आम जनता के हित के लिए ही बैंकों के सार्वजनिक क्षेत्र की स्थिति को बनाए रखने के लिए लड़ रहे हैं, क्योंकि सरकारी बैंकों से हिस्सेदारी को कम करने से बैंकों का नियंत्रण अधिकार एवं सार्वजनिक संसाधन केवल प्राइवेट हाथ में होंगे जिसके परिणामस्वरूप कई और विजय मल्या और नीरव मोदी पैदा होंगे।

सीबीओए के उप महासचिव अंशुमान सिंह ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की वास्तविक स्थिति इतनी खराब नहीं है जितना दिखाया जा रहा है। सभी बैंकिंग उपक्रम ऑपरेटिंग मुनाफा कमा रहे हैं जो कि किसी भी संगठन की परिचालन दक्षता को जानने का मानक होता है। पीएसबी को होने वाले शुद्ध घाटे का कारण केवल सरकार की दोषपूर्ण नीतियाँ हैं। सीबीओए के क्षेत्रीय सचिव विवेक श्रीवास्तव ने कहा कि पीएसबी में जमा धन आम जनता और उधारकर्ताओं के हैं जो ऋण की चुकौती में चूक गए हैं, उन्होने आम जनता को धोखा दिया है। जनता को यह समझना चाहिए और बैंकर्स को सहयोग करना चाहिए उन डिफॉल्टर्स से अपने कड़ी मेहनत के पैसे वापस पाने में।

जी वी मणिमारण ने यह भी बताया कि 19 अगस्त को सीबीओए द्वारा आयोजित कार्यक्रमों की एक श्रृंखला बनाई गई है। "विश्व मानवतावादी दिवस" के अवसर दिव्यांग एवं गरीब महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सिलाई मशीन दान दिया जाएगा। इसके अलावा, एक मैराथन-सह-रैली आयोजित की जाएगी। केनरा बैंक परिवार संस्कृति को विकसित करने एवं युवाओं को एकजुट करने के उद्देश्य से और लोगों को बैंकिंग प्रणाली और सेवाओं में सुधार लाने के उद्देश्य से अभिनव विचार आमंत्रित करने के लिए एक दिवसीय युवा सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा।