सियासत / सांसद सावित्री ने नीला लिबाज छोड़ पहना था भगवा, अगला कदम क्या? सबकी टिकी निगाहें

Dainik Bhaskar

Dec 06, 2018, 07:10 PM IST



बीते एक साल से दलित उत्थान को लेकर सांसद सावित्री बाई फुले पार्टी लाइन से इतर रैलियां कर रही थीं। बीते एक साल से दलित उत्थान को लेकर सांसद सावित्री बाई फुले पार्टी लाइन से इतर रैलियां कर रही थीं।
X
बीते एक साल से दलित उत्थान को लेकर सांसद सावित्री बाई फुले पार्टी लाइन से इतर रैलियां कर रही थीं।बीते एक साल से दलित उत्थान को लेकर सांसद सावित्री बाई फुले पार्टी लाइन से इतर रैलियां कर रही थीं।
  • comment

  • तीन बार जिला पंचायत सदस्य, एक बार विधायक रह चुकी हैं सांसद सावित्री
  • दलितों के उत्थान के लिए बनाया है नमो बुद्धाय जन सेवा समिति

भोलानाथ शर्मा/बहराइच. बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस के मौके पर गुरुवार को बहराइच से भाजपा सांसद साध्वी सावित्री बाई फुले ने पार्टी से इस्तीफा देकर सियासी गलियारे में हलचल मचा दी है। कुछ लोग सावित्री के इस कदम को सूबे में दूसरी 'मायावती' बनने की कवायद मान रहे हैं तो कुछ का मानना है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा उन्हें टिकट नहीं देती, इसलिए दलित विरोधी का आरोप लगाकर उन्होंने पार्टी को छोड़ दिया। भाजपा का दामन थामने के लिए सांसद ने नीला लिबास छोड़कर भगवा पहना था, अब उनका अगला कदम क्या होगा, इसको लेकर कयास लगने लगे हैं। 

 

2012 में पहली बार सावित्री बनीं थी विधायक

बहराइच के सीनियर जर्नलिस्ट अब्दुर्रहमान उर्फ बच्चे भारती बताते हैं- सावित्री बाई फुले ने 2002 के विधानसभा के चुनाव में भाजपा के टिकट पर पहली बार चर्दा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। लेकिन, उन्हें सपा के प्रत्याशी से हार मिली। फिर 2007 में भी सावित्री को हार का सामना करना पड़ा था। 2012 में नए परसीमन के बाद हुए चुनाव में सावित्री ने सपा के प्रत्याशी को 34 हजार से अधिक मतों से हराया। यह पहला मौका था जब सावित्री विधायक बनीं। 

 

इससे पहले वह वर्ष 1996 के पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य चुनी गई थीं। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने सुरक्षित सीट बहराइच से टिकट दिया। इस बार भारी विरोध के बाद भी मोदी लहर में सावित्री ने जीत हासिल की। 

 

नमो बुद्धाय समिति का गठन किया

दलितों के उत्थान व संविधान को लागू करने की मांग को लेकर सावित्री ने नमो बुद्धाय समिति का गठन किया है। इसके अलावा एक सखी संगठन भी सावित्री की मदद करता है। सांसद ने अपने पूरे कार्यकाल में विकास के कोई काम नहीं किए, इसलिए स्थानीय स्तर पर काफी विरोध है। उन्होंने पहले बसपा में जाने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनीं तो चुनाव के ठीक पहले इस्तीफे का दांव खेल दिया है। सावित्री ने भाजपा तक पहुंचने के लिए साध्वी का लिबास पहना था, अब उनका अगला कदम क्या होगा, जल्द पता चल जाएगा। 

 

माया के समानांतरण खड़ा होना चाहती हैं सावित्री

बहराइच के सीनियर जर्नलिस्ट हेमंत मिश्रा बताते हैं कि राजनीति में बसपा सुप्रीमो मायावती के समानांतर अपने को खड़ा करने के लिए सांसद सावित्री बाई फुले दलितों का एजेंडा लेकर आगे बढ़ रही हैं। यही वजह है कि वह लगातार अपनी ही सरकार पर दलितों व पिछड़ों को आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए हमलावर रहीं। यूपी के अलावा मुंबई व अन्य कई प्रदेशों में रैलियां की। सांसद के साथ दलितों का एक बड़ा तबका साथ भी आया है। 

 

बचपन में ही हो गई थी शादी

बहराइच जनपद के नानपारा इलाके के नीलकोठी में गरीब परिवार में वर्ष 1981 में जन्मी सावित्री को नहीं पता था की वह आगे चलकर जनता की आवाज़ बनेंगी। तीन बहन व दो भाइयों में सबसे बड़ी सावित्री का विवाह उनके पिता ने महज 6 वर्ष कि उम्र में ही कर दिया था। सावित्री उस वक्त नानपारा स्थित वैद्य भगवानदीन बालिका विद्यालय में कक्षा 2 की छात्रा थीं। लेकिन, जब गौने का समय आया तो जिस युवक से उनका बाल विवाह किया गया था, उससे अपनी छोटी बहन की शादी करवा दी और आजीवन साध्वी का जीवन बिताने का प्रण ले लिया था। 

 

चाचा अक्षयबर कनौजिया हैं सांसद के गुरु

सांसद सावित्री को उनके चाचा अक्षयबर कनौजिया राजनीति के दांव-पेंच सिखाते हैं। नमो बुद्धाय जन सेवा समिति का संचालन का दायित्व भी अक्षयबर कनौजिया के पास है। बसपा-भाजपा गठबंधन की सरकार के वक्त कनौजिया ने सावित्री को तत्कालीन शिक्षा मंत्री सुखदेव राजभर से मिलवाया था। जर्नलिस्ट बच्चे भारती बताते हैं कि मोतीपुर में हुई मायावती कि जनसभा सावित्री को माइक पर बोलने का मौका दिया गया, तभी मायावती ने सावित्री को बसपा की सदस्यता दिलवाई थी। 

 

अयोध्या में भगवान बुद्ध के मंदिर का उठाया था मुद्दा

भाजपा व उससे जुड़े अनुषांगिक संगठन हमेशा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा समय-समय पर उठाते रहते हैं। लेकिन भाजपा में रहते हुए सांसद सावित्री बाई फुले ने कानपुर में बीते दिनों अयोध्या के विवादित स्थल पर भगवान बुद्ध के मंदिर निर्माण का मुद़्दा उठाया था। सांसद का कहना था कि, विवादित स्थल पर खुदाई के दौरान भगवान बुद्ध की प्रतिमा मिली थी।

COMMENT
Astrology

Recommended

Click to listen..
विज्ञापन

किस पार्टी को मिलेंगी कितनी सीटें? अंदाज़ा लगाएँ और इनाम जीतें

  • पार्टी
  • 2019
  • 2014
336
60
147
  • Total
  • 0/543
  • 543
कॉन्टेस्ट में पार्टिसिपेट करने के लिए अपनी डिटेल्स भरें

पार्टिसिपेट करने के लिए धन्यवाद

Total count should be

543
विज्ञापन