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यूपी: मौलवियों ने मदरसों में ड्रेस कोड का किया विरोध, कहा- यह संस्थान का काम; 2% बच्चों के लिए क्यों चिंतित है सरकार

योगी सरकार मदरसों में एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य कर चुकी है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jul 04, 2018, 04:12 PM IST

यूपी: मौलवियों ने मदरसों में ड्रेस कोड का किया विरोध, कहा- यह संस्थान का काम; 2% बच्चों के लिए क्यों चिंतित है सरकार

लखनऊ. यूपी के कैबिनेट मंत्री मोहसिन रजा द्वारा मदरसों में ड्रेस कोड लागू करने वाले बयान का मुस्लिम संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। मौलवी सूफियां निजामी ने कहा, 'देश में चल रहे सभी मदरसों और कॉलेज के लिए ड्रेस कोड सरकार द्वारा तय नहीं किया जाता है। यह निर्णय संस्थान की प्रबंध समिति लेती है। इस तरह का भेदभाव फिर मदरसों के साथ क्यों?'

सरकार मदरसों के लिए चिंतित ना हो: मदरसा दारूल उलूम फिरंगी महल ने भी मोहसिन रजा के बयान का विरोध किया है। मौलवी मोहम्मद हारून ने कहा, 'मदरसों के लिए क्या अच्छा है और क्या नहीं, यह हम पर छोड़ देना चाहिए। वैसे भी बमुश्किल 1-2 फीसदी बच्चे ही यहां पढ़ने आते हैं। सरकार को इसके लिए चिंतित नहीं होना चाहिए।'

क्या कहा था मोहसिन रजा ने: अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री मोहसिन रजा ने मंगलवार को कहा था कि मदरसों में आमतौर पर बच्चे कुर्ता-पायजामा पहन कर आते हैं। इससे उनकी पहचान एक धर्म विशेष से होती है। उनमें हीन भावना आती है। इसे खत्म करना जरूरी है। सरकार चाहती है कि मदरसे के बच्चे भी मुख्यधारा से जुड़ें। वे सामान्य स्कूली बच्चों की तरह दिखें।

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