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दुबई में जॉब का बोल मजदूर बनाए गए थे 2 हिंदू, इस मुस्लिम ने करवाया आजाद

दो महीने से बंधक बने हुए थे युवक, सोशल वर्कर ने खुद पैसा खर्च कर करवाई घर वापसी।

DainikBhaskar.com | Last Modified - May 11, 2018, 12:55 PM IST

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    सुल्तानपुर. पिछले दो महीने से दुबई में फंसे कृष्ण कुमार और सूरज गुरुवार को अपने गांव लौट आए। उन्हें एक बार फिर अपनों से मिलवाने के पीछे एक मुस्लिम सोशल वर्कर की मेहनत छुपी है। इन दोनों युवकों ने DainikBhaskar.com के साथ अपना पूरा संघर्ष शेयर किया।

    दुबई में बना लिए गए थे बंधक

    - कादीपुर कोतवाली के पहाड़पुर निवासी कृष्ण और सूरज नौकरी की तलाश में थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात एक स्थानी एजेंट से हुई।
    - कृष्ण बताते हैं, "हमने एजेंट को 90-90 हजार रुपए दिए थे कि वो हमारी दुबई में नौकरी लगवा दे। उसने ही सारा इंतजाम किया। हम 28 फरवरी को मुंबई एयरपोर्ट से दुबई गए थे। हमसे कहा गया था कि वहां नौकरी मिलेगी, लेकिन जब दुबई पहुंचे तो असलियत सामने आई। वो लोग हमसे ऑफिस वर्क की जगह मजदूरी करवाते थे।"
    - "हमें वहां का काम समझ नहीं आ रहा था। लंबी शिफ्टों में मजदूरी होती थी। पैसे भी बहुत कम मिल रहे थे। हमने जब मालिक से कहा कि हमें आगे काम नहीं करना तो उसने हमारे पासपोर्ट जब्त करके रख लिए।"
    - कृष्ण और सूरज के परिजनों ने जब दोनों के मालिक से बात की तो उसने पासपोर्ट देने के लिए दो लाख रुपए की डिमांड की।

    फिर हीरो बनकर सामने आए अब्दुल

    - सूरज ने बताया, "हमारे पिताजी अकबाल को किसी ने सोशल वर्कर अब्दुल हक के बारे में बताया। उन्होंने पूरा केस जानने के बाद मदद के लिए हामी भर दी। वो ही हमारी फाइल लेकर 22 मार्च को DM संगीता सिंह से मिले, फिर अपने खर्च पर हमारे परिवारों को विदेश मंत्रालय से मदद मांगने दिल्ली लेकर गए। अब्दुल जी की दो महीने की मेहनत के बाद हम दुबई से घर लौट पाए।"

    डेढ़ साल में कईयों को करवाया आजाद

    - जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर कादीपुर तहसील की सीएचसी कैम्पस के क्वार्टर में सोशल वर्कर अब्दुल हक़ का परिवार रहता है। उनके पिता सीएचसी में ही पोस्टेड हैं।
    - हक पिछले डेढ़ साल से विदेश में फंसे युवकों की मदद में जुटे हैं। अपनों को मिलवाने के इस नेक काम में वे प्रशासन से लेकर मंत्रालय तक होने वाला खर्च वे स्वयं ही करते हैं।
    - अब्दुल लोगों को फंसाने वाले रैकेट के खिलाफ भी वर्क कर रहे हैं।

    ऐसे बने सोशल वर्कर

    - अब्दुल हक़ बताते हैं, "अगस्त 2016 की बात है। मैं एक पूर्व विधायक के घर पर था। वहां उनसे मिलने सराय कल्याण गांव के कुछ लोग अरब देशों में फंसे अपने बेटे को बचाने की गुहार लगाने पहुंचे थे। उनकी बातें सुनकर मुझे लगा प्रेजेंट टाइम में यह एक बड़ी समस्या बन चुकी है। इस दिशा में कोई काम करना चाहिए।"
    - "मदद मांगने आए परिवार का बेटा जनवरी 2015 में सऊदी अरब गया था, लेकिन वहां जाने के 6 महीने बाद ही उसका घर से कनेक्शन टूट गया। मैंने उनकी मदद करने के लिए एंबैसी लेटर लिखा तो पता चला कि उसकी मौत हो चुकी है। उसके शव को परिजनों तक लाने में लगभग 6 महीने का समय लग गया। 22 दिसम्बर 2016 को सऊदी से उसका कंकाल घर आ सका। उस केस के बाद से ही मैं लोगों की मदद कर रहा हूं।"

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Web Title: Muslim Social Worker Help Free Hindu Youths From Dubai
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