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सीएए का विरोध / प्रियंका गांधी की शिकायत के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया एक्शन, मुख्य सचिव और डीजीपी तलब

National Human Rights Commission summoned Chief Secretary and DGP for demonstrations in protest against CAA, sought reply in 6 weeks
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National Human Rights Commission summoned Chief Secretary and DGP for demonstrations in protest against CAA, sought reply in 6 weeks

  • महासचिव  प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल 27 जनवरी को मानवाधिकार आयोग से मिलकर शिकायत दर्ज करवाई
  • 12 फरवरी को महासचिवप्रियंका गांधी आज़मगढ़ पहुंचकर पीड़ितों से मुलाकात करेंगी, पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने भी उठाया था आजमगढ़ का मुद्दा

Dainik Bhaskar

Feb 10, 2020, 05:55 PM IST

लखनऊ. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी व अन्य कांग्रेस नेताओं की शिकायत पर नागरिकता संशोधन अधिनियम एवं एनआरसी के खिलाफ उत्तर प्रदेश में चल रहे शांतिपूर्ण-लोकतांत्रिक आंदोलन के दौरान पुलिसिया हिंसा और उत्पीड़न पर यूपी के मुख्यसचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस भेजकर छह समाप्त के भीतर जवाब मांगा है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कांग्रेस महासचिव  प्रियांका गांधी को पत्र भेजकर अवगत कराया है कि उनकी शिकायत पर कार्यवाही हो रही है। नागरिक संशोधान अधिनियम (सीएए) के खिलाफ चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलनों पर उत्तर प्रदेश की पुलिस ने बर्बर तरीके से दमन और उत्पीड़न किया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी आंदोलनकारियों से जाकर मिलीं और पुलिसिया आंतक की कहानी सुनीं। इसके बाद  महासचिव  प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल 27 जनवरी को मानवाधिकार आयोग से मिलकर शिकायत दर्ज करवाई।

कई घटनाओं का जिक्र कर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया था
इससे पहले कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में शामिल वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने 27 जनवरी को आयोग से मुलाकात के बाद बताया था कि राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी वाड्रा ने आयोग को उत्तर प्रदेश में नागरिकों के मानवाधिकार हनन के बारे में विस्तार अवगत कराया है। उन्होंने कई घटनाओं का जिक्र किया और तथ्यों के साथ आयोग को बताया कि वहां किस तरह से लोगों के साथ अन्याय हो रहा है।

उप्र में 23 व्यक्तियों के खिलाफ प्रदर्शनों को लेकर केस दर्ज 
अपनी शिकायत में कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने आयोग को यह भी बताया था कि प्रदेश में 23 व्यक्तियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गयी है लेकिन एक भी पुलिसकर्मी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है। लोगों को गोली लगी है और उन पर चोट के निशान हैं। यहां तक कि प्रशासन को दोषी पुलिसकर्मियों तथा अधिकारियों के नाम भी दिए गये, वीडियो भी है लेकिन प्राथमिकी किसी भी पुलिसकर्मी के विरुद्ध नहीं हुई है।

इस बीच, पिछले दिनों आज़मगढ़ के बिलरियागंज में शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे आंदोलन का पुलिस ने बर्बर तरीके से दमन किया। 12 फरवरी को महासचिवप्रियंका गांधी आज़मगढ़ पहुंचकर पीड़ितों से मुलाकात करेंगी।

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